मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई के मालवणी गेट नंबर 8, समाना नगर इलाके में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर लगाए गए एक विशालकाय फेडरेशन बोर्ड ने म्हाडा प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि म्हाडा अधिकारी बी.एस. कटरे की नाक के नीचे फेडरेशन अध्यक्ष बालासाहेब भगत द्वारा अवैध कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद प्रशासन ‘धृतराष्ट्र’ बना बैठा है।
कुर्सी का मोह या अध्यक्ष से ‘खास’ लगाव?
इलाके में चर्चा का विषय बना यह भारी-भरकम बोर्ड न केवल अवैध बताया जा रहा है, बल्कि यह म्हाडा के उन अधिकारियों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठा रहा है जिन्हें अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। स्थानीय लोग अब सीधे शब्दों में पूछ रहे हैं— “क्या बी.एस. कटरे म्हाडा की कुर्सी पर इसलिए बैठे हैं कि वे नियमों की रक्षा करें, या फिर उन्हें बालासाहेब भगत से इतना प्रेम है कि वे जनता की शिकायतों को कचरा समझ रहे हैं?”
भ्रष्टाचार और मिलीभगत की बू
सूत्रों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि बालासाहेब भगत द्वारा परिसर में एक के बाद एक मनमानी गतिविधियां की जा रही हैं। जब भी इसकी शिकायत अधिकारियों तक पहुंचती है, तो कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिलता है। लोगों का आरोप है कि:
- बी.एस. कटरे को कई बार लिखित सूचना दी गई, फिर भी वे ‘टस से मस’ नहीं हो रहे।
- प्रशासन की इस चुप्पी से बालासाहेब भगत के हौसले बुलंद हैं।
- जनता को संदेह है कि इस चुप्पी के पीछे कोई बड़ा ‘लेन-देन’ या गहरा रसूख काम कर रहा है।
“शर्म तो आती नहीं…” – जनता का फूटा गुस्सा
क्षेत्र के नागरिकों ने कड़े शब्दों में कहा है कि अधिकारियों को बार-बार सूचित करने के बाद भी कार्रवाई न होना शर्मनाक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह अवैध बोर्ड तुरंत नहीं हटाया गया और बी.एस. कटरे ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो म्हाडा मुख्यालय के सामने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
“अवैध काम हो रहा है और अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। यह सीधे तौर पर जनता के साथ धोखा है। हम जानना चाहते हैं कि बालासाहेब भगत पर म्हाडा इतनी मेहरबान क्यों है?” — स्थानीय निवासी, समाना नगर
अब आर-पार की लड़ाई
मालवणी की जनता अब इस मामले को दबने नहीं देगी। शिकायतों का पुलिंदा तैयार है और अब इसकी गूंज म्हाडा के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रालय तक पहुंचाने की तैयारी हो चुकी है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस ‘अवैध बोर्ड’ को हटाकर अपनी साख बचाता है या अध्यक्ष के प्रेम में अपनी कुर्सी को कलंकित करता रहता है।












