जिम्मेदारों का बाहें चढ़ाकर बात करना

जिम्मेदारों का बाहें चढ़ाकर बात करना

Ramswaroop Rawatsare
रामस्वरूप रावतसरे लेखक

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे का छत्तीस का आंकड़ा सीधा ही नहीं हो पाया था कि विधायक हेमाराम चैधरी ने मंत्रियों एवं सरकारी काम काज से परेशान हो कर गत दिनों इस्तीफा दे दिया था। जो बताया जा रहा है कि कई प्रकार के प्रयासों के बाद भी वापिस नहीं हो पाया है। अब सरकार के दो मंत्रियों की आपसी खींचतान ने सियासी हल्कों के साथ साथ पार्टी की चिंता और बढ़ा दी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मंत्री परिषद की बैठक उनके निवास स्थान पर थी। नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के बीच हुई तीखी नौक-झौंक ने राजस्थान की सीमांऐ लांघ कर दिल्ली तक हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच हुए तूं तूं मैं मैं के प्रजातान्त्रिक विवाद को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने रिपोर्ट तलब की है।

जानकारी के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं पर फैसले के लिए बुलाई गई कैबिनेट की बैठक में कई मंत्री सी एम निवास पर गए थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत निवास में होते हुए भी बैठक से वर्चुअल जुड़े थे। बैठक के मुख्य एजेंडों पर चर्चा के बाद राजनीतिक मामलों पर चर्चा के वक्त डोटासरा को धारीवाल के बीच में टोकने पर बात बिगड़ी। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बैठक में कहा कि कांग्रेस ने फ्री वैक्सीनेशन की मांग करते हुए सोशल मीडिया कैंपेन चलाया है। अब हर जिला स्तर पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देना चाहिए, इस अभियान को ग्राउंड पर भी उतारने की जरूरत है। बताया जा रहा है। डोटासरा के इतना कहते ही मंत्री शांति धारीवाल ने डोटासरा की बात काटते हुए कहा कि इसकी क्या जरूरत है, मंत्रियों का काम कलक्टरों को ज्ञापन देने का नहीं है।

डोटासरा ने बीच में टोकने पर आपत्ति जताई तो धारीवाल भी अड़ गए और कहा कि मैं अपनी बात रखूंगा। इस पर दोनों में खूब बहस हुई। बात तू-तू मैं-मैं तक पहुंच गई। राजस्व मंत्री हरीश चैधरी और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बीच-बचाव किया, लेकिन वे नहीं माने। गोविंद सिंह डोटासरा ने शांति धारीवाल के टोकने से नाराज होकर मुख्यमंत्री से शिकायती लहजे में कहा कि आपके सामने सब कुछ हुआ है।

पार्टी संगठन के मुद्दे पर बात हुई तो अध्यक्ष को बोलने तक नहीं दिया जा रहा, इस तरह के बर्ताव पर कार्रवाई होनी चाहिए। डोटासरा बैठक से जाने को तैयार हो गए। बताया जा रहा है कि सी एम ने उन्हें शांत करवाते हुए अपनी बात पूरी करने को कहा।

डोटासरा और धारीवाल के बीच अक्टूबर 2020 में भी सीएम निवास पर शहरी निकाय चुनाव में टिकटों को लेकर भी भिड़ंत हो गई थी। कैबिनेट की बैठक और उसके बाद जिस तरह की तनातनी हुई वह अभूतपूर्व बताई जा रही है। दोनों मंत्रियों के इस झगड़े की सियासी हलकों में खूब चर्चा है।

शांति धारीवाल गहलोत सरकार के सबसे पावरफुल मंत्री माने जाते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और शहरी विकास के कामों में गहलोत के तीन कार्यकाल में धारीवाल ही सर्वेसर्वा रहे हैं। विधानसभा में ट्रबल शूटर की भूमिका में भी गहलोत धारीवाल को ही आगे रखते आए हैं। विधानसभा में कई बार ऐसे मौके आए। जब धारीवाल स्पीकर से ही उलझ पड़े हैं।

जानकार लोगों का कहना है कि संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच कांग्रेस के कार्यक्रमों को मजबूती से रखने की गोविंद सिंह डोटासरा की मंशा को शांति धारीवाल ने दरकिनार करते हुए। प्रदेश अध्यक्ष के आदेशों की अवहेलना कर उन्होंने यह बता दिया कि राजस्थान में मंत्रियों में अगर कोई सबसे पावरफुल है तो वही है और अनुभव और उम्र के इस मोड़ पर उन्हें कोई अध्यक्ष दिशा निर्देश दें यह संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के खेमों के बीच जारी खींचतान का दायरा बढ़ गया है। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सियासी कुनबे में ही कलह खुलकर सामने आने लग गई है। गहलोत सरकार के आधे मंत्रियों की आपस में नहीं बनती, यह बात किसी से अब छुपी नहीं है। गहलोत सरकार में अभी 10 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्री मिलाकर कुल 20 मंत्री हैं। बताया जा रहा है कि 20 में से 10 मंत्रियों की आपस में नहीं बनती। कुछ के बीच मनमुटाव की खाई इतनी गहरी है कि बातचीत तक बंद है।

धारीवाल-डोटासरा की लड़ाई सावर्जनिक हो गई है। धारीवाल-प्रमोद जैन भाया में पुरानी तकरार अब भी बरकरार बताई जा रही है। धारीवाल और खाचरियावास में खींचतान है। डोटासरा और खाचरियावास के बीच शुरू से मतभेद होना बताया जा रहा है। हरीश चैधरी और सालेह मोहम्मद के बीच स्थानीय राजनीति को लेकर अनबन है। रघु शर्मा और सुभाष गर्ग के बीच भी मतभेदों के कारण विभागीय काम नहीं हो रहे है बताए जा रहे है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, गहलोत के मंत्रियों में झगड़े की जड़ में कांग्रेस के पुराने सिस्टम में रचे-बसे मंत्रियों की नए नेताओं से नहीं बन रही।

यह भी बताया जा रहा है कि सत्ता और संगठन में तालमेल ही नहीं है। सत्ता में बैठे लोग संगठन को महत्व नहीं दे रहे है। ऐसे में किस प्रकार यह उम्मिद की जा सकती है कि सरकारी काम काज सही तरीके से हो रहा है। जनता कोरोना के कारण लाॅकडाउन में बन्द है, मंत्रियों की तूं तूं मैं मैं समाचारों की सुर्खियां बन रही है। यह घटना क्रम राजस्थान की जनता में किस प्रकार का संदेश दे रहा है। इस समय आपसी खंीच तान किसी के लिए भी हितकर नहीं है। एक जुटता का संदेश ही सत्ता ,संगठन व जनता में संजीवनी का काम करेगा। इस पर विचार करते हुए जिम्मेदारों को काम करना चाहिए।

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