मुम्बई/वशिष्ठ वाणी। मुंबई के मलाड पश्चिम में स्थित मालवणी इलाके की एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। सोसायटी के अध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने बिल्डिंग 1D को ही ऑटो रिक्शा स्टैंड में बदल दिया है और वहां कमर्शियल पार्किंग से वसूली भी की जा रही है। इस पूरे मामले में के उपनिबंधक अधिकारी की भूमिका पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।
🚨 आरोप: बिल्डिंग के अंदर बना दिया ऑटो स्टैंड

स्थानीय निवासियों का दावा है कि सोसायटी अध्यक्ष, जो स्वयं ऑटो चालक बताए जा रहे हैं, ने कथित तौर पर यह फैसला लिया कि बिल्डिंग 1D परिसर में ही ऑटो खड़े किए जाएंगे और उनसे पार्किंग शुल्क लिया जाएगा।
जब इस विषय पर अध्यक्ष से सवाल किया गया तो उनका कथित जवाब था—
“सोसायटी जो चाहे वह कर सकती है।”
यहीं से विवाद और गहरा गया है।
🔴 सुरक्षा पर बड़ा खतरा?
रूम मालिकों के अनुसार:
- बिल्डिंग के अंदर दोनों तरफ वाहनों की पार्किंग से रास्ता बेहद संकरा हो गया है
- इमरजेंसी में टैक्सी तो दूर, कभी-कभी ऑटो तक अंदर नहीं आ पाता
- प्रवेश द्वार के पास कचरा मशीन बंद हालत में रखी है
- सोसायटी का गार्डन कथित तौर पर खंडहर जैसी स्थिति में है
निवासियों का कहना है कि यदि आग जैसी आपात स्थिति आई तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
📊 नियम क्या कहते हैं? (जनता के लिए महत्वपूर्ण)
सामान्य रूप से सहकारी गृहनिर्माण सोसायटियों और MHADA बायलॉज के तहत:
- ❌ बिल्डिंग परिसर को बिना विधिवत प्रस्ताव और अनुमति के कमर्शियल उपयोग में नहीं बदला जा सकता
- ❌ फायर एंट्री या कॉमन पैसेज को अवरुद्ध करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है
- ❌ कमर्शियल वाहन (जैसे ऑटो) की नियमित पार्किंग के लिए सोसायटी की जनरल बॉडी की मंजूरी और लागू नियमों का पालन जरूरी होता है
- ❌ MHADA की जमीन या कॉमन एरिया पर शुल्क लेकर पार्किंग देना गंभीर अनियमितता मानी जा सकती है (यदि अनुमति न हो)
✅ क्या सोसायटी अध्यक्ष/सचिव अपने आप ऑटो रिक्शा स्टैंड बना सकते हैं?
सीधा जवाब: आम तौर पर नहीं।
किसी भी या अन्य सहकारी गृहनिर्माण सोसायटी में:
- अध्यक्ष, सचिव या कमेटी एकतरफा निर्णय नहीं ले सकते
- कॉमन एरिया का उपयोग बदलने के लिए जनरल बॉडी (AGM/SGM) की मंजूरी जरूरी होती है
- और यदि उपयोग “कमर्शियल” हो रहा है, तो अतिरिक्त कानूनी अनुमति भी लगती है
👉 यानी केवल कमेटी बैठकर बिल्डिंग को ऑटो स्टैंड घोषित नहीं कर सकती।
⚖️ 2. क्या कानून के तहत ऐसा अधिकार है?
सीमित और शर्तों के साथ — वह भी सामान्यतः नहीं।
सहकारी सोसायटी और से जुड़े सामान्य नियम कहते हैं:
- ❌ कॉमन पैसेज/ओपन स्पेस को बाधित नहीं किया जा सकता
- ❌ फायर टेंडर का रास्ता ब्लॉक नहीं किया जा सकता
- ❌ बिना अनुमति कमर्शियल उपयोग नहीं किया जा सकता
- ❌ सदस्यों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता
अगर ये शर्तें टूटती हैं, तो निर्णय अवैध माना जा सकता है।
🚖 3. क्या आपकी जानकारी सही है कि ऑटो कमर्शियल वाहन है?
हाँ — आपकी मूल समझ सही दिशा में है।
- ऑटो रिक्शा एक कमर्शियल वाहन माना जाता है
- अधिकांश हाउसिंग सोसायटी बायलॉज में नियमित कमर्शियल वाहन पार्किंग पर प्रतिबंध या कड़े नियम होते हैं
- खासकर जब वह “स्टैंड” के रूप में चलाया जा रहा हो और शुल्क लिया जा रहा हो
- ❌ पर पूरी बिल्डिंग को ऑटो स्टैंड बनाना और शुल्क वसूलना — यह आम तौर पर नियमों के खिलाफ माना जाता है
🚫 4. अगर बिल्डिंग अंदर से पैक हो जाए तो क्या यह वैध है?
नहीं — यह गंभीर उल्लंघन हो सकता है, खासकर यदि:
- फायर ब्रिगेड एंट्री प्रभावित हो
- एम्बुलेंस/इमरजेंसी वाहन नहीं आ पा रहे
- कॉमन एरिया घेर लिया गया है
- अन्य सदस्यों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं
ऐसी स्थिति में निवासी शिकायत कर सकते हैं।
🏢 5. क्या उपनिबंधक (जैसे बी. एस. कटरे) इसकी अनुमति दे सकते हैं?
सामान्य प्रक्रिया यह है:
- उपनिबंधक रूटीन पार्किंग स्टैंड की अनुमति नहीं देते
- उनका काम विवादों और प्रशासनिक मामलों को देखना होता है
- कमर्शियल उपयोग, फायर सेफ्टी, ट्रैफिक आदि अलग-अलग विभागों के विषय होते हैं
👉 यदि किसी ने यह दावा किया है कि केवल उपनिबंधक की मौखिक अनुमति से बिल्डिंग ऑटो स्टैंड बन सकती है, तो वह कानूनी रूप से संदिग्ध स्थिति हो सकती है — अंतिम सत्य दस्तावेजों से ही तय होगा।
🧭 निष्कर्ष (सरल भाषा में)
✔ ऑटो कमर्शियल वाहन है — आपकी बात सही दिशा में है
✔ सोसायटी पदाधिकारी अकेले बिल्डिंग को ऑटो स्टैंड नहीं बना सकते
✔ कॉमन एरिया और फायर रास्ता ब्लॉक करना नियमों के खिलाफ हो सकता है
✔ शुल्क लेकर पार्किंग चलाना बिना वैध अनुमति जोखिम भरा/अवैध हो सकता है
✔ अंतिम वैधता दस्तावेज, सोसायटी बायलॉज और प्राधिकरण की अनुमति से तय होगी
🧾 ऑडिट रिपोर्ट बनाम क्लीन चिट — सवाल बरकरार
सूत्रों के मुताबिक MHADA की ऑडिट जांच में अधिकारी महाजन ने अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को दोषी बताया था। लेकिन बाद में उपनिबंधक स्तर पर बी. एस. कटरे द्वारा सोसायटी को राहत मिलने से रहस्य और गहरा गया है।
म्हाडा अधिकारी महाजन द्वारा जो रिपोर्ट उपनिबंधक रजिस्टार ऑफिस जमा की गई थी, उसे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें..
स्थानीय लोगों का सवाल है:
“जब रिपोर्ट में दोष बताया गया था, तो क्लीन चिट कैसे मिली — और क्यों?”
📬 शिकायतें… पर कार्रवाई नहीं?
रूम मालिकों का दावा है कि:
- कई लिखित शिकायतें दी गईं
- हस्ताक्षर अभियान चलाया गया
- मीडिया द्वारा भी दस्तावेज भेजे गए
लेकिन जब वशिष्ठ मीडिया के लीगल सलाहकार ने बी. एस. कटरे से पूछा, तो कथित तौर पर जवाब मिला कि उन्हें कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।
यहीं से प्रशासनिक पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

🪧 भारी बोर्ड गिरने की घटना भी चर्चा में
निवासियों के अनुसार फेडरेशन का एक बड़ा बोर्ड लगाया गया था जो एक बार गिर भी चुका है और एक बच्ची को चोट लगी थी। आरोप है कि चेतावनी के बावजूद बोर्ड हटाया नहीं गया।
(इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।)
⚖️ मामला अब अदालत में
से जुड़े सूत्रों के अनुसार:
- उपनिबंधक बी. एस. कटरे
- संबंधित कुछ अधिकारियों
- और सोसायटी प्रबंधन
के खिलाफ सिविल कोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है और आगे कानूनी कार्रवाई संभव है।
❗ बड़ा सवाल — आखिर किसका संरक्षण?
पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय निवासियों और मीडिया की ओर से सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है:
- क्या बिल्डिंग को ऑटो स्टैंड बनाने की अनुमति वास्तव में दी गई थी?
- क्या MHADA बायलॉज का पालन हुआ?
- और सबसे अहम — बी. एस. कटरे लगातार कार्रवाई से क्यों दूर दिख रहे हैं?
जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आते, विवाद थमता नहीं दिख रहा।










