ग्राउंड रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी न्यूज़ नेटवर्क
मालाड वेस्ट / मुंबई: मुंबई में रात के समय शांति व्यवस्था बनाए रखने और नाइटलाइफ़ के लिए तय समय-सीमा का पालन कराने की ज़िम्मेदारी जिस पुलिस प्रशासन पर है, वही अब सवालों के घेरे में खड़ा दिख रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ के हाथ लगी तस्वीरों और ग्राउंड रिपोर्टिंग में मालाड वेस्ट स्थित ‘ग्रीन्स रेस्टोरेंट’ (Greens Restaurant) की एक बड़ी पोल खुली है, जहाँ देर रात 2:30 बजे के बाद भी धड़ल्ले से ग्राहकों को सर्विस दी जा रही थी।
तस्वीरों में सच कैद: अंदर काम करते कर्मचारी, गल्ले पर बैठा शख्स
‘वशिष्ठ वाणी’ के पास मौजूद तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि देर रात 2:30 बजे के बाद भी ‘ग्रीन्स रेस्टोरेंट’ के अंदर की लाइटें जल रही थीं, स्टाफ मुस्तैदी से काम कर रहा था और गल्ले (कैश काउंटर) पर एक व्यक्ति बैठा हुआ था। यही नहीं, रेस्टोरेंट से सर्विस लेकर बाहर निकल रहे ग्राहक भी साफ नज़र आ रहे हैं।
जब आम जनता के लिए नियम और समय-सीमा तय है, तो ग्रीन्स रेस्टोरेंट के लिए यह नियम शिथिल क्यों?
गश्त लगाती रही बांगुर नगर पुलिस, चलता रहा धंधा!
सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि इस दौरान बांगुर नगर पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियाँ सड़क पर लगातार घूमती रहीं। नियम के मुताबिक पुलिस की गश्ती टीम का काम देर रात चालू ऐसे कमर्शियल प्रतिष्ठानों को तुरंत बंद करवाना और कानूनी कार्रवाई करना है। लेकिन जब पुलिस की गाड़ियाँ खुले हुए रेस्टोरेंट को देखकर भी अनदेखा कर आगे बढ़ जाएँ, तो जनता इसे “खाकी की गहरी सेटिंग” न कहे तो और क्या कहे?
बड़ा सवाल: क्या बांगुर नगर पुलिस से अच्छे संपर्क या ‘सेटिंग’ हो, तो कानून और नियमों को तोड़ने का लाइसेंस मिल जाता है?
BMC की लाचारी: “रात में हम कुछ नहीं कर सकते”
‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए देर रात ही BMC के हेल्पलाइन नंबर 1916 पर कॉल करके इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत BMC P-North वार्ड में दर्ज तो कर ली गई, लेकिन अधिकारियों का जवाब तंत्र की बेबसी को उजागर करने वाला था।
BMC अधिकारियों का कहना था कि “रात के समय वे मौके पर जाकर कोई सीधी कार्रवाई नहीं कर सकते।” ऊपर से अगले दिन दशहरा की छुट्टी होने के कारण इस शिकायत पर कोई त्वरित कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
जनता का सवाल:
- क्या बांगुर नगर क्षेत्र में पुलिस का काम सिर्फ़ गश्त का दिखावा करना रह गया है?
- क्या त्यौहारों और छुट्टियों की आड़ में नियमों की धज्जियाँ उड़ाने की खुली छूट दे दी गई है?
‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा। अब देखना यह है कि यह खबर सामने आने के बाद मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बांगुर नगर पुलिस की इस संदिग्ध कार्यशैली और ग्रीन्स रेस्टोरेंट पर क्या कार्रवाई करते हैं!












