मुंबई: मुंबई गृहनिर्माण व क्षेत्रविकास मंडल (म्हाडा गोरेगांव विभाग) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली किस कदर लाचार, लापरवाह और संदिग्ध हो चुकी है, इसका प्रत्यक्ष और शर्मनाक उदाहरण मालवणी गेट नंबर 8 स्थित सामना नगर में देखने को मिल रहा है। दिंडोशी सिटी सिविल कोर्ट द्वारा समन जारी होने के बावजूद म्हाडा गोरेगांव विभाग की नींद नहीं खुली है। आज भी यहाँ का मुख्य आपातकालीन रास्ता (Emergency Access Road) अनधिकृत रूप से बंद (लॉक) है और उस पर बेधड़क अवैध पार्किंग चलाई जा रही है।
कोर्ट समन मिलते ही व्हाट्सएप पर आश्वासन, पर धरातल पर शून्य!
मामले की गंभीरता को उजागर करते हुए ‘वशिष्ठ वाणी’ के प्रधान संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक अनिल वशिष्ठ लगातार म्हाडा गोरेगांव के संबंधित अधिकारी रोहित शिंदे को घटनास्थल व अवैध पार्किंग के वीडियो और सबूत भेजकर तीखे सवाल पूछ रहे हैं।
- रोहित शिंदे का 6 महीने पुराना एक ही डायलॉग: हैरानी की बात यह है कि पिछले 6 महीनों से अधिकारी रोहित शिंदे का एक ही रटा-रटाया जवाब आ रहा है कि “पत्र जारी किया जा रहा है।” सूत्रों के अनुसार, जैसे ही दिंडोशी सिटी सिविल कोर्ट से म्हाडा को समन मिला, रोहित शिंदे ने तुरंत संदेश भेजकर दावा किया था कि जल्द ही कार्रवाई का पत्र जारी कर दिया जाएगा।
- “एक महीने से साहब का सिग्नेचर बाकी है!”: जब भी अधिकारी रोहित शिंदे से इस विषय पर प्रगति पूछी जाती है, तो उनका बेशर्म बहाना होता है कि: “लेटर बनकर तैयार है, बस वरिष्ठ अधिकारी का हस्ताक्षर (Signature) होना बाकी है।”
- सबसे बड़ा सवाल: क्या म्हाडा के वरिष्ठ अधिकारियों को एक आपातकालीन रास्ते को खाली कराने संबंधी पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए महीनों का वक्त लगता है? या फिर यह अवैध कब्जा करने वालों को संरक्षण देने की कोई सोची-समझी साजिश है?
बिल्डिंग 1-डी बनी अवैध ऑटो स्टैंड: जब ‘रक्षक ही बन बैठा भक्षक’!
घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों और ग्राउंड रिपोर्ट से साफ जाहिर है कि आपातकालीन रास्ते पर कतार से दर्जनों ऑटो रिक्शा पार्क किए गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इनमें से अधिकांश ऑटो रिक्शा बाहरी लोगों के हैं।

जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक खुलासा हुआ है—फेडरेशन का अध्यक्ष खुद एक ऑटो रिक्शा चालक है! उस अध्यक्ष ने अपनी दबंगई और साठगांठ के बल पर इमारत क्र. 1-डी (Building 1-D) के सामने वाले पूरे आपातकालीन मार्ग को ही अनधिकृत ‘ऑटो स्टैंड’ में बदल दिया है। जब रक्षक ही खुद भक्षक बनकर नियमों की धज्जियां उड़ाए, तो भला वह इस अवैध कब्जे को क्यों हटने देगा?
अधिकारी संतोष कांबले के पद संभालते ही रुकी कार्रवाई
जब से म्हाडा गोरेगांव विभाग में अधिकारी संतोष कांबले ने पदभार संभाला है, तब से अवैध निर्माण और आपातकालीन रास्ते के अतिक्रमण पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। अधिकारी संतोष कांबले किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई या जब्ती करने से पूरी तरह बचते नजर आ रहे हैं, जिससे इन अवैध कब्जाधारियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं।
जनता का सीधा सवाल: अगर कोई हादसा हुआ, तो जिम्मेदार कौन?
म्हाडा के इस आपातकालीन मार्ग के पूरी तरह लॉक होने के कारण यदि परिसर में आगजनी (Fire), मेडिकल इमरजेंसी या अन्य कोई अप्रिय घटना घटती है, तो फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस का अंदर पहुँचना असंभव है। म्हाडा अधिकारियों की इस आपराधिक लापरवाही और मिलीभगत पर स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है।
अब देखना यह होगा कि दिंडोशी सिटी सिविल कोर्ट में जवाबदेही तय होने पर अधिकारी रोहित शिंदे और संतोष कांबले कोर्ट के समक्ष “हस्ताक्षर बाकी है” का क्या बहाना बनाते हैं! ‘वशिष्ठ वाणी’ जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले इन लापरवाह अधिकारियों और माफियाओं के गठजोड़ को तब तक बेनकाब करता रहेगा, जब तक यह रास्ता पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता।













