आपातकालीन रास्ता लॉक, अवैध ऑटो स्टैंड और 15 साल पुरानी जर्जर पानी की टंकी पर डांस पार्टी—क्या किसी बड़े हादसे और मौतों का इंतजार कर रहा है म्हाडा प्रशासन?
मुंबई (वशिष्ठ वाणी विशेष एक्सक्लूसिव): जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई से हर महीने मोटी तनख्वाह उठाने वाले म्हाडा (MHADA) अधिकारियों का रवैया किस कदर संवेदनहीन और गैर-जिम्मेदाराना हो चुका है, इसका जिंदा सबूत मालवणी गेट नंबर 8 की आवासीय इमारत में देखा जा सकता है।
अदालत द्वारा समन जारी किए जाने के बाद भी म्हाडा के आला अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। म्हाडा के वाइस प्रेसिडेंट संजीव जायसवाल, उपनिबंधक अधिकारी बी.एस. कटरे, गोरेगांव क्षेत्र निर्माण के अधिकारी संतोष कामले और रोहित शिंदे को अदालत का समन तामील हो चुका है, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।
1. आपातकालीन रास्ता बना ‘अवैध ऑटो स्टैंड’—फायर ब्रिगेड की गाड़ियां कैसे पहुँचेंगी?

इमारत का आपातकालीन रास्ता (Emergency Exit)—जो किसी भी आगजनी, भूकंप या मेडिकल इमरजेंसी के समय निवासियों की जान बचाने के लिए होता है—वह पूरी तरह से कमर्शियल ऑटो-रिक्शाओं के कब्जे में है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए आवासीय परिसर के भीतर अवैध ऑटो स्टैंड चलाया जा रहा है।
2. कुर्सी का खुला दुरुपयोग: चेयरमैन खुद ऑटोचालक, निजी स्वार्थ में निवासियों की जान जोखिम में!
सूत्रों के अनुसार, इस पूरी अराजकता की मुख्य वजह सोसाइटी के चेयरमैन का निजी स्वार्थ है। चेयरमैन स्वयं ऑटोचालक है और अपनी व्यक्तिगत जिद तथा दबंगई के बल पर उसने पूरी बिल्डिंग के भीतर कमर्शियल ऑटो स्टैंड की अनधिकृत अनुमति दे रखी है। पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था एक व्यक्ति की सनक की बलि चढ़ रही है।

3. 15 साल पुरानी जर्जर पानी की टंकी पर इवेंट और डांस—हादसा हुआ तो कौन लेगा ज़िम्मेदारी?

लापरवाही की इंतहा तो तब हो जाती है जब लगभग 15 साल पुरानी पानी की टंकी—जिसकी संरचनात्मक मजबूती (Structural Integrity) पहले ही सवालों के घेरे में है—उसे ‘इवेंट स्पॉट’ बनाकर वहां डीजे, डांस और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अगर यह टंकी धराशायी होती है, तो कई निर्दोषों की जान जा सकती है।
अधिकारियों का असंवेदनशील बयान: “जनता जाने, हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं!”
जब वशिष्ठ वाणी ने म्हाडा अधिकारी संतोष कामले से सवाल किया, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना जवाब था— “हमने जगह दे रखी है, वहां की जिम्मेदारी स्थानीय निवासियों की है।” वहीं अधिकारी रोहित शिंदे ने 3-4 महीने पहले आपातकालीन रास्ता खाली कराने के लिए ‘पत्र जारी करने’ का झुनझुना थमाया था, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरा।
“सिविल कोर्ट से नहीं डरते अफ़सर”: सूत्रों के माध्यम से प्राप्त चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, म्हाडा के एक अधिकारी ने दबी ज़बान में यहाँ तक कह दिया कि “अधिकारी सिविल कोर्ट की कार्रवाई से नहीं डरते, क्योंकि सिविल कोर्ट सीधे नौकरी नहीं छीन सकती। जिन्हें कार्रवाई करानी है वे हाई कोर्ट जाएं।” (नोट: वशिष्ठ वाणी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं करता, यह सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी है)। क्या म्हाडा अफ़सरों के मन में देश के न्यायिक ढांचे के प्रति कोई सम्मान नहीं बचा है?
वशिष्ठ वाणी के तीखे और सीधे सवाल—MHADA जवाब दे!
- अगर पद पर रहकर जिम्मेदारी नहीं निभानी, तो जनता के टैक्स से सैलरी क्यों ले रहे हैं?
- यदि सोसाइटी का चेयरमैन-सेक्रेटरी तानाशाही करे, तो म्हाडा हस्तक्षेप करने के बजाय हाथ पर हाथ धरकर क्यों बैठी है?
- क्या आपातकालीन रास्ता बंद होने के कारण कल कोई बड़ा हादसा होता है, तो क्या म्हाडा अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज होगा?
- क्या म्हाडा केवल नाममात्र के नोटिस जारी कर खानापूर्ति करने और ठेकेदारों-माफियाओं को संरक्षण देने के लिए बनी है?
अभिषेक अनिल वशिष्ठ का कड़ा कानूनी प्रहार
म्हाडा प्रशासन की इस खुली मनमानी और अदालत की अवमानना के खिलाफ वशिष्ठ वाणी के चेयरमैन अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने अदालत में अर्जी दाखिल कर दी है। वशिष्ठ वाणी म्हाडा अधिकारियों की इस आपराधिक चुप्पी और लापरवाही को बेनकाब करने के लिए कानूनी और पत्रकारिता के हर मंच पर संघर्ष जारी रखेगा।












