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Mon. Apr 15th, 2024

पैसे नहीं मिले तो किन्नर ने रचा खौफनाक षड्यंत्र, कोर्ट ने दी मौत की सजा

कोर्ट

Mumbai News: बच्ची के जन्म के बाद नेग लेने पहुंचे एक किन्नर को जब घरवालों ने रुपये देने से इनकार कर दिया, तो उसने खौफनाक साजिश रची. देर रात किन्नर नवजात को घर से उठा ले गया. इसके बाद रेप कर नवजात की हत्या कर दी. कोर्ट ने दोषी किन्नर को मौत की सजा सुनाई है.

मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को 3 महीने की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में 24 साल के किन्नर को मौत की सजा सुनाई है. मामला जुलाई 2021 का है. वारदात के सामने आने के बाद पुलिस के सामने बड़ी चुनौती थी, क्योंकि न कोई सबूत मिल रहा था और न ही कोई चश्मदीद गवाह. घटना के अगले दिन पीड़ित परिवार ने जो बयान दिया, उसके आधार पर किन्नर को अरेस्ट किया गया. पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूला था. उधर, कोर्ट ने दोषी को मौत की सजा सुनाते हुए कहा कि ये मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट कैटेगरी में आता है और नरमी बरतने का कोई आधार नहीं बनता. आइए, जानते हैं कि दोषी किन्नर ने वारदात को क्यों अंजाम दिया था और पुलिस उस तक कैसे पहुंची?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में तीन महीने की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के लिए किन्नर को मौत की सजा सुनाई गई. स्पेशल कोर्ट ने 24 साल के दोषी किन्नर को रेप, हत्या, अपहरण, भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दोषी पाया. साथ ही किन्नर को सबूतों को नष्ट करने का भी दोषी पाया गया. दोषी के साथ उसके एक दोस्त को भी अरेस्ट किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में वो छूट गया. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किन्नर ने षड्यंत्र के तहत वारदात को अंजाम दिया. अपराध ऐसा है, जिससे गरीब इलाके विशेष रूप से झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली बच्चियों के हर माता-पिता की रूह कांप जाएगी.

वारदात का कोई चश्मदीद गवाह नहीं, कोर्ट ने ऐसे सुनाया फैसला

8 जुलाई, 2021 की आधी रात को हुई वारदात का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था. मामला कोर्ट में जाने के बाद सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें परिवार और दो पड़ोसियों की गवाही भी शामिल थी. गवाही में पीड़ित परिवार और उनके पड़ोसियों ने दावा किया था कि उन्होंने किन्नर को रात दो बजे कंधे पर ‘बंडल’ ले जाते देखा था, शायद उसके कंधे पर बच्ची ही थी.

बच्ची की दादी के मुताबिक, घटना के कुछ दिन पहले दोषी किन्नर कन्हैया उर्फ कन्नू चौगुले  अपने दोस्त सोनू काले उनके घर आया. इस दौरान नवजात बच्ची को आशीर्वाद देने के लिए नेग के रूप में एक साड़ी, नारियल और 1100 रुपये समेत अन्य चीजें मांगी. बच्ची के दादी ने कहा कि लॉकडाउन का समय है, इसलिए नेग में इतना ज्यादा सामान नहीं दे पाऊंगी. आरोप है कि इसके बाद किन्नर और उसके दोस्त ने धमकी दी कि अगले 5-6 दिनों में वे कुछ ऐसा करेंगे, जिससे सनसनी फैल जाएगी.

कोर्ट में पेश दलीलों के अनुसार, 8 जुलाई 2021 को बच्ची की मां ने रात करीब साढ़े 9 बजे सुला दिया. चूंकि उस दौरान गर्मी का समय था, इसलिए अपने घर का दरवाजा खुला छोड़ दिया ताकि हवा आती रहे. रात करीब पीड़ित बच्ची की मां उठी और उसे दूध पिलाकर फिर सुला दिया. रात करीब 3 बजे जब बच्ची की मां उठी, तो उसने नवजात को गायब पाया. इसके बाद पीड़ित परिवार ने इलाके में बच्ची की तलाश शुरू की और फिर पुलिस से संपर्क किया.

अगले दिन, जब पुलिस जांच पड़ताल के लिए पहुंची तो पीड़ित परिवार ने बयान में किन्नर की ओर से धमकी समेत पूरी घटना का जिक्र किया. बयान के बाद पुलिस ने किन्नर और उसके साथी से पूछताछ की और दावा किया कि दोनों पुलिस को उस जगह पर ले गए, जहां 3 महीने की बच्ची की हत्या कर शव को फेंका गया था. पुलिस ने दावा किया कि मेडिकल सबूतों से पता चला कि बच्ची के साथ बलात्कार किया गया, फिर सबूत मिटाने के लिए उसे दलदली इलाके में फेंक दिया गया, जहां वह डूब गई और उसकी मौत हो गई.

कोर्ट ने अपने फैसले में और क्या कहा?

स्पेशल POCSO जज अदिति उदय कदम ने कहा कि आरोपी के कृत्य से अत्यधिक क्रूरता झलकती है. किन्नर को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि मामला स्पष्ट रूप से दुर्लभतम श्रेणी में आता है और नरमी दिखाने का कोई आधार नहीं है. दोषी ने 3 महीने की बच्ची की हत्या की, जबकि पीड़ित परिवार से उसकी कोई दुश्मनी नहीं थी. उधर, पुलिस ने कहा कि दोषी की ओर से वारदात को अंजाम देने का मकसद आसपास के क्षेत्र में आतंक पैदा करना था, ताकि कोई भी उसे नेग देने से इनकार करने की हिम्मत न कर सके. 

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