विशेष संवाददाता, मुंबई (वशिष्ठ वाणी) — मुंबई के मालवणी गेट नंबर 8 स्थित सामना नगर की ‘मालवणी स्वप्नपूर्ति सीएचएस (इमारत 1D)’ इन दिनों एक अजीबोगरीब तानाशाही और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने को लेकर सुर्खियों में है। सोसाइटी का वर्तमान अध्यक्ष पिछले 10 वर्षों से सचिव (Secretary) और पिछले 5 वर्षों से अध्यक्ष (Chairman) के पद पर काबिज़ है। यानी लगातार 15 वर्षों से सत्ता की चाबी अपने पास रखकर पूरी इमारत में मनमानी चलाई जा रही है।
ताज़ा मामला सोसाइटी परिसर के भीतर व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) की अवैध पार्किंग से जुड़ा है। चूंकि खुद अध्यक्ष महोदय पेशे से ऑटो रिक्शा चालक हैं, इसलिए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल अपनी ऑटो रिक्शा, बल्कि कई अन्य कमर्शियल ऑटो रिक्शा को सोसाइटी परिसर (Compound) के अंदर पार्क करवाना शुरू कर दिया है। जब वशिष्ठ वाणी ने इस गैर-कानूनी गतिविधि पर सवाल उठाए और निवासियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, तो अध्यक्ष का अहंकार से भरा जवाब था: “मैं सोसाइटी का अध्यक्ष हूँ, कमेटी मेंबर से प्रस्ताव पास करवाकर जो ठीक लगेगा, वही करूँगा!”
कानून क्या कहता है? (Co-operative Housing Society Laws & MHADA Rules)
सोसाइटी अध्यक्ष और प्रबंध समिति (Managing Committee) के इस तर्क की कानूनी हकीकत क्या है? आइए महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट (MCS Act 1960) और म्हाडा (MHADA) के नियमों के जरिए समझें:
1. क्या म्हाडा बिल्डिंग में कमर्शियल ऑटो रिक्शा की पार्किंग वैध है?
- कानूनी नियम: म्हाडा की रिहायशी (Residential) इमारतों में परिसर का स्थान केवल निवासियों के व्यक्तिगत/निजी इस्तेमाल के लिए होता है। कमर्शियल या व्यावसायिक वाहन (जैसे पैसेंजर ऑटो रिक्शा, कमर्शियल टैक्सी या मालवाहक गाड़ियाँ) को रिहायशी परिसर के अंदर व्यावसायिक उद्देश्य से पार्क करना महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज बाय-लॉ (Bye-laws) का सीधा उल्लंघन है।
- म्हाडा द्वारा इस लेआउट में 3-व्हीलर या 4-व्हीलर की व्यावसायिक पार्किंग के लिए कोई आधिकारिक अनुमति या स्थान आवंटित (Allot) नहीं किया गया है।
2. क्या 11 सदस्यों की कमेटी (Managing Committee) कानून से ऊपर है?
- कानूनी नियम: प्रबंध समिति (Managing Committee) के 11 सदस्य केवल सोसाइटी के बाय-लॉ (Bye-laws) और राज्य के कानून के दायरे में रहकर ही निर्णय ले सकते हैं।
- सत्य: कमेटी का कोई भी प्रस्ताव (Resolution) यदि राज्य सरकार के कानून, म्हाडा के नियमों या उप-विधियों के विपरीत है, तो वह प्रस्ताव कानूनन ‘शून्य और अवैध’ (Null and Void) माना जाता है। बहुमत का इस्तेमाल गैर-कानूनी काम को कानूनी बनाने के लिए नहीं किया जा सकता।
3. 15 सालों से एक ही व्यक्ति का कब्ज़ा: क्या यह सही है?
- MCS Act की धारा 73 और संशोधित नियमों के अनुसार, हर 5 साल में पारदर्शी चुनाव होना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति लगातार 15 सालों से पद का दुरुपयोग कर रहा है और एकाधिकार चला रहा है, तो यह सहकारी लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
उप-निबंधक (Deputy Registrar) की चुप्पी और कोर्ट का रुख
स्थानीय निवासियों और वशिष्ठ वाणी द्वारा इस धांधली की शिकायत म्हाडा और सहकारिता विभाग के उप-निबंधक (Deputy Registrar, Co-operative Societies) को कई बार लिखित में दी गई। लेकिन अचरज की बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस मनमानी पर आँखें मूँद रखी हैं।
अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण अब यह मामला अदालत (Court) तक पहुँच गया है। अदालत में जाने के बाद अब दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है:
- क्या प्रबंध समिति कानून से ऊपर है?
- क्या पद की आड़ में आवासीय परिसर को कमर्शियल स्टैंड बनाया जा सकता है?
वशिष्ठ वाणी का रुख
वशिष्ठ वाणी ने जब भी जनता के हित में आवाज़ उठाई है, तथ्यों और सबूतों के आधार पर उठाई है। सोसाइटी का अध्यक्ष या कमेटी का कोई भी सदस्य कानून से बड़ा नहीं हो सकता। रिहायशी परिसर में बेतरतीब पार्क की जा रही ऑटो रिक्शा से आपातकालीन स्थिति (जैसे एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का आना) में बड़ा हादसा हो सकता है।
जब तक इस अवैध पार्किंग को हटाया नहीं जाता और 15 सालों से चल रही इस मनमानी पर कानूनी अंकुश नहीं लगता, वशिष्ठ वाणी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा।










