‘वशिष्ठ वाणी’ ग्राउंड रिपोर्ट: गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस की मेहरबानी से सड़क बनी ‘निजी पार्किंग’, शिकायतों के बाद भी एसीपी और अधिकारी बेपरवाह
विशेष प्रतिनिधि / वशिष्ठ वाणी
मालाड वेस्ट / मुंबई: महाराष्ट्र में नई सरकार बनने के बाद सुशासन और कानून के राज का दावा तो बड़े-जोर शोर से किया जा रहा है, लेकिन मुंबई के मालाड वेस्ट स्थित न्यू लिंक रोड पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। मुख्य सड़क को बड़े-बड़े कार शोरूम, बार और रेस्टोरेंट मालिकों ने अपनी ‘निजी पार्किंग’ बना लिया है। आम जनता जाम में पिस रही है, राहगीरों का चलना दुभर हो चुका है, लेकिन गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
अब ‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल पूछती है कि आखिर जनता और मीडिया इस भ्रष्ट व लाचार सिस्टम के सामने क्या करे? क्या अवैध कब्जे हटवाने के लिए मीडिया को गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस के चरणों में जाकर बैठना पड़ेगा?
अतिक्रमणकारियों की लंबी लिस्ट: सरकारी सड़क पर किसका-किसका कब्ज़ा?
मालाड न्यू लिंक रोड पर स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि दर्जनों नामी कमर्शियल प्रतिष्ठानों ने सड़क के मुख्य हिस्से पर खुलेआम कब्जा जमा रखा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की ग्राउंड रिपोर्टिंग में इन प्रमुख जगहों पर सड़क पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की तस्वीरें उजागर हुई हैं:
- कार शोरूम्स: एमजी कार शोरूम, मोदी हुंडई, टाटा मोटर्स, विनफास्ट (VinFast) कार शोरूम, थिंकराज कार डीलर्स।
- बाइक शोरूम: टीवीएस (TVS) बाइक शोरूम।
- होटल व रेस्टोरेंट: ग्रीन्स रेस्टोरेंट, जैन सब कुछ रेस्टोरेंट, लेमन ट्री प्रीमियम होटल, फ्लैग रेस्टोरेंट एवं अन्य।
दिन हो या रात, इन प्रतिष्ठानों की गाड़ियाँ और बाइक्स सड़क पर लाइन से खड़ी रहती हैं। शिकायत के बावजूद इन्हें यहाँ से हटाने का नाम नहीं लिया जा रहा।
गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की संदिग्ध भूमिका: कार्रवाई के बजाय ‘अलर्ट’ करने का खेल!
गोरेगांव ट्रैफिक विभाग में जब से नए वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती हुई है, हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ की पड़ताल में सामने आया है कि जब भी किसी जगह की शिकायत की जाती है, तो गोरेगांव ट्रैफिक के अधिकारी या तो संबंधित शोरूम/बार मालिक को पहले ही ‘सूचित (Alert)’ कर देते हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदकर आगे निकल जाते हैं।
जब ‘वशिष्ठ वाणी’ में लगातार खबरें छपती हैं, तो खानापूर्ति करने के लिए उस जगह को छोड़कर आसपास के छोटे-मोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई का दिखावा कर दिया जाता है। लेकिन मुख्य अवैध पार्किंग करने वाले रसूखदार शोरूमों शोरूमों और बड़े रेस्टोरेंटों की गाड़ियों को हाथ तक नहीं लगाया जाता।
जब रक्षक ही भक्षक बने: शिकायत करो तो एसीपी (ACP) करने लगते हैं बचाव!
हैरानी और अफसोस की बात यह है कि जब गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के इन लापरवाह अधिकारियों की शिकायत वरिष्ठ स्तर पर की जाती है, तो एसीपी (ACP) स्तर के अधिकारी सुधार करने के बजाय अपने मातहत अधिकारी का बचाव और समर्थन करने में जुट जाते हैं।
नेता और अफ़सरशाही मिलकर सारे अधिकार और पावर अपने हाथ में समेट कर बैठ गए हैं। मीडिया को सिर्फ़ कलम चलाने की अनुमति दी गई है, वह भी सत्ता और अफ़सरों के इशारों के मुताबिक! अगर निष्पक्ष पत्रकारिता करते हुए कोई सवाल उठाए, तो सिस्टम सुधरने के बजाय और ज़्यादा आक्रामक व हठी हो जाता है।
वशिष्ठ वाणी के सीधे सवाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से:
- माननीय मुख्यमंत्री जी, जब से आपने कमान संभाली है, क्या अफसरों से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है?
- मालाड न्यू लिंक रोड से अवैध पार्किंग और सड़क पर बना कब्ज़ा हटाने के लिए जनता और मीडिया अब किसके पास जाए?
- RTO और मीडिया द्वारा सबूत दिए जाने के बाद भी आंखें मूंदकर निकलने वाले गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और उनका बचाव करने वाले एसीपी पर सख्त कार्रवाई कब होगी?












