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सरकार ने साढे़ पांच माह बाद भी राज्यपाल को बजट सत्र खत्म करने की फाइल नहीं भेजी

rajasthan assembly budget session
9 सितंबर से विधानसभा की बैठक होगी पुनः शुरू

  • वरिष्ठ पत्रकार रामस्वरूप रावतसरे

जयपुरः प्रदेश में पहली बार विधानसभा के बजट सत्र को खत्म किए बिना साढे़ पांच माह बाद फिर से विधानसभा की कार्यवाही शुरू होगी। सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र का सत्रावसान करवाने के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र के पास फाइल ही नहीं भेजी। प्रदेश के संसदीय इतिहास में यह पहली बार है, जब विधानसभा के बजट सत्र का 5 महीने से ज्यादा समय से सत्रावसान नहीं हुआ। उसकी निरंतरता में ही विधानसभा की बैठक का समय तय कर दिया गया।

ससंदीय परंपरा तोड़ने पर अब भाजपा ने सवाल उठाए हैं। इसके पीछे पिछले साल सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद विधानसभा सत्र बुलाए जाने पर राज्यपाल और सरकार के बीच हुए टकराव को कारण बताया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही 18 मार्च 21 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की थी। 6 महीने के भीतर एक बार विधानसभा की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है। इस हिसाब से 18 सितंबर 21 तक विधानसभा की बैठक बुलाना अनिवार्य है। विधानसभा की अगली बैठक अब 9 सितंबर 21 को होगी। अब तक विधानसभा के बजट सत्र सहित हर सत्र की कार्यवाही खत्म होने के दो महीने के भीतर सत्रावसान कर दिया जाता था। इस बार 18 मार्च 21 को ही बजट सत्र का काम पूरा हो गया था, परम्परा के अनुसारविधान सभा सत्रावसान की पत्रावली राज्यपाल के पास भेजी जानी चाहिये थी, लेकिन यह परंपरा तोड़ दी गई। सरकार ने पिछले साल मानसून सत्र के बाद से सत्रावसान की फाइल को देरी से राजभवन भेजना शुरू किया। इस बार तो सत्रावसान की फाइल ही नहीं भेजी। पायलट खेमे की बगावत के वक्त राज्यपाल ने अचानक विधानसभा सत्र बुलाने की मंजूरी नहीं दी थी।

सचिन पायलट गुट की बगावत के वक्त विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर सरकार और राज्यपाल के बीच जमकर टकराव हुआ था। सरकार 31 जुलाई 2020 से पहले विधानसभा सत्र बुलाना चाहती थी, इसके लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर फाइल राज्यपाल को भेजी थी। राज्यपाल ने 21 दिन पहले नोटिस देकर अचानक सत्र बुलाने का कारण पूछते हुए फाइल लौटा दी थी। इसके बाद सरकार ने तीन बार राजभवन फाइल भेजी, तीनों बार फाइल लौटा दी। मुख्यमंत्री सहित उनके समर्थक कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों ने राजभवन में धरना दिया और नारेबाजी की। इसके बाद राज्यपाल ने 14 अगस्त 2020 से विधानसभा सत्र बुलाने की फाइल को मंजूरी दी थी।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र का सत्रावसान करने के लिए राज्य सरकार ने फाइल राजभवन ही नहीं भेजी। राज्य सरकार राज्यपाल के अधिकारों का अतिक्रमण कर रही है। अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ। यह लोकतंत्र का अपमान है। संविधान के आर्टिकल 174 में साफ प्रावधान है, इसके बावजूद सरकार ने राज्यपाल के अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए फाइल नहीं भेजी।

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