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23 दिन, 552 घंटे… और सांसद पीयूष गोयल का ‘मौन’ व्रत! क्या मालाड का ‘कर्सन’ कानून से भी ऊपर है?

मालाड (मुंबई): उत्तर मुंबई के गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है—क्या प्रशासन बिक चुका है या फिर सत्ता के रसूख ने कानून की आंखों पर पट्टी बांध दी है? मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में खड़ा अवैध निर्माण अब केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि सांसद पीयूष गोयल की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान बन गया है।

1. दिल्ली में विकास की बातें, मालाड में माफिया के ठाठ?

सांसद अक्सर ‘सुशासन’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ की बात करते हैं। लेकिन 23 दिनों की निरंतर मीडिया रिपोर्टिंग के बाद भी उनके अपने क्षेत्र में माफिया ‘कर्सन’ का सीना तानकर खड़े रहना क्या दर्शाता है?

  • क्या एक केंद्रीय मंत्री इतने बेबस हैं कि एक अवैध इमारत नहीं गिरवा पा रहे?
  • या फिर ‘कोयला’ की इस कालिख ने स्थानीय सिस्टम की चमक को ही खत्म कर दिया है?

2. कुंदन वळवी की ‘कुंभकर्णी’ नींद का राज क्या है?

बीएमसी के पी/उत्तर वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के पास 21 मई 2025 का नोटिस फाइल में दबा पड़ा है। 23 दिन से ‘वशिष्ठ वाणी’ प्रमाण दे रहा है, लेकिन वळवी जी का दस्ता मालाड की गलियों तक पहुंचने का रास्ता भूल गया है। क्या यह ‘सद्भावना’ है या माफिया के साथ ‘सांठगांठ’?


3. पूर्व रेल मंत्री का क्षेत्र और रेलवे की सुरक्षा ही खतरे में!

सबसे बड़ा कटाक्ष तो यह है कि जो नेता देश का रेल मंत्री रह चुका हो, उसके क्षेत्र में रेलवे पटरियों के पास माफिया सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

“पीयूष गोयल जी, अगर पटरियों के पास बना यह अवैध ‘टाइम बम’ कभी फटा, तो क्या आप उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेंगे? क्या ‘साहब’ को खुश रखने के चक्कर में जनता की जान दांव पर लगाई जा रही है?”


जनता की अदालत में 5 तीखे सवाल:

  1. सांसद जी, क्या आपकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति इस अवैध निर्माण के आगे सरेंडर कर चुकी है?
  2. 23 दिन से जारी इस रिपोर्टिंग को नजरअंदाज करना जनता का अपमान नहीं तो क्या है?
  3. BMC कमिश्नर तक इस मामले को पहुंचने से कौन रोक रहा है?
  4. क्या ‘कर्सन’ के तार किसी बड़ी राजनीतिक तिजोरी से जुड़े हैं?
  5. कुंदन वळवी पर अब तक कोई विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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