“विधायक असलम शेख का फंड है तो कार्रवाई नहीं होगी”— रोहित शिंदे के इस बयान ने कानून-व्यवस्था की उड़ाई धज्जियां!
मुंबई/वशिष्ठ वाणी: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis), जो अपनी ‘सख्त छवि’ और ‘कानून के राज’ के लिए जाने जाते हैं, उनके ही विभाग की नाक के नीचे एक म्हाडा अधिकारी ने खुलेआम बगावत कर दी है। मलाड के मालवणी में म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे (Rohit Shinde) ने एक ऐसा बयान दिया है, जो सीधे तौर पर महाराष्ट्र सरकार और गृह मंत्रालय के इकबाल को चुनौती दे रहा है।

क्या विधायक का फंड ‘पाप धोने’ की मशीन है?
मामला मालवणी की ओम सिद्धिविनायक सोसायटी का है, जहां 15 साल पुराने पानी के टैंक पर अवैध कब्जा करके सीमेंट की छत डाल दी गई और गार्डन बना दिया गया। जब जागरूक नागरिकों ने रोहित शिंदे (Rohit Shinde) को ‘ब्लूप्रिंट’ (नक्शा) दिखाया कि वहां कोई निर्माण स्वीकृत नहीं है, तो शिंदे ने कानून की रक्षा करने के बजाय दबंगई दिखाई।
रोहित शिंदे का कथित तर्क: “इसमें विधायक असलम शेख का फंड लगा है, इसलिए हम इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।”

फडणवीस जी, जनता आपसे ये कड़वे सवाल पूछती है:
- मुख्यमंत्री की चुप्पी क्यों? क्या आपकी पुलिस और म्हाडा प्रशासन अब विधायकों के निजी कर्मचारी बन गए हैं?
- ब्लूप्रिंट का मजाक: जब सरकारी कागजों (Blueprint) में वह जगह खाली है, तो विधायक निधि वहां खर्च कैसे हुई? क्या यह सरकारी पैसे की सरेआम लूट नहीं है?
- रोहित शिंदे को किसका संरक्षण? एक सरकारी अधिकारी को इतनी हिम्मत कहां से मिली कि वह ब्लूप्रिंट को नजरअंदाज कर ‘विधायक फंड’ को ही असली कानून बताने लगे?
- कानून का राज या गुंडाराज? क्या अब मुंबई में अतिक्रमण हटाने से पहले अधिकारियों को विधायक से ‘एनओसी’ लेनी पड़ेगी?
रोहित शिंदे: लापरवाही का ‘ब्रांड एंबेसडर’
यह कोई पहली बार नहीं है जब रोहित शिंदे (Rohit Shinde) ने कानून का गला घोंटा है। वशिष्ठ वाणी की रिपोर्ट्स गवाह हैं कि शिंदे साहब को काम करने से ज्यादा ‘बहाने’ बनाने में महारत हासिल है:
- कुंभकर्णी नींद — जब जनता चिल्लाती रही और शिंदे सोते रहे।
- अवैध केबिन और बोर्ड — जहां कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई।
निष्कर्ष: अब आर-पार की लड़ाई
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी (Devendra Fadnavis), आप अक्सर कहते हैं कि “अपराधी और भ्रष्टाचारी बख्शे नहीं जाएंगे।” तो क्या रोहित शिंदे जैसे अधिकारी, जो विधायक के फंड की आड़ में अवैध निर्माण को पाल रहे हैं, उन पर आपकी ‘चाणक्य नीति’ चलेगी? मालवणी की जनता जवाब मांग रही है— नक्शा बड़ा है या नेता का पैसा?











