मुंबई (विशेष ब्यूरो): राजनीति का यह कैसा दस्तूर है कि जब नेता और पार्टियां सत्ता से बाहर होती हैं, तब जनता की छोटी से छोटी शिकायत और समस्या पर आसमान सिर पर उठा लिया जाता है। विपक्ष में रहते हुए जो सोशल मीडिया सरकार को घेरने का सबसे बड़ा हथियार होता है, सत्ता में आते ही उसी सोशल मीडिया पर जनता की आवाज़ को अनसुना क्यों कर दिया जाता है? ‘वशिष्ठ वाणी’ आज सीधे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से यही बुनियादी और चुभता हुआ सवाल पूछ रही है।
क्या मुख्यमंत्री बनते ही बदल जाती हैं प्राथमिकताएं?
आज मुंबई और महाराष्ट्र की आम जनता अपनी रोज़मर्रा की गंभीर समस्याओं— जैसे अवैध निर्माण, फुटपाथों पर कब्ज़े और प्रशासनिक मनमानी— को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक हैंडल @CMOMaharashtra पर लगातार शिकायतें टैग करती है। लेकिन सत्ता के गलियारों से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
मुख्यमंत्री जी, आखिर सत्ता में आने के बाद यह बदलाव क्यों? क्या मुख्यमंत्री का पद मिल जाने के बाद जनता की फ़रियादें छोटी लगने लगती हैं? जब आप सत्ता में नहीं थे, तब जनता के हर मुद्दे पर आपकी तत्परता दिखती थी, तो फिर आज इस डिजिटल माध्यम की इतनी अनदेखी क्यों की जा रही है?
अधिकारियों के अड़ियल रवैये से मुंबई की जनता में भारी नाराज़गी
ज़मीनी हकीकत यह है कि मुंबई की जनता आज प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये से बेहद त्रस्त और नाराज़ है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने लगातार अपनी खोजी पत्रकारिता के ज़रिए अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया है। लेकिन जब इन मामलों को @CMOMaharashtra पर टैग किया जाता है, तो अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। ऐसा लगता है जैसे अधिकारियों को भरोसा है कि उनके रसूखदार राजनीतिक संबंध उन्हें बचा लेंगे, इसीलिए कोई भी अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह होने को तैयार नहीं है।
‘वशिष्ठ वाणी’ का मुख्यमंत्री को सकारात्मक सुझाव: ‘CM स्पेशल टीम’ करे शिकायतों की जांच
एक ज़िम्मेदार मीडिया हाउस होने के नाते, ‘वशिष्ठ वाणी’ केवल सवाल खड़े नहीं करता, बल्कि समाधान का रास्ता भी दिखाता है। मुख्यमंत्री जी, अगर आप वाकई राज्य में सुशासन (Good Governance) स्थापित करना चाहते हैं, तो हमारा यह सुझाव मानकर देखिए:
सुझाव: मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के भीतर एक विशेष और निष्पक्ष टीम का गठन किया जाए, जिसका काम सिर्फ @CMOMaharashtra पर आने वाली जनता और मीडिया की प्रमाणित शिकायतों की छंटनी और उनकी ज़मीनी जांच करना हो। यह टीम सीधे आपकी निगरानी में काम करे और दोषी अधिकारियों की रिपोर्ट सीधे आपको सौंपे।
एक बार करके देखिए मुख्यमंत्री जी, बदल जाएगी सरकार की छवि!
अगर सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो इससे न केवल भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों के मन में डर पैदा होगा, बल्कि जनता के बीच भी एक बेहद सकारात्मक संदेश जाएगा। यह कदम डिजिटल इंडिया के दौर में आपकी एक बेहद संवेदनशील, पारदर्शी और जनता से सीधे जुड़ने वाले नेता की एक नई और मजबूत छवि तैयार करेगा।
जनता बदलाव देखना चाहती है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस सुझाव को अपनाकर जनता के भरोसे को दोबारा जीतते हैं या फिर डिजिटल शिकायतों की यह अनदेखी यूं ही जारी रहती है।











