दोपहर 12:20 से गुहार लगा रही ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम, 4 बज गए पर पुलिस का अता-पता नहीं—क्या डोटम बिल्डर के आगे बेबस है कानून?
मुंबई: मुंबई पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम पर आज एक ऐसा काला धब्बा लगा है जिसे धोना मुश्किल होगा। मलाड वेस्ट के जनकल्याण नगर में डोटम बिल्डर (Dotom Builder) की मनमानी के खिलाफ ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम दोपहर 12:20 बजे से लगातार मुंबई पुलिस के आपातकालीन नंबर (100) पर शिकायत कर रही है। अब घड़ी की सुइयां 4 बजाने को हैं, लेकिन चारकोप पुलिस ने मौके पर पहुंचना तो दूर, शायद इस शिकायत को गंभीरता से लेना भी जरूरी नहीं समझा।
तमाशा: 100 नंबर बनाम चारकोप पुलिस

दोपहर 12:20 बजे से एक अजीबोगरीब ड्रामा चलता रहा। मीडिया टीम ने जब पहली बार शिकायत की, तो पुलिस नदारद थी। स्टेटस पूछा गया, तो कंट्रोल रूम ने कहा— “अभी तक पुलिस नहीं पहुँची? हम दोबारा शिकायत भेजते हैं।” यह सिलसिला एक या दो बार नहीं, बल्कि 4 बार दोहराया गया। कंट्रोल रूम बार-बार शिकायत भेजता रहा और चारकोप पुलिस उसे ठंडे बस्ते में डालती रही।
सवाल: क्या चारकोप पुलिस ने 100 नंबर (Emergency Response System) को महज एक मजाक समझ लिया है?
बिल्डर का ‘वर्किंग’ मोड, पुलिस का ‘स्लीपिंग’ मोड
हैरानी की बात यह है कि बीएमसी (BMC) द्वारा ‘स्टॉप वर्किंग’ का नोटिस जारी होने के बावजूद डोटम बिल्डर (Dotom Builder) का काम युद्ध स्तर पर जारी है। पुलिस के पास इतना समय भी नहीं था कि वह मौके पर जाकर सिर्फ यह पूछ ले— “जनाब, काम चालू रखने की अनुमति कहाँ है?” ऐसा लगता है कि डोटम बिल्डर को कानून का कोई डर नहीं है, या फिर उसे पता है कि चारकोप पुलिस की ‘जी-हुजूरी’ उसे हर नोटिस से बचा लेगी।
बीएमसी का नोटिस बना मजाक, बिल्डर का काम ‘नॉन-स्टॉप’
हैरानी की बात यह है कि बीएमसी (BMC) ने इस साइट पर ‘स्टॉप वर्किंग’ का नोटिस चिपका रखा है। कानूनन काम तुरंत बंद होना चाहिए था, लेकिन डोटम बिल्डर की मशीनें दोपहर की चिलचिलाती धूप में भी बेखौफ गरज रही हैं। आखिर यह कौन सी अदृश्य ताकत है जो पुलिस के पैरों में बेड़ियाँ डाल रही है और बिल्डर को कानून की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट दे रही है?
पुलिस की ‘खामोशी’ बहुत कुछ कहती है
जब एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस की कॉल पर पुलिस 4 घंटे तक हरकत में नहीं आती, तो आम आदमी की क्या बिसात? यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि कानून के इकबाल को चुनौती है। चारकोप पुलिस की यह चुप्पी और दूरी कई गंभीर संदेह पैदा करती है।
“क्या पुलिस का काम सिर्फ नंबर ब्लॉक करना और एसी कमरों में बैठना रह गया है? डोटम बिल्डर की अवैध गतिविधियों पर आखिर कौन लगाम कसेगा?”
वशिष्ठ वाणी प्रशासन से यह सीधे सवाल पूछती है कि क्या मुंबई में अब बिल्डरों का ‘समानांतर प्रशासन’ चल रहा है? हम इस खबर पर तब तक डटे रहेंगे जब तक कि दोपहर 12:20 से शुरू हुआ यह ‘इंतजार’ किसी ठोस कार्रवाई में नहीं बदल जाता।










