वशिष्ठ वाणी विशेष: 1990 का वह दौर, जब देश का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर था और भारतीय अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर थी। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को पर्दे पर जीवंत करते हैं निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर अपनी नई फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के जरिए।
फिल्म की कहानी
कहानी आईएएस अधिकारी ए. रामानन (मनोज बाजपेयी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें देश के सबसे चुनौतीपूर्ण आर्थिक दौर में आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किया जाता है। यह किरदार पूर्व गवर्नर एस. वेंकटरमणन के जीवन से प्रेरित है। फिल्म उस कशमकश को दिखाती है जब एक तरफ सरकार का दबाव है और दूसरी तरफ देश को आर्थिक पतन से बचाने की जिम्मेदारी। रामानन का साहस और उनकी सूझबूझ ही इस फिल्म की असली जान है।
वशिष्ठ वाणी का क्रिटिक स्कोर
| पैरामीटर | रेटिंग |
| निर्देशन (Direction) | ⭐⭐⭐⭐ |
| मनोज बाजपेयी का अभिनय | ⭐⭐⭐⭐⭐ |
| पटकथा और गहराई | ⭐⭐⭐ |
| ऐतिहासिक प्रमाणिकता | ⭐⭐⭐⭐ |
| वशिष्ठ वाणी ओवरऑल स्कोर | 4/5 |
वशिष्ठ वाणी का निष्कर्ष: ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारत के उस अनसुने नायक को श्रद्धांजलि है जिसने हमें आर्थिक बर्बादी से बचाया। मनोज बाजपेयी की अदाकारी हर फ्रेम में जान डाल देती है। अगर आप एक परिपक्व और प्रभावशाली राजनीतिक-आर्थिक ड्रामा देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है।









