सीवर पाइपलाइन के लिए नई सड़क तोड़े जाने से नाराज हुए क्षेत्रीय लोग, जेई ने दिया दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण का आश्वासन
वाराणसी/ वशिष्ठ वाणी। BLW पहाड़ी गेट के समीप महज तीन दिन पहले बनाई गई RCC सड़क को सीवर पाइपलाइन डालने के लिए दोबारा तोड़े जाने से क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौके पर जुटे और सड़क तोड़े जाने के विरोध में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मामले में जिम्मेदारी तय करने और सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराने की मांग की।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क का निर्माण कुछ दिन पहले ही कराया गया था और वह पूरी तरह ठीक स्थिति में थी। इसके बावजूद सीवर पाइपलाइन से जुड़े कार्य के लिए सड़क को दोबारा तोड़ दिया गया। सड़क टूटने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि यदि पाइपलाइन का काम पहले से प्रस्तावित था, तो सड़क निर्माण से पहले उसे पूरा क्यों नहीं कराया गया।
नई सड़क तोड़ने पर उठे सवाल
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण के महज तीन दिन बाद उसे तोड़ना विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों ने पूछा कि सड़क निर्माण और सीवर पाइपलाइन से जुड़े विभागों के बीच आपसी तालमेल क्यों नहीं था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब सड़क तोड़े जाने को लेकर जिम्मेदार लोगों से सवाल किया गया तो इसे गलती से सड़क टूट जाने का मामला बताया गया। लोगों का कहना है कि यदि सड़क गलती से तोड़ी गई है तो इस लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
मौके से सामने आए वीडियो में भी सड़क तोड़े जाने को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी दिखाई दे रही है।
धरने की सूचना पर मौके पर पहुंचीं जेई
विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद जेई पूनम सिंह मौके पर पहुंचीं। उन्होंने धरना दे रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। क्षेत्रीय नागरिकों ने सड़क तोड़े जाने पर नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
जेई ने लोगों को आश्वासन दिया कि सीवर पाइपलाइन का कार्य पूरा होने के बाद सड़क की दोबारा RCC ढलाई कराकर उसे ठीक कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि हुई गलती को सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
आश्वासन के बाद लोगों ने स्पष्ट किया कि सड़क का पुनर्निर्माण केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं होना चाहिए, बल्कि निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाना चाहिए।
सरकारी धन की बर्बादी पर भी सवाल
नई सड़क को कुछ ही दिनों बाद तोड़े जाने से सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क निर्माण में जनता के पैसे खर्च होते हैं। ऐसे में विभागीय तालमेल की कमी के कारण नई सड़क को तोड़ना और फिर उसी हिस्से का दोबारा निर्माण करना सरकारी धन के सदुपयोग पर सवाल खड़ा करता है।
लोगों ने मांग की कि जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि सड़क निर्माण से पहले सीवर पाइपलाइन का कार्य क्यों नहीं कराया गया और सड़क तोड़ने की स्थिति क्यों बनी।
सड़क निर्माण से पहले क्यों नहीं हुआ सीवर का काम?
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि सीवर पाइपलाइन डालना जरूरी था तो पहले पाइपलाइन का काम पूरा कराया जाना चाहिए था। इसके बाद सड़क का निर्माण किया जाता तो नई सड़क को तोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
लोगों ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की मांग करते हुए कहा कि विकास कार्यों के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को बार-बार तोड़े जाने की व्यवस्था पर रोक लगनी चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय विभागों के बीच समन्वय हो और सरकारी धन का सही इस्तेमाल किया जाए।
स्थानीय लोगों ने मांग की कि सीवर पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद सड़क की RCC ढलाई जल्द कराई जाए। साथ ही पुनर्निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन और निर्माण की गुणवत्ता की जांच भी सुनिश्चित की जाए।
धरना-प्रदर्शन में पुष्पकला झा, साधना जायसवाल, सौरभ कुमार, राकेश, अरुण और योगेंद्र समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।
अब सवाल यह है कि महज तीन दिन पहले बनी सड़क को आखिर दोबारा तोड़ने की नौबत क्यों आई और इस लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी तय होगी। फिलहाल जेई के आश्वासन के बाद लोगों को उम्मीद है कि सीवर कार्य पूरा होने के बाद सड़क का पुनर्निर्माण जल्द और गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाएगा।










