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व्यवस्था की चौखट पर दम तोड़ती उम्मीदें: क्या सीहोर प्रशासन को जितेन्द्र सेन की पुकार सुनाई देगी?

सीहोर, मध्यप्रदेश। लोकतंत्र में जब आम आदमी थक-हार कर न्याय की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता है, तो उसे एक ही उम्मीद होती है—प्रशासन। लेकिन जब वही प्रशासन फाइलों के बोझ तले संवेदनशील शिकायतों को दबाने लगे, तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर जनता जाए तो जाए कहाँ?

सीहोर निवासी जितेन्द्र सेन का मामला आज प्रशासनिक उदासीनता का एक जीवंत और दुखद उदाहरण बन चुका है। अपनी और अपने वृद्ध पिता की सुरक्षा की गुहार लेकर जितेन्द्र सेन ने कलेक्टर कार्यालय से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों तक न जाने कितने आवेदन दिए, न जाने कितनी बार जनसुनवाई में अपनी पीड़ा व्यक्त की। लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात।



‘वशिष्ठ वाणी’ ने जब जितेन्द्र सेन द्वारा दिए गए उन तमाम पत्रों और शिकायतों का बारीकी से अध्ययन किया, तो स्थिति और भी भयावह दिखाई दी। यह केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं है, बल्कि उस खोखली व्यवस्था का आईना है जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए आम नागरिक की सुरक्षा को ताक पर रख देती है। शिकायतें साफ़ बता रही हैं कि जितेन्द्र सेन और उनके वृद्ध पिता को निरंतर मानसिक प्रताड़ना और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारी इसे गंभीरता से लेने के बजाय ‘अंधेखा’ कर रहे हैं।

वशिष्ठ वाणी का सिस्टम से सीधा और कड़ा सवाल:

प्रशासन के जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों से हमारा प्रश्न है—क्या आपकी नियुक्ति सिर्फ सरकारी फाइलों को लाल फीते में बांधकर कार्यालय की शोभा बढ़ाने के लिए हुई है? यदि एक नागरिक बार-बार अपनी सुरक्षा के लिए गिड़गिड़ा रहा है और आप हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, तो आप अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन कैसे कर रहे हैं?

वशिष्ठ वाणी पीड़ित की आवाज बनकर प्रशासन को चेतावनी देता है:

हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि ‘वशिष्ठ वाणी’ उन सभी लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है जो सिस्टम की लापरवाही से त्रस्त हैं। जितेन्द्र सेन ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए हम पर भरोसा किया है, और हम इस लड़ाई को तब तक लड़ेंगे जब तक कि उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।

आज का सबसे बड़ा और ज्वलंत प्रश्न यही है—

क्या प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा?

क्या जितेन्द्र सेन को वह सुरक्षा मिलेगी जिसका वह एक नागरिक के तौर पर हकदार है?

या फिर सिस्टम की खामोशी एक और नागरिक के जीवन को अंधकार में धकेल देगी?

वशिष्ठ वाणी इस मामले की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर रखे हुए है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे को और भी व्यापक स्तर पर उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

न्याय की प्रतीक्षा में, टीम, वशिष्ठ वाणी

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