विशेष संवाददाता, वशिष्ठ वाणी (मुंबई):
मुंबई का मालवणी पुलिस स्टेशन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 08 अक्टूबर 2026 को दर्ज FIR No. 1584/2026 में पीड़िता के साथ हुई बर्बरता के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1) जैसी गंभीर और गैर-जमानती (Non-Bailable) धारा लगाई गई थी। लेकिन हफ्ते बीत जाने के बाद भी आरोपी सलाखों के पीछे जाने के बजाय खुलेआम घूम रहे हैं।
जब पीड़िता न्याय की गुहार लेकर मालवणी पुलिस चौकी के कार्यालय पहुंची, तो वरिष्ठ अधिकारी रानीपुरी का रटा-रटाया जवाब था— “हम टेक्निकल सोचेंगे, अभी गिरफ्तारी नहीं हो सकती।”
वशिष्ठ वाणी सीधे मालवणी पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी रानीपुरी से यह तीखा सवाल पूछता है:
1. रानीपुरी जी… आपकी ‘टेक्निकल सोच’ कब खत्म होगी?
कानून की किताबों में BNS 118(1) जैसी गैर-जमानती धारा का साफ मतलब है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। फिर ऐसी कौन सी ‘टेक्निकल पढ़ाई’ है जो मालवणी पुलिस को कार्रवाई करने से रोक रही है? क्या यह ‘टेक्निकल सोच’ सिर्फ आरोपियों को समय देने और बचाने का जरिया बन चुकी है?
2. क्या पीड़िता को इंसाफ मिलेगा या बहानेबाजी ही चलती रहेगी?
लहूलुहान और बर्बरता का शिकार हुई महिला जब पुलिस के पास इंसाफ मांगने आती है, तो उसे सांत्वना देने के बजाय ‘टेक्निकल बहानों’ के जाल में क्यों उलझाया जा रहा है? क्या मालवणी पुलिस का फर्ज केवल एफआईआर के पन्नों पर दस्तखत करना है या पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाना भी उनकी जिम्मेदारी है?
3. कब होगा आरोपी गिरफ्तार?
सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से साफ हो चुका है कि आरोपी पक्ष इलाके में गुंडागर्दी करता है और उसने महिला व उनके पति को बेदर्दी से पीटा है। इसके बावजूद गिरफ्तारी न करके सिर्फ एक ‘नोटिस’ थमाना किस नियम के तहत आता है? मालवणी पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी स्पष्ट करें कि आखिर आरोपी की गिरफ्तारी का आदेश कब जारी होगा?














