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मालवणी पुलिस चौकी या समझौता केंद्र? — BNS 118 (1) जैसी गैर-जमानती धारा के बाद भी आरोपी बाहर

  • पुलिस का दावा ‘हमने नोटिस दिया’, पीड़िता बोली- ‘यह न्याय नहीं, पुलिस का नाटक है!’

विशेष रिपोर्ट | वशिष्ठ वाणी

मुंबई: मुंबई की मालवणी पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे गंभीर सवालों के बीच अब ‘कागजी खानापूर्ति’ का बड़ा खेल उजागर हुआ है। मामला मालाड (पश्चिम) के मालवणी गेट नंबर 07 क्षेत्र का है, जहाँ 07/10/2026 की रात 10:30 बजे से 08/10/2026 की रात 01:30 बजे के बीच एक महिला पर कई लोगों द्वारा बेरहमी से हमला किया गया था।

वशिष्ठ वाणी द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद मालवणी पुलिस ने सोशल मीडिया (X) पर जवाब देते हुए कहा है कि— “मामले में संज्ञान लेते हुए अपराध दर्ज किया गया है और आरोपी को BNSS की धारा 35(3) के तहत कानूनी नोटिस तामील कराया गया है।”

लेकिन पुलिस के इस जवाब ने न्याय व्यवस्था और मालवणी पुलिस के ‘चरित्र’ पर और भी तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल 1: जब धारा 118(1) गैर-जमानती है, तो तुरंत गिरफ्तारी के बजाय ‘नोटिस का नाटक’ क्यों?

मालवणी पुलिस ठाणे में दर्ज FIR No. 1584/2026 (दिनांक 08/10/2026, समय 02:10 बजे) में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की निम्नलिखित गंभीर धाराएं दर्ज हैं:

  • धारा 118(1): खतरनाक हथियारों/लाठी-डंडों से चोट पहुंचाना (गैर-जमानती और गंभीर संज्ञेय अपराध)
  • धारा 115(2): जानबूझकर शारीरिक चोट/दर्द पहुंचाना
  • धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से अपमानित करना
  • धारा 3(5): समान इरादे से समूह बनाकर हमला करना

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि जब मामला महिला पर हमले और BNS 118(1) जैसी गैर-जमानती धारा से जुड़ा हो, तो पुलिस का काम आरोपियों को नोटिस देकर खुला छोड़ना नहीं, बल्कि तुरंत गिरफ्तार करना होता है। क्या मालवणी पुलिस आरोपियों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए केवल ‘नोटिस थमाने’ का नाटक कर रही है?

सवाल 2: पीड़िता को सुबह 4 बजे तक बैठाया, और हमलावर आरोपियों को पहले ही जाने दिया!

पीड़िता का गंभीर आरोप है कि जब वह लथपथ हालत में शिकायत कराने पुलिस चौकी पहुँची, तो पुलिसकर्मी तुरंत एफआईआर दर्ज करने के बजाय टालमटोल करते रहे और समझौते का दबाव बनाते रहे।

पीड़िता के अनुसार— “मुझे पुलिस स्टेशन में तड़के सुबह 4:00 बजे तक बिठाकर प्रताड़ित किया गया, जबकि हमला करने वाले आरोपियों को पुलिस ने पहले ही बड़े आराम से जाने दिया!”

जब आरोपियों को उसी समय हिरासत में लिया जाना चाहिए था, तब उन्हें जाने देना और पीड़िता को बैठाकर रखना यह साफ दर्शाता है कि मालवणी पुलिस की नीयत और दिशा किस तरफ भटक चुकी है।

सवाल 3: पुलिस की ढिलाई का नतीजा— ‘हम जेल जाएंगे तो तुम्हें भी भिजवाएंगे!’, पति पर कराया काउंटर-केस!

पीड़िता का कहना है कि जब वह किसी भी दबाव में नहीं झुकी और एफआईआर दर्ज कराकर ही मानी, तो आरोपियों के परिवार ने खुलेआम धमकी दी कि— “अगर तुम केस करोगी और हम जेल जाएंगे, तो तुम्हारे पति को भी जेल भिजवाएंगे!”

आरोप है कि मालवणी पुलिस की शह पर आरोपियों के पक्ष ने पीड़िता के पति के खिलाफ भी एक फर्जी ‘काउंटर-केस’ (Cross Case) दर्ज करवा दिया। पुलिस ने आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया, जिसका फायदा उठाकर उन्होंने पीड़िता के परिवार पर ही पलटकर केस करवा दिया ताकि वे डरकर समझौता कर लें।

तबादले हुए, लेकिन मालवणी पुलिस की कार्यशैली नहीं बदली!

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मालवणी पुलिस स्टेशन में अधिकारियों के तबादले तो होते रहते हैं, लेकिन यहाँ की कार्यशैली जस की तस बनी हुई है। इससे पहले भी वशिष्ठ वाणी द्वारा महिला कांस्टेबल खांडेकर से जुड़े मामले में मालवणी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन विभाग ने आज तक कोई जवाब जारी नहीं किया।

आज हालात यह हैं कि आम जनता के मन में यह डर बैठ रहा है कि यदि पुलिस ही आरोपियों से साठगांठ करके पीड़ितों को प्रताड़ित करेगी, तो न्याय के लिए नागरिक किसके पास जाएंगे?

गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई पुलिस कमिश्नर से मांग

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस जहाँ राज्य में पारदर्शी पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा के बड़े दावे करते हैं, वहीं मालवणी पुलिस की यह कार्यशैली उन दावों को कटघरे में खड़ा करती है।

पीड़िता और जनता की स्पष्ट मांग:

  1. कागजी नोटिस का नाटक बंद कर FIR No. 1584/2026 के नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
  2. पीड़ित महिला पर दबाव बनाने और उसके पति पर कराए गए फर्जी काउंटर-केस को खारिज कर निष्पक्ष जांच की जाए।
  3. पीड़िता को सुबह 4 बजे तक बिठाने और आरोपियों को सह देने वाले मालवणी पुलिस अधिकारियों पर कड़ा विभागीय एक्शन लिया जाए।

संपादकीय टिप्पणी: पुलिस का काम पीड़ितों का भरोसा जीतना और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना है, न कि नोटिस की आड़ में अपराधियों को बचाना और पीड़ितों पर समझौते का दबाव बनाना। अब देखना यह है कि वशिष्ठ वाणी के इस खुलासे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और गृह विभाग मालवणी पुलिस के इस रवैये पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं!

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