मुंबई (वशिष्ठ वाणी): क्या म्हाडा (MHADA) के नियम और कानून केवल फाइलों तक सीमित हैं? मालवणी गेट नंबर 8, सामना नगर में जो खेल चल रहा है, उसने पूरे सरकारी सिस्टम की साख को मिट्टी में मिला दिया है। यहाँ एक तरफ जनता की सुरक्षा है, और दूसरी तरफ उप-निबंधक बी.एस. कटरे का वह अटूट ‘मौन’, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
जांच का तमाशा: जब दोषी को खुद अधिकारी बनाए ‘बेगुनाह’
पूरे सिस्टम को हिला देने वाला सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बालासाहेब भगत को म्हाडा की प्रारंभिक जांच में दोषी पाया गया था, उसे अधिकारी बी.एस. कटरे ने अचानक ‘क्लीन चिट’ कैसे दे दी?
- सिस्टम से सवाल: क्या म्हाडा में जांच रिपोर्ट अधिकारियों की मर्जी और ‘लेन-देन’ के आधार पर बदल दी जाती है?
- जब सबूत चीख-चीख कर घोटाले की गवाही दे रहे हैं, तब कटरे साहब का दोषी के प्रति यह ‘प्रेम’ पूरे विभाग को संदिग्ध बनाता है।
300 किलो की ‘मौत’ का बोर्ड और लॉक इमरजेंसी गेट
सिस्टम की विफलता की इंतहा देखिये:

जानलेवा बोर्ड: सोसाइटी के गेट पर लगा 300 किलो का भारी-भरकम ‘फेडरेशन बोर्ड’ एक बार पहले भी गिर चुका है। इसके बावजूद, अधिकारी कटरे ने दोबारा इसे लगाने की मूक सहमति दी है। क्या विभाग किसी मासूम की मौत के बाद जागेगा?
इमरजेंसी एग्जिट पर ताला: आपातकालीन रास्ते को पार्किंग माफियाओं के हवाले कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन कटरे साहब की कलम कार्रवाई के नाम पर कांपती है।


बिल्डिंग 1डी का हाल: रिहायशी इलाके को अवैध ऑटो स्टैंड बनाकर निवासियों का जीना दूभर कर दिया गया है।
शिकायतों का अंबार, पर कटरे के कान पर जूं तक नहीं रेंगती
दर्जनों रूम मालिकों ने सबूतों के साथ लिखित शिकायतें कीं, न्यूज़ पोर्टल पर खबरें चलीं, लेकिन बी.एस. कटरे ने जैसे पूरे सिस्टम को ठेंगा दिखा दिया है। यह चुप्पी साबित करती है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि एक गहरे ‘प्रशासनिक सिंडिकेट’ का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से गुहार
सामना नगर के निवासियों का अब म्हाडा के इस स्थानीय दफ्तर से भरोसा उठ चुका है। अब सवाल सीधे सरकार से है— क्या बी.एस. कटरे जैसे अधिकारी शासन के सुशासन के दावों से बड़े हो गए हैं? क्या एक दोषी अध्यक्ष को बचाने के लिए पूरे विभाग की छवि दांव पर लगाई जाएगी?
हमारी मांग:
- अधिकारी बी.एस. कटरे के निर्णयों की तत्काल Vigilance (सतर्कता विभाग) जांच हो।
- दोषी अध्यक्ष को पदमुक्त कर 300 किलो के जानलेवा बोर्ड को तुरंत हटाया जाए।
- ‘क्लीन चिट’ के खेल की उच्च स्तरीय जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो।










