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‘वशिष्ठ वाणी’ के खुलासे से भी नहीं टूटी नींद: कांदिवली में 25 हजार जिंदगियों से खिलवाड़ जारी, CM फडणवीस—कब जागेगा आपका सोता हुआ प्रशासन?

  • वशिष्ठ वाणी |

मुंबई ब्यूरो: दैनिक समाचार पत्र ‘वशिष्ठ वाणी’ के मुख्य पृष्ठ पर भूमि पार्क रोड और छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स (कांदिवली वेस्ट) के बाहर ‘भारत गैस’ द्वारा चलाए जा रहे अवैध खुले गोदाम की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासनिक कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। 25 हजार से अधिक स्थानीय निवासियों की सांसें हर पल एक बड़े संभावित विस्फोट के मुहाने पर टंगी हैं, लेकिन न तो कांदिवली ट्रैफिक विभाग की आँखें खुल रही हैं और न ही उत्तर परिक्षेत्र के एसीपी (ACP) दफ़्तर को जनता की सुरक्षा की कोई परवाह है।

अधिकारियों के इस अड़ियल और बेफिक्र रवैये से साफ जाहिर होता है कि उन्होंने ठान लिया है कि ‘मीडिया चाहे जितना लिखे और जनता चाहे जितनी परेशान हो, हम अपनी कुर्सी से नहीं हिलेंगे!’

1. कांदिवली ट्रैफिक विभाग का दोहरा मापदंड: “गाड़ियां ज़ब्त क्यों नहीं?”

कांदिवली ट्रैफिक विभाग यह लाचार दलील दे रहा है कि उनका काम सिर्फ चालान काटना है।

  • सवालों के घेरे में पुलिस: आम नागरिकों या छोटे वाहन चालकों पर तुरंत क्रेन बुलाकर गाड़ियां उठाने वाली पुलिस, ‘भारत गैस’ के 10 से 14 भारी-भरकम ट्रकों को ज़ब्त (Seize) करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रही?
  • रिकॉर्ड का सफेद झूठ: आरटीआई (RTI) के जवाब में पुलिस कहती है कि भारत गैस की गाड़ियों के चालान का अलग रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। जब विभाग के पास अपनी ही कार्रवाई का ब्योरा तक नहीं है, तो कागजी चालान काटने के दावों पर सवाल उठना तय है।

2. भूमि पार्क रोड से गणेश नगर तक… हर सड़क बनी कमर्शियल पार्किंग!

यह समस्या सिर्फ एक सड़क तक सीमित नहीं है। कांदिवली के भूमि पार्क रोड से लेकर गणेश नगर तक पूरे इलाके की मुख्य सड़कों पर कमर्शियल गाड़ियों, बड़े ट्रकों और टेम्पो चालकों का अवैध कब्ज़ा हो चुका है। पुलिसिया चालान का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है और चालान सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है।

3. गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधा सवाल:

  • प्रशासनिक लाचारी कब तक?: जब 25,000 नागरिकों की जान खतरे में हो, तब भी यदि आपका निचला प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा रहे, तो जनता किस पर भरोसा करे?
  • दुर्घटना के बाद जांच का नाटक क्यों?: अधिकारियों की सोच बन चुकी है कि जब तक कोई बड़ी दुर्घटना या विस्फोट नहीं होता, तब तक मामलों को टालते रहो। सवाल यह है कि हादसों के बाद मुआवजे और जांच कमेटी का नाटक करने के बजाय, समय रहते कड़े फैसले लेने से अधिकारी और सरकार क्यों पीछे हट रहे हैं?

‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा संकल्प:

हम जनता को जागरूक करने और इस बहरे सिस्टम को आईना दिखाने का काम जारी रखेंगे। अधिकारियों की इस अनदेखी और कागजी टालमटोल के आगे ‘वशिष्ठ वाणी’ की कलम रुकने वाली नहीं है। जब तक भूमि पार्क रोड से लेकर गणेश नगर तक की सड़कों से अवैध कमर्शियल गाड़ियों और इस जानलेवा गैस गोदाम को पूरी तरह हटाया नहीं जाता, तब तक ‘वशिष्ठ वाणी’ हर दिन इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा!

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