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विदेशी कंपनियों की गुलामी अब और नहीं: अश्विनी वैष्णव

Indian Railways: केंद्रीय रेल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि भारत स्वदेशी इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) वाले कम से कम 25 चिपसेट पर काम कर रहा है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फिलहाल 13 ऐसी प्रोजेक्ट्स चल रही हैं, जिनकी अगुवाई सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), बेंगलुरु कर रहा है. उन्होंने कहा कि इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी का मालिकाना ‘सुरक्षा’ सुनिश्चित करते हुए हमें सर्विस नेशन से प्रोडक्ट नेशन राष्ट्र में बदलता है.

उन्होंने कहा कि तैयार हो रहे सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन में इंडिया में ही इन चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग होगी. इस गोल की ओर, सरकार देशभर में 300 से ज्यादा संगठनों में सेमीकंडक्टर डिजाइन अप्रोच के सिस्टमैटिक ऑवरहॉल प्रोसेस में है, जिसमें 250 एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और 65 स्टार्टअप शामिल हैं. आईटी मंत्रालय के अनुसार, इन कदमों का मकसद क्रिएटिविटी को इनेबल करने के युग की शुरुआत करना है. इस प्रोसेस में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण ‘भारत में डिजाइन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि ‘मेक इन इंडिया’ के अनुरूप चिप डिजाइन को लोकतांत्रिक बनाया जाएगा.

सीटूएस (C2S) प्रोग्राम का मकसद सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन में विशेषज्ञता हासिल बीटेक, एमटेक और पीएचडी लेवल पर इंडस्ट्री रेडी 85,000 मैनपावर तैयार करना है. प्रोग्राम छात्रों को चिप डिजाइन, फेब्रिकेशन और टेस्टिंग में पूरा प्रैक्टिकल अनुभव ऑफर करता है. सी-डैक में स्थापित सबसे बड़े फैसलिटी में से एक के रूप में सी2एस प्रोग्राम के तहत एक ‘चिपइन सेंटर’ (ChipIN Centre) स्थापित किया गया है, जिसका मकसद देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन कम्युनिटी के डोर-स्टेप तक चिप डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को लाना है. इस साल फरवरी में चिप डिजाइन में एक नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का उद्घाटन किया गया था, ताकि सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन इंडस्ट्री में स्किल्ड प्रोफेशनल की मांग पूरी की जा सके. चिप डिजाइन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (NIELIT) ने अपने नोएडा कैंपस में लॉन्च किया था.

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