विशेष संवाददाता
मुंबई। मालाड (पश्चिम) स्थित लिबर्टी बार के पास कमर्शियल इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार को घेरकर चलाए जा रहे ‘श्रीनाथ डोसा’ को लेकर समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद भी बीएमसी के पी-नॉर्थ (P-North) वार्ड प्रशासन की चुप्पी टूटने का नाम नहीं ले रही है। जनहित में रिपोर्ट सामने आने और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठने के बावजूद न तो मौके की जांच की गई और न ही बीएमसी या फायर ब्रिगेड की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया। प्रशासन की यह अनदेखी अब सीधे तौर पर अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका और मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।
‘श्रीनाथ डोसा’ पर मेहरबानी या साठगांठ?
सामान्य प्रक्रियाओं में, जब किसी कमर्शियल परिसर के मुख्य निकास द्वार पर अवैध कब्जे या बिना लाइसेंस व्यावसायिक गतिविधि की शिकायत मीडिया में उजागर होती है, तो संबंधित वार्ड अधिकारी और लाइसेंस निरीक्षक तुरंत कार्रवाई करते हैं। लेकिन ‘श्रीनाथ डोसा’ के मामले में बीएमसी पी-नॉर्थ वार्ड की निरंतर निष्क्रियता यह दर्शाती है कि नियम-कानून केवल कागजों तक सीमित हैं। क्या यह माना जाए कि अधिकारियों की सरपरस्ती के बिना मुख्य द्वार पर इस तरह का कब्जा संभव ही नहीं है?
फायर ब्रिगेड और बीएमसी से सीधे तीखे प्रश्न:
- दस्तावेज़ सार्वजनिक क्यों नहीं? यदि संबंधित ‘श्रीनाथ डोसा’ सेंटर के पास वैध ट्रेड लाइसेंस, हेल्थ एनओसी और फायर एनओसी मौजूद हैं, तो बीएमसी और फायर ब्रिगेड इसे सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहे हैं?
- सुरक्षा मानकों की अवहेलना: आपातकालीन निकास को बाधित करना कानूनन अपराध है। अगर कल को कोई बड़ा हादसा होता है, तो क्या बीएमसी के पी-नॉर्थ वार्ड के जिम्मेदार अधिकारी इसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी लेंगे?
- हफ्ता वसूली और भ्रष्टाचार का आरोप: कार्रवाई न होना इस आशंका को पुख्ता करता है कि सार्वजनिक सुरक्षा की कीमत पर विभागीय मिलीभगत और हफ्ता संस्कृति का खेल चल रहा है?
तत्काल निलंबन और उच्च स्तरीय जांच की मांग
‘वशिष्ठ वाणी’ प्रशासन से यह मांग करता है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बीएमसी कमिश्नर तुरंत संज्ञान लें। ‘श्रीनाथ डोसा’ के अवैध कब्जे को संरक्षण देने वाले बीएमसी पी-नॉर्थ वार्ड के संबंधित लाइसेंस इंस्पेक्टर, अतिक्रमण विभाग के अधिकारी और क्षेत्रीय फायर अफसरों के खिलाफ तुरंत जांच बैठाई जाए तथा उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाए।
संपादकीय नोट / अस्वीकरण: यह रिपोर्ट जनहित, पूर्व प्रकाशित समाचार पर बीएमसी की प्रतिक्रिया न आने और स्थानीय नागरिकों की चिंताओं पर आधारित है। हमारा संस्थान किसी व्यक्ति या विभाग पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाता, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शी जांच और कार्रवाई की मांग करता है। बीएमसी पी-नॉर्थ वार्ड को इस संबंध में जल्द से जल्द आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।








