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क्या अजय माकन गहलोत को मनाने तथा पायलट को समझाने में सफल होगें?

Ajay Maken Congress Party

  • रामस्वरूप रावतसरे

राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन 3 दिनों तक राजस्थान में 115 विधायक और 45 पीसीसी पदाधिकारी और अग्रिम मोर्चों के अध्यक्षों से व्यापक फीडबैक लिया हैं। माकन ने सत्ता से संगठन के बारे में और संगठन से सत्ता के बारे में ना केवल फीडबैक लिया बल्कि एक साक्षात्कार की शैली में सवाल-जवाब भी किए। माकन के अनुसार विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों से बातचीत में जो सामने आया है, उससे साफ हो गया है कि राजस्थान में गहलोत सरकार बेहतर काम कर रही है। राजस्थान के विधायक अशोक गहलोत के कामकाज से बेहद संतुष्ट हैं।

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मीडिया से बात करते हुए माकन ने कहा है कि फीडबैक ले लिया गया है, लेकिन अब सवाल है कि सरकार 2023 में सत्ता में वापस कैसे आए। माकन ने कहा है कि हमारा सौभाग्य है कि हमारे पास ऐसे लोग हैं जो सरकार में मंत्री पद पर होने के बावजूद संगठन में काम करने के लिए तैयार हैं। माकन को कई मंत्रियों ने यह कहा है कि यदि उन्हें मौका मिलेगा तो वह संगठन के लिए काम करेंगे यानी माकन ने इस बयान के जरिए यह संकेत दे दिया है कि मंत्रिमंडल विस्तार फेरबदल के साथ-साथ संगठन में भी बड़ा बदलाव हो सकता है।

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माकन के अनुसार इस फीडबैक के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार राजनीतिक एवं संगठन नियुक्तियों पर निर्णय जल्द ले लिया जाएगा, लेकिन यह फैसला कब होगा इसके बारे में माकन ने कुछ भी कहने से इंकार किया। यह तय है कि इतने बड़े और व्यापक फीडबैक के बाद माना जा रहा है कि राजस्थान में जल्द ही सत्ता और संगठन के स्तर पर बदलाव नजर आने वाला है। राजस्थान में होने वाले बदलाव में सचिन पायलट की भूमिका के सवाल पर माकन ने कहा कि किसी की भी भूमिका को लेकर कोई शक और संदेह नहीं होना चाहिए। सभी ने आलाकमान में भरोसा व्यक्त किया है। अजय माकन की अगुवाई में 3 दिन चली कवायद के बाद अब माकन के इस मंथन से अमृत और विष दोनों निकलने वाला है यानी मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के साथ साथ दिग्गज नेताओं की छुट्टी होगी। राजनीतिक और संगठन में भी नेताओं कार्यकर्ताओं को नियुक्ति का लाभ मिलेगा लेकिन कब तक, यह समय सीमा तय नहीं है।

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अजय माकन के दौरे के बाद जो बातें सामने आ रही है, उसके अनुसार गहलोत सरकार को फिलहाल किसी भी रूप में किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है। हां कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। जिनका काम काज सही नहीं है। इसके साथ इस बात का भी आभास होने लगा है कि राजस्थान में किसी प्रकार का कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, होगा भी तो उतना ही जिससे वर्तमान में जो आपसी छींटाकसी का माहौल बना हुआ हैं उस पर विराम लगे। जानकारी के अनुसार गहलोत का पिछले कुछ समय से दिल्ली नहीं जाना तथा अजय माकन के निर्देशों को अधिक तवज्जों नहीं देना इस बात का संकेत देता है कि मंत्री मण्डल और संगठन में जो कुछ भी फेरबदल होगा। उसमें गहलोत का पैमाना ही काम करेगा। एक साल पहले पायलट व गहलोत समर्थक विधायकों के मध्य एक दुसरे पर राजनीतिक दवाब बनाने की चेष्टा के चले घटनाक्रम के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री प्रियंका गांधी के मार्फत गहलोत की इच्छा के विपरीत पायलट समर्थक विधायको के कांग्रेस मे वापस लोट आने को गहलोत और उनका गुट पचा नही पा रहे है। बताया जा रहा है यही सबसे बड़ा खड्डा है जिसे अजय माकन चाह कर भी नहीं पाट पा रहे है।

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी का संकट फिलहाल कम होता नहीं दिख रहा है। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने दिल्ली जाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह बात पार्टी आलाकमान को बता दी है। राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अजय माकन और राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल ने जयपुर का दौरा किया था और विधायकों से बात की थी। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि पायलट को दिल्ली चलने के लिए मना लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट दिल्ली में एआईसीसी के साथ केंद्रीय भूमिका स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

राजनीति के पण्डितों का तो यहां तक कहना है कि गहलोत भी सचिन पायलट को केन्द्र में भेजना चाहते है। केन्द्र भी चाहता है कि सचिन पायलट केन्द्र में प्रभावशाली पद दिया जा सकता है। लेकिन पायलट राजस्थान में ही रह कर काम करना चाहते है। वो भी सम्मानजनक स्थिति में, लेकिन गहलोत इसके लिए किसी भी रूप में तैयार नहीं बताए जा रहे। मंत्रीमण्डल में सचिन और उनके गुट को लेने के सवाल पर भी गहलोत ने कहा था कि इस पर वे अपने स्तर पर विचार कर निर्णय लेंगे।

राजस्थान में सरकार के पास अभी ढाई साल है। गहलोत के काम काज से विधायक संतुष्ट है। ऐसे में आलाकमान नहीं चाहेगी कि किसी भी प्रकार का नया प्रकरण उभर कर सामने आये। यदि आलाकमान को पंजाब की तरह राजस्थान में भी तत्काल बदलाव करना होता तो अजय माकन 115 विधायक और 45 पीसीसी पदाधिकारी और अग्रिम मोर्चों के अध्यक्षों से व्यापक फीडबैक लेने का उपक्रम नहीं करते। फिलहाल अजय माकन का दिल्ली से संदेशा आने तक राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में अटकलों का जोर मानसून की तरह हिलोरें ले रहा है। कौन सत्ता संगठन की लाईन में लगेगा, कौन लाईन से हटेगा। यह आने वाला समय ही बताएगा।

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