मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मालाड वेस्ट के जनकल्याण नगर रोड (सेंट जूड स्कूल के सामने, दिव्या पार्क और बफिरा नगर का इलाका) पर इन दिनों बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की कारगुजारियों का ऐसा पर्दाफाश हुआ है, जिसे जानकर हर कोई दंग रह जाएगा। इस पूरे पट्टे पर बीएमसी की मेहरबानी से फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुका है और उसकी जगह एक अवैध सब्जी मंडी ने ले ली है। स्थिति यह है कि पैदल चलने वाले आम नागरिक और स्कूली छात्र बीच सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं।
कार्रवाई का ढोंग या ‘मुफ़्त की सब्जी’ उठाने का नाटक?
- फुटपाथ पर अवैध सब्जी मंडी का कब्जा: जन कल्याण नगर रोड पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से अतिक्रमण फैलाया गया है, लेकिन बीएमसी प्रशासन इस पर जड़ से कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ आँखें मूंदकर बैठा है।
- कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता: जब कभी दिखावे के लिए बीएमसी की टीम पहुँचती है, तो वे सिर्फ थोड़ा-थोड़ा सामान उठाकर गाड़ी में रख लेते हैं। जब मीडिया ने इस अजीबोगरीब कार्रवाई पर सवाल पूछा, तो बीएमसी कर्मचारियों का जवाब सुनकर सिर चकरा गया!
- कर्मचारियों का बेशर्म तर्क: बीएमसी के एक कर्मचारी ने बेझिझक कहा— “हम थोड़ा-थोड़ा सामान इसलिए उठा रहे हैं ताकि किसी दुकानदार को यह न लगे कि मेरा सामान उठा लिया और उसका नहीं उठाया, इसलिए हम सबका थोड़ा-थोड़ा सामान उठा रहे हैं।” इस हास्यास्पद और शर्मनाक जवाब को सुनकर किसी की भी हंसी छूट जाए, लेकिन असल खेल इसके पीछे छिपा है।
बीएमसी की मिलीभगत और वसूली का खेल
सच्चाई यह है कि इस ‘थोड़े-थोड़े सामान’ को जब्त करने के नाम पर बीएमसी कर्मी केवल औपचारिकता निभाते हैं। थोड़ी सब्जी और फल उठाकर ले जाने के बाद ये लोग आपस में उसे बांट लेते हैं। दूसरी तरफ, समस्या को जड़ से खत्म करने पर इन भ्रष्ट अधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, क्योंकि जब तक यह अवैध सब्जी मंडी चलती रहेगी, तब तक इनकी अवैध कमाई का जरिया भी चालू रहेगा।
जब तक जनता की गाढ़ी कमाई पर पलने वाले और ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड (Suspend) करके बर्खास्त नहीं किया जाएगा, तब तक शहर की सूरत नहीं बदल सकती। ‘वशिष्ठ वाणी’ इन निक्कमे और भ्रष्ट अधिकारियों के काले कारनामों को तब तक बेनकाब करता रहेगा, जब तक जनता को इस अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिल जाती।












