स्पेशल ब्यूरो, मुंबई (वशिष्ठ वाणी) — अगर आपको लगता है कि मुंबई में जमीन या पार्किंग स्पेस खरीदना बहुत महंगा है, तो शायद आपने मालाड-गोरेगांव की यह ‘अनोखी तरकीब’ नहीं देखी! मालाड वेस्ट (माइंडस्पेस) के चिंचोली बंदर रोड एक्सटेंशन पर स्थित ‘Lemon Tree Premier’ होटल के बाहर की सड़क आजकल ट्रैफिक प्रबंधन का ऐसा ‘आश्चर्य’ बनी हुई है, जिसे देखकर बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी हैरान हो जाएं।
मामला यह है कि वशिष्ठ वाणी द्वारा अनगिनत बार सबूतों के साथ शिकायतें की जा चुकी हैं। जब भी हमारे रिपोर्टर गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के साहब लोगों से बात करते हैं, तो वहां से बड़े ही गंभीर चेहरे के साथ एक ही टेप-रिकॉर्डर वाला जवाब मिलता है— “अरे सर, हम तो रोज कड़क कार्रवाई करते हैं!”
अब सवाल यह उठता है कि यह कैसी ‘अदृश्य कार्रवाई’ है?
क्या गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के चालान में कोई ऐसी जादुई शक्ति है, जिससे चालान कटते ही गाड़ी गायब होने के बजाय सड़क पर और मजबूती से जम जाती है?
📍 लोकेशन: Lemon Tree Premier, CTS 1406/11, Chincholi Bunder Rd Extn, off New Link Road, Mindspace, Malad West
‘रोज चालान’ का गणित: झूठ या कुछ और?
वशिष्ठ वाणी के रिपोर्टर ने जब ट्रैफिक अधिकारियों को शीशा दिखाने की कोशिश की कि “साहब, अगर आप रोज ईमानदारी से चालान काटेंगे, तो कोई भी गाड़ी वाला रोज-रोज अपनी जेब खाली करके वहां गाड़ी खड़ी करने का जिगरा नहीं रखेगा।” तो अधिकारी महोदय के पास चुप्पी के सिवाय कोई जवाब नहीं था।
अब जनता के दिमाग में दो ही बातें आती हैं:
- या तो गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के अधिकारी सफेद झूठ बोल रहे हैं और कार्रवाई का सिर्फ नाटक होता है।
- या फिर इस ‘लेमन ट्री’ होटल से किसी बड़े साहब का ऐसा ‘मीठा रिश्ता’ या आशीर्वाद जुड़ा है, जिसके आगे ट्रैफिक के सारे नियम-कानून बौने साबित हो रहे हैं!
नहीं तो आखिर अनगिनत शिकायतों के बाद भी यह सड़क एक दिन के लिए भी गाड़ियों से मुक्त क्यों नहीं दिखी?
कानूनी रास्ते पर जाने की तैयारी: अब कोर्ट में होंगे तीखे सवाल
वशिष्ठ वाणी कोई हवा-हवाई बातें नहीं करता। हम जनहित के इस मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाएंगे।
अंतिम चेतावनी: वशिष्ठ वाणी अभी कुछ दिन और शासन-प्रशासन के कानों तक आवाज पहुंचाने के लिए औपचारिक शिकायतें दर्ज कराएगा। अगर इसके बावजूद गोरेगांव ट्रैफिक विभाग ने ‘कागजी कार्रवाई’ छोड़कर सड़क पर असल में बुलडोजर और क्रेन नहीं उतारी…
तो वशिष्ठ मीडिया हाउस (Vashishth Media House) की लीगल टीम गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को माननीय अदालत (Court) के समक्ष कटघरे में खड़ा करेगी। फिर जज साहब के सामने अधिकारियों को जवाब देना होगा कि आखिर ‘लेमन ट्री’ के बाहर ट्रैफिक का कानून कौन सा नया मोड़ ले लेता है!
देखते हैं कि अब गोरेगांव ट्रैफिक विभाग अपनी नींद से जागता है या फिर कोर्ट का समन ही उनकी नींद उड़ाएगा!










