सिस्टम में सुधार की जरूरत

सिस्टम में सुधार की जरूरत

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Editor Anil Kumar Mishra
अनिल कुमार मिश्रा
चेयरमैन एवं प्रधान संपादक

हान संस्कृति, संस्कार, सभ्यताओं और परंपराओं के इस देश का परम् सौभाग्य है कि 800 वर्षों की लूट-खसोट, गुलामी और 66 वर्षों तक मायावी कालनेमियों के चंगुल के बाद आप प्रधानसेवक की भूमिका में आए, अकल्पनीय कार्य, साहसिक बदलाव भी हुआ। देश में बहुप्रतीक्षित आशा का संचार हुआ।

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लेकिन सिस्टम में आज भी नकारात्मक प्रवृत्तियों का बोलबाला है जो सत्तर सालों से चला आ रहा है, इनकी नकारात्मक प्रवृत्तियों का शिकार आम जनता को होना पड़ रहा है और बदनामी सरकार की हो रही है जिससे मायावी कालनेमियों को मौका मिल रहा है जनता में भ्रम फैलाने का जिसमें कुछ ऊटपटांग बोलने वाले आपके सहयोगियों का भी साथ है।

आप के नोटबंदी से लेकर अब तक जितने भी देशहित में कार्य हुए सिस्टम ने कियेकराये पर पानी फेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, वो तो आपके प्रति जनता का विश्वास ही है कि बहुतायत जन आज भी आपके साथ खड़े है।

आज जनता को सरकार से ज्यादा सिस्टम से शिकायत है। इस कोविड महामारी के दौर में भी दवा, आक्सीजन, अस्पताल, एम्बुलेंस, कालाबाजारी और तमाम उत्पीड़न से लोग त्राहि त्राहि करने लगे लेकिन सिस्टम मूकदर्शक बना रहा। विरोधी भी जनता के कंधे पर बंदूक रखकर सरकार को कोसने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वैक्सीनेशन को लेकर ऊहापोह की स्थिति के बाद लोगों की जागरूकता बढ़ी तो फिर सिस्टम फेल हो गया। पहले डोज के बाद दुसरा डोज “पहले 28 दिन बाद, फिर 42 दिन बाद, फिर 84 दिन बाद”। अब जिन्होंने 28, 42 दिन में दुसरा डोज लिया और जिन्होंने नहीं लिया अब वो असमंजस में है कि जो पहले लिया वह सही है कि जो 84 दिन बाद लगेगा वह सही है । 45+ दूसरी डोज के लिए पहले रजिस्ट्रेशन नहीं था फिर रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया फिर रजिस्ट्रेशन हटा दिया। “18+ में नजदीकी बुथ पिन कोड के हिसाब से बुक करना था यहां भी सिस्टम की लापरवाही से लोग परेशान हैं। एक ही पिन कोड पर एक बुथ सही है तो दुसरा बुथ उसी पिन कोड पर 20 कि.मी. दूर है जबकि दूर वाले बुथ का पिन कोड गलत है जबकि उसका सही पिन कोड कुछ और है। अपने सुरक्षा और लाकडाउन की वजह से किसी तरह लोग घर से निकल रहे है लेकिन परेशान हो वापस आकर फिर दुबारा जाने से कतरा रहे हैं।

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प्रधानमंत्री महोदय देश हित में आपकी सरकार का रहना आवश्यक है। लेकिन इसके लिए प्रथम आपको सिस्टम की नकेल कसते हुए उसकी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी ताकि वहां बैठे लोगों के दिल में भी डर बनें कि कुछ ग़लत हुआ तो परिणाम भुगतना पड़ेगा।

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