लोकप्रिय विषयमहाराष्ट्रसम्पादकीयकवितास्वास्थ्यअपराधअन्यवीडियो

विशेष रिपोर्ट: क्या ‘खादी’ और ‘खाकी’ के गठजोड़ ने निगल लिया कानून? MHADA के भ्रष्ट तंत्र पर ‘वशिष्ठ वाणी’ का बड़ा प्रहार

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): लोकशाही के चौथे स्तंभ यानी मीडिया का काम आईना दिखाना है, लेकिन जब प्रशासन उस आईने को ही पत्थर मारने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। मालवानी की ‘ओम सिद्धिविनायक सोसायटी’ में चल रहा अवैध निर्माण का खेल अब म्हाडा (MHADA) के अधिकारियों की नीयत पर बदरंग धब्बा बन चुका है।

सबूतों की ‘बलि’, भ्रष्टाचार की ‘बल्ले-बल्ले’

‘वशिष्ठ वाणी’ और ‘संसद वाणी’ ने इस पूरे मामले की परत-दर-परत खोलकर रख दी। साक्ष्यों के साथ यह साबित किया गया कि 15 साल पुराने वाटर टैंक पर किया गया ‘ओपन शेड’ का निर्माण पूरी तरह अवैध है और ब्लूप्रिंट के खिलाफ है। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि म्हाडा के अधिकारी रोहित शिंदे के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। उल्टे, वे मीडिया के सबूतों को ठेंगा दिखाकर यह कह रहे हैं कि “विधायक असलम शेख का फंड लगा है, इसलिए कुछ नहीं होगा।”


क्या MLA Aslam Shaikh का फंड ‘पाप धोने’ की मशीन है?

अधिकारी रोहित शिंदे का यह तर्क न केवल हास्यास्पद है, बल्कि कानून की सीधी तौहीन है। जनता पूछ रही है:

  • क्या किसी भी अवैध ढांचे पर सरकारी बोर्ड लगा देने से वह ‘पवित्र’ हो जाता है?
  • क्या विधायक निधि का इस्तेमाल मास्टर प्लान को ठेंगा दिखाने के लिए किया जा सकता है?
  • अगर कल को कोई अपराधी विधायक निधि से अपना घर बनवा ले, तो क्या उसे तोड़ा नहीं जाएगा?

मौन प्रशासन: शह या मजबूरी?

इस मामले में सबसे डरावना पहलू वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित मंत्रालय की चुप्पी है। जब मीडिया सबूत चीख-चीख कर दे रहा है, तब भी रोहित शिंदे जैसे अधिकारियों पर कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। ऐसा लगता है कि अधिकारियों को इस बात का पूरा भरोसा है कि “ऊपर” बैठे आका उनका बाल भी बांका नहीं होने देंगे।

बढ़ता मनोबल, मरता कानून

जब खबरों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो अधिकारी बेलगाम हो जाते हैं। रोहित शिंदे का निर्भीक होकर कार्रवाई से मना करना इस बात का प्रमाण है कि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही जनता के प्रति अपनी जवाबदेही का। यह “वसूली और संरक्षण” के उस गंदे खेल की ओर इशारा करता है, जहां नेता फंड देते हैं और अधिकारी उस फंड की आड़ में अवैध निर्माण को सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।

हमारा सवाल:

क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और म्हाडा के उच्चाधिकारी इस खुलेआम हो रही गुंडागर्दी पर संज्ञान लेंगे? या फिर मालवानी में ब्लूप्रिंट को जलाकर इसी तरह ‘विधायक निधि’ के नाम पर अवैध साम्राज्यों का निर्माण होता रहेगा?

‘वशिष्ठ वाणी’ इस मामले का पीछा तब तक नहीं छोड़ेगी, जब तक सिस्टम के इन ‘सफेदपोश’ दीमकों का सच पूरी तरह बेनकाब नहीं हो जाता।

Join WhatsApp

Join Now

और पढ़ें

पीड़ित परिवार के समर्थन में आगे आए जनसेवक: एडवोकेट ओमप्रकाश मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल और Sr. PI रानी पूरी का जताया सहृदय आभार

‘वशिष्ठ वाणी’ एक्सक्लूसिव: MARG शिकायत आईडी – PW_202600056227 का दिखावा! 2 जुलाई को दिया ट्विटर का झांसा, 3 महीने बाद भी सड़क पर काम ‘शून्य’!

कांदिवली वेस्ट की बदहाली: अवैध पार्किंग बनी ‘सार्वजनिक मूत्रालय’! बीएमसी के स्वच्छता अभियानों की धज्जियां उड़ा रहे लापरवाह अधिकारी

7 दिन और जीरो एक्शन! बीएमसी अधिकारी प्रवीण वाघेला के बड़े-बड़े दावे निकले कोरे झूठे, जन कल्याण नगर का फुटपाथ अब भी अवैध कब्जे में

अधिकारी बदला, पर अवैध पार्किंग का ‘खेल’ वही: मोदी हुंडई शोरूम के बाहर आज भी सड़क पर कब्जा, ट्रैफिक विभाग, बीएमसी और एसीपी के ‘आशीर्वाद’ से नहीं पिघला प्रशासन!

खबर छपी, पर ट्रैफिक पुलिस की टोइंग वैन और आँखें दोनों रहीं गायब: ऑटोरेस टीवीएस शोरूम के बाहर आज भी सड़क पर सजा है अवैध गाड़ियों का मेला!

Leave a Comment