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चार्कोप पुलिस की ‘महानता’ या Dotom बिल्डर की ‘जादुई शक्ति’? लोअर परेल के 8 साल पुराने कागज पर कांदिवली में चल रहा काम!

मुंबई (जन कल्याण नगर, मालाड-कांदिवली वेस्ट): मुंबई में नियम और कानून आम आदमी के लिए होते हैं या बिल्डरों की सुविधा के लिए? यह सवाल आज जन कल्याण नगर का हर निवासी पूछ रहा है। डोटम डेवलपर (Dotom Developer) ने न केवल बीएमसी (BMC) के आदेशों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि चार्कोप पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

घटना का शर्मनाक सच:

बीएमसी ने डोटम डेवलपर को आधिकारिक तौर पर ‘Stop Working’ का नोटिस जारी किया है। जब शिकायत के बाद पुलिस काम रुकवाने पहुंचती है, तो बिल्डर के प्रतिनिधि उन्हें एक ‘अनुमति पत्र’ (Permission Letter) दिखाते हैं। अब इस पत्र की असलियत जानकर आप दंग रह जाएंगे:

  • जगह का फर्जीवाड़ा: अनुमति लोअर परेल (Lower Parel) की है, लेकिन काम कांदिवली में धड़ल्ले से चल रहा है।
  • समय का खेल: अनुमति पत्र साल 2016 का है! यानी 8 साल पुराना कागज दिखाकर 2026 में पुलिस को गुमराह किया गया।

सवाल: क्या पुलिस इतनी ‘भोली’ है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चार्कोप पुलिस के अधिकारियों को साल 2016 और 2026 के बीच का अंतर नहीं दिखा? या फिर क्या उन्हें लोअर परेल और कांदिवली के भूगोल की जानकारी नहीं है?

“आप खुद जाकर काम रुकवा दो” – पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना जवाब

जब वशिष्ठ वाणी की टीम ने पुलिस को इन विसंगतियों के बारे में बताया, तो पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय पत्रकार से ही कह दिया कि— “आप ही जाकर काम रुकवा दें।” क्या अब मुंबई की कानून व्यवस्था बिल्डर और जनता के भरोसे छोड़ दी गई है?

30 मिनट का ‘आई वॉश’ (आंखों में धूल)

100 नंबर पर कॉल के बाद पुलिस ने औपचारिकता के लिए काम रुकवाया, लेकिन पुलिस की गाड़ी के जाते ही महज 30 मिनट में मशीनों का शोर फिर शुरू हो गया। यह साफ दर्शाता है कि बिल्डर को न तो खाकी का डर है और न ही प्रशासन का।

मुंबई पुलिस कमिश्नर से मांग:

यह मामला सिर्फ ध्वनि प्रदूषण या लाइट प्रदूषण का नहीं है, यह धोखाधड़ी (Forgery) और प्रशासन को गुमराह करने का मामला है।

  • क्या 2016 के कागज दिखाने वाले बिल्डर पर FIR होगी?
  • क्या उन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने ‘लोअर परेल’ का कागज ‘कांदिवली’ में स्वीकार किया?

निष्कर्ष:

डोटम डेवलपर ने साबित कर दिया है कि उसके लिए कानून महज एक कागज का टुकड़ा है। अब देखना यह है कि मुंबई पुलिस (@MumbaiPolice) अपनी इस ‘कॉमेडी’ बन चुकी साख को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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