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कागजी कार्रवाई का मुखौटा या बुलडोजर चलाने से डर? जन कल्याण नगर फुटपाथ पर बीएमसी अधिकारी प्रवीण वाघेला की सुस्ती पर सबसे बड़ा सवाल—आखिरकार किस दबाव में रुका है पीला पंजा?

  • वशिष्ठ वाणी: विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

मुंबई (वशिष्ठ वाणी ब्यूरो): मालाड वेस्ट के जन कल्याण नगर रोड (सेंट जूड स्कूल के सामने, दिव्या पार्क और बफिरा नगर) पर चल रहे अतिक्रमण के खेल को लेकर जब ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर स्थानीय सब्जी मंडी और दुकानदारों से बातचीत की, तो एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया।

स्थानीय लोगों और सूत्रों से छानबीन में यह बात पता चली कि बीएमसी द्वारा वहां लगातार और कड़ी कार्रवाई की जा रही है! लेकिन जैसे ही इस दावे की सच्चाई परखने के लिए हमारी टीम ने मौके पर जाकर अपनी आँखों से देखा, तो तस्वीर बिल्कुल उलट मिली—फुटपाथ आज भी अवैध कब्जों और ठेलों से पूरी तरह पटा हुआ है।

यहीं से जनता और ‘वशिष्ठ वाणी’ का वह सबसे बड़ा, कड़क और तीखा सवाल खड़ा होता है जो बीएमसी अतिक्रमण विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीण वाघेला (Praveen Vaghela) की कार्यशैली को सीधे कटघरे में खड़ा करता है: यदि वाकई इतनी कड़ी कार्रवाई हो रही है, तो फिर इस नासूर को जड़ से खत्म क्यों नहीं किया जा रहा? एक ही बार बुलडोजर चलाकर सब कुछ नेस्तनाबूद क्यों नहीं कर दिया जाता? आखिर वह कौन सी मजबूरी या ताकत है जो प्रवीण वाघेला को बुलडोजर चलाने से रोक रही है?

जनता और मीडिया के तीखे सवाल: बीएमसी अधिकारी प्रवीण वाघेला जवाब दें!

  1. कड़ी कार्रवाई के दावे तो फिर फुटपाथ खाली क्यों नहीं?: जब स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आ रही है कि विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है, तो कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद वही अवैध कब्जा दोबारा कैसे लौट आता है? क्या यह सिर्फ दिखावे की कार्रवाई है, या इसके पीछे कोई स्थायी समाधान न चाहने की सोची-समझी रणनीति है?
  2. बुलडोजर कार्रवाई से परहेज क्यों?: जब शहर के अन्य हिस्सों में अवैध कब्जों को जमींदोज करने के लिए बुलडोजर (पीले पंजे) का इस्तेमाल सबसे बड़ा हथियार माना जाता है, तो जन कल्याण नगर के इस फुटपाथ पर अधिकारी प्रवीण वाघेला इतनी नरमी क्यों बरत रहे हैं? क्या यहाँ बुलडोजर चलाने पर किसी का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव आ जाता है?
  3. जनता की सुरक्षा दांव पर क्यों?: स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों का फुटपाथ पर चलना मुहाल हो चुका है। लोग जान जोखिम में डालकर बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं। ऐसे में बीएमसी अधिकारी किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

‘वशिष्ठ वाणी’ की दो टूक चेतावनी

‘वशिष्ठ वाणी’ का यह स्पष्ट मानना है कि जब तक इस अवैध साम्राज्य की जड़ों पर बुलडोजर नहीं चलेगा, तब तक ऐसी लीपापोती भरी कार्यवाहियों का कोई मतलब नहीं है।

अब बीएमसी के उच्चाधिकारियों और संबंधित अधिकारी प्रवीण वाघेला को यह स्पष्ट करना होगा कि जन कल्याण नगर के इस फुटपाथ पर बुलडोजर चलाने से कौन रोक रहा है? जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता और स्थायी बुलडोजर कार्रवाई नहीं होती, ‘वशिष्ठ वाणी’ का यह तीखा पहरा और तीखे सवाल पूरी ताकत से गूंजते रहेंगे!

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