📍 चांपा (जिला जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़)
शहर के वार्ड क्रमांक 26, छुईहा तालाब नया कॉलेज रोड क्षेत्र में लंबे समय से संचालित कथित अवैध निर्माण का मामला अब गंभीर मोड़ ले चुका है। बिना शासकीय अनुमति के सीमेंट गमले, खंभे (पोल) और जाली निर्माण का यह कारोबार जहां प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं अब यह मामला पत्रकार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से भी जुड़ गया है।
🔎 खबर प्रकाशित होते ही मिली धमकी
स्थानीय पत्रकार मनीराम आजाद द्वारा इस अवैध निर्माण का खुलासा करते हुए समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद आरोपियों विष्णु रात्रे और राजकुमारी रात्रे पर गंभीर आरोप लगे हैं। पत्रकार ने शिकायत में बताया कि खबर सामने आने के बाद आरोपियों ने उन्हें और उनके परिवार को गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
पत्रकार का कहना है कि उन्हें न सिर्फ सीधे तौर पर धमकाया गया, बल्कि अन्य लोगों से भी नुकसान पहुंचाने की बात कही गई, जिससे उनका परिवार दहशत में है।

📄 प्रशासन को सौंपी गई शिकायत
मनीराम आजाद ने इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चांपा और थाना प्रभारी चांपा को लिखित शिकायत देकर पूरी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वे वार्ड 26 के निवासी हैं और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं।
शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि क्षेत्र में बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य लंबे समय से जारी है, जिसकी जानकारी संबंधित विभागों को होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
🎙️ ऑडियो सबूत भी सौंपे गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार ने धमकी से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी थाना प्रभारी के व्हाट्सएप नंबर पर भेजी है, ताकि आरोपों की पुष्टि हो सके। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का सामने न आना प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है।
🚧 अवैध निर्माण और रेत परिवहन पर सवाल
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, सड़क किनारे खुलेआम सीमेंट गमले, जाली और खंभों का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए न तो किसी प्रकार की अनुमति ली गई है और न ही कोई वैध बिल प्रस्तुत किया जा रहा है।
इसके अलावा निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत के अवैध परिवहन और डंपिंग को लेकर भी खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में शासन को राजस्व की हानि हो रही है और टैक्स चोरी की आशंका भी बनी हुई है।
⚠️ पत्रकार सुरक्षा पर बड़ा सवाल
एक पत्रकार को खबर प्रकाशित करने के बाद खुलेआम धमकी मिलना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
🧾 निष्कर्ष
यह मामला अब केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता, संभावित मिलीभगत और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में कब तक मौन रहता है और कब ठोस कार्रवाई करता है।







