क्या सिद्धू की ललक के आगे, आला कमान नतमस्तक होगा ?

क्या सिद्धू की ललक के आगे, आला कमान नतमस्तक होगा ?

रामस्वरूप रावतसरे

पंजाब की राजनीति में नवजोत सिंह सिद्धू की लड़ाई को जितनी इज़्ज़त आम आदमी पार्टी देती है उतनी ही कॉन्ग्रेस दे सकती है या नहीं? और यदि कॉन्ग्रेस उतनी ही इज़्ज़त देने के लिए तैयार है तो फिर कैप्टन के असंतोष को कौन इज़्ज़त देगा? यह प्रश्न बार बार सिर उठाकर सामने आ रहा है। इनकी लड़ाई का लाभ कौन सा दल उठाने की फिराक में है। जिस प्रकार के ब्यान सामने आ रहे है उसके अनुसार पंजाब कांग्रेस में कुछ बड़ा ही होने वाला है।

पंजाब प्रदेश कांग्रेस में पिछले ढाई महीने से ऐसी ही हलचल मची हुई है कि दल का राजनीतिक माहौल यात्राएँ, मीटिंग, शिकायतों और वक्तव्यों में ही सिमट कर रह गया है। पहले से ही नाराज चल रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने पिछले दो महीने से अपनी नाराजगी की स्पीड बढा दी तो हाईकमान ने उनकी नाराजगी को मापने के लिए तीन सदस्यीय टीम भेज दी। टीम ने सिद्धू के साथ मीटिंग वगैरह करके हाईकमान को रिपोर्ट सौंपी तो सिद्धू दिल्ली पहुँच गए। राहुल और प्रियंका के साथ मीटिंग होना बताया गया। सिद्धू के आने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह दिल्ली गये। उन्होंने भी नेताओं से मीटिंग करके अपना पक्ष रखा।

कॉन्ग्रेस हाईकमान के लिए यह स्थिति सुखद तो नहीं है बल्कि आम राजनीतिक पेंचों से कहीं आगे की है, जिसे सुलझाना हर बीतते दिन के साथ मुश्किल होता जा रहा है। जब तीन सदस्यीय दल पंजाब कान्ग्रेस में काफी समय से चल रहे विवाद को सुलझाने पंजाब पहुँचा था तब लगा था कि शायद किसी फॉर्मूले पर समझौता हो जाए। लेकिन जब नवजोत सिहं सिद्धू ने कहा कि उनके संघर्ष को आप पार्टी समझती है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस तथा केन्द्रिय नेतृत्व के सामने एक पेशोपेश की स्थिति बन गई है।

इसी दरम्यान समाचार आया कि सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के पद पर बैठाया जा रहा है ताकि अन्तरिक कलह को कम किया जा सके। सिद्धू पिछले कुछ दिनों से पार्टी नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने करीब 30 मौजूदा विधायकों और मंत्रियों से मुलाकात की। जिससे अपने पक्ष में मजबूत माहौल बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिहं ने कथित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सिद्धू की राज्य इकाई के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है और माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले इस कदम के खिलाफ चेतावनी दी है। कैप्टन ने कहा कि सिद्धू की संभावित पदोन्नति पुराने गार्ड( पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड ) की अनदेखी करने के समान होगी।

जानकार लोगों का कहना है कि सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच सुलह हो गई थी। दोनों के बीच सुलह का फॉर्म्युला भी तैयार कर लिया गया था, लेकिन अचानक फिर से नया विवाद सामने आ गया है। बताया जा रहा है कि राज्य के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा नहीं चाहते हैं कि सिद्धू को पंजाब की कमान दी जाए, इसलिए वह दिल्ली में उनके खिलाफ बैठक करने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस सिलसिले में सोनिया गांधी से चर्चा के लिए समय भी मांगा गया है।

इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने सोनिया गांधी को संदेश भेजा है कि नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष न बनाया जाए। सांसदों ने अपने संदेश में लिखा कि हमें सिद्धू मंजूर नहीं हैं। सांसदों ने नवजोत सिंह सिद्धू को कथित रूप से जोकर बताया। मुख्यमंत्री के आलोचक रहे पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने अमरिंदर सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब सिद्धू ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ और मुख्यमंत्री के वफादारों सहित कई अन्य विधायकों के साथ बैठकें कीं।

बताया जा रहा है कि राज्यसभा सांसद बाजवा से अब राज्य के सभी राज्यसभा और लोकसभा सदस्य मिलने पहुंच रहे हैं। मुलाकातों का यह सिलसिला पंजाब में कुछ बड़े राजनीतिक समीकरणों को लेकर है। बाजवा नहीं चाहते हैं कि सिद्धू को पंजाब की कमान दी जाए। बैठक में तय होगा कि सोनिया गांधी से बैठक का समय लेकर उनसे मांग की जाए कि सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की कमान न दी जाए।

पंजाब राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने कॉन्ग्रेस हाईकमान को यह बता दिया है कि चुनाव के शुभ अवसर पर उन्हें न केवल असंतुष्ट होने का अधिकार है बल्कि आम आदमी पार्टी को भी उनके असंतोष को इज़्ज़त देने का अधिकार है। इसके बाद कॉन्ग्रेस के लिए स्थिति लगभग स्पष्ट सी दिखती है। दल और उसके शीर्ष नेतृत्व को अब इस बात पर फैसला लेना है कि पंजाब की राजनीति में सिद्धू की लड़ाई को जितनी इज़्ज़त आम आदमी पार्टी देती है उतनी ही कॉन्ग्रेस दे सकती है या नहीं? और यदि कॉन्ग्रेस उतनी ही इज़्ज़त देने के लिए तैयार है तो फिर कैप्टन के असंतोष को कौन इज़्ज़त देगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई तीसरा दल पंजाब की राजनीति में अमरिंदर सिंह के योगदान को और अधिक इज़्ज़त देने के लिए तैयार बैठा है?

पंजाब में अत्यधिक महत्वाकांक्षा के चलते जिस प्रकार के हालात बने है। उसके अनुसार आला कमान के सामने यथास्थिति को बनाए रखना मुश्किल लग रहा है। पंजाब में जो कुछ भी होगा उसका स्पष्ट रूप से असर अन्य राज्यों में भी देखने को मिलेगा। कांग्रेस आला कमान के सामने यह अनुतरित प्रश्न है। इसलिए वह चाहती है कि पंजाब का आन्तरिक मसला सौहार्द पूर्ण वातावरण में सुलझ जाय। लेकिन नवजोत सिहं सिद्धू की ठोको ताली वाली प्रवृति शायद ही कोई समाधान होने दे।

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