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गोरेगांव वेस्ट में फुटपाथ बना “VIP पार्किंग ज़ोन”: Goregaon RTO विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

मुंबई | वशिष्ठ वाणी | विशेष रिपोर्ट

गोरेगांव वेस्ट के लिंक रोड पर स्थित जैन सबकुछ फूड प्लाजा और हुंडई कार शोरूम के बाहर फुटपाथ पर हो रही कथित अवैध पार्किंग को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कई बार शिकायत दर्ज कराने और मीडिया द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाने के बावजूद स्थिति में अब तक कोई ठोस सुधार देखने को नहीं मिला है।

स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में यह सामने आया कि आज भी उक्त स्थानों पर फुटपाथ पर वाहन खड़े किए जा रहे हैं, जिससे पैदल यात्रियों को सड़क से गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।


📌 कार्रवाई के दावे बनाम ज़मीनी सच्चाई

Mumbai RTO और Goregaon RTO की ओर से पूर्व में यह जानकारी दी गई थी कि शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की गई है।
हालांकि मौके पर स्थिति देखने पर यह स्पष्ट होता है कि फुटपाथ पर पार्किंग की समस्या अब भी बनी हुई है।

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि— क्या की गई कार्रवाई पर्याप्त और प्रभावी थी?
या फिर यह समस्या नियमित निगरानी के अभाव में दोबारा उत्पन्न हो रही है?


🚫 “नो पार्किंग” बोर्ड के बावजूद उल्लंघन

मौके पर “नो पार्किंग” के संकेत भी लगे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद वाहन खड़े दिखाई देते हैं।
यह स्थिति नियमों के पालन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन दोनों पर सवाल खड़े करती है।


❓ क्या नियम सभी के लिए समान?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आम व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो तुरंत चालान और कार्रवाई होती है।
लेकिन जब मामला बड़े प्रतिष्ठानों के बाहर की पार्किंग का होता है, तो कार्रवाई अपेक्षाकृत कम नजर आती है।

इससे यह प्रश्न उठता है कि— क्या ट्रैफिक नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से कराया जा रहा है?


⚠️ पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

फुटपाथ पर पार्किंग के कारण आम नागरिकों को सड़क से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फुटपाथ का मूल उद्देश्य पैदल यात्रियों की सुविधा है, जिसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए।


⚖️ निष्कर्ष: अब ठोस कार्रवाई की जरूरत

यह मामला अब केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि— क्या संबंधित विभाग नियमित और सख्त कार्रवाई कर इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा?
या फिर यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी?

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