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वशिष्ठ वाणी महा-प्रहार: 21 दिन… शून्य कार्रवाई! आखिर ‘कर्सन’ के आगे क्यों नतमस्तक हैं सांसद पीयूष गोयल और बीएमसी?

मुंबई: क्या लोकतंत्र में जनता के वोट की कीमत सिर्फ एक पर्ची तक सीमित है? मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे सुरक्षा को ठेंगा दिखाकर खड़ा किया गया अवैध निर्माण आज 21वें दिन भी प्रशासन की नपुंसकता की गवाही दे रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है, लेकिन सांसद पीयूष गोयल और नगरसेवक योगेश वर्मा के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।


बीएमसी अधिकारी या माफिया के रक्षक?

बीएमसी के रिकॉर्ड बताते हैं कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ 21 मई 2025 को ही नोटिस जारी किया गया था। आज एक साल बाद भी पी/उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन रा. वळवी का बुलडोजर रास्ता क्यों भटक गया है?

  • क्या कुंदन वळवी की चुप्पी के पीछे कोई बड़ी ‘सौदाबाजी’ है?
  • नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई न करना यह साबित करता है कि बीएमसी की कलम अब जनता के लिए नहीं, बल्कि भू-माफिया ‘कर्सन’ के इशारों पर चलती है।

सत्ता का अहंकार और पीयूष गोयल की रहस्यमयी चुप्पी

यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा (रेलवे) से जुड़ा है, फिर भी सांसद पीयूष गोयल इस पर मौन क्यों हैं?

“शायद केंद्रीय मंत्री होने का अहंकार इतना भारी है कि उन्हें अपने ही क्षेत्र की जनता का डर और रेलवे की सुरक्षा दिखाई नहीं दे रही।” जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी एक ही सुर में माफियाओं को संरक्षण देने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। नगरसेवक योगेश वर्मा की खामोशी भी अब ‘सहमति’ का संकेत दे रही है।

वशिष्ठ वाणी के चुभते सवाल:

  1. सांसद महोदय, क्या आपके क्षेत्र में नियमों की धज्जियाँ उड़ाना ही आपका ‘विकास’ मॉडल है?
  2. कुंदन वळवी जी, क्या नोटिस की फाइल अलमारी में सड़ने के लिए बनी है या कार्रवाई के लिए?
  3. योगेश वर्मा जी, जनता ने आपको अपनी सुरक्षा के लिए चुना था, माफियाओं की ढाल बनने के लिए नहीं।

वशिष्ठ वाणी का अल्टीमेटम:

हम न बिकने वाले हैं, न रुकने वाले। अगर प्रशासन को लगता है कि 21 दिन बाद हमारी आवाज दब जाएगी, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है। जब तक ‘कोयला वाली गली’ का यह अवैध ढांचा जमींदोज नहीं होता, हमारी जंग जारी रहेगी।

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