बुलेट ट्रेन दौड़ाने को मंडुआडीह- प्रयागराज रूट पर भूमि अधिग्रहण की तैयारी, राजातालाब में सर्वे शुरू

बुलेट ट्रेन दौड़ाने को मंडुआडीह- प्रयागराज रूट पर भूमि अधिग्रहण की तैयारी, राजातालाब में सर्वे शुरू

  • कॉरिडोर को लेकर भूमि अधिग्रहण की तैयारियां भी जोर पकड़ने लगी है
  • बुलेट ट्रेन मोदी सरकार का है ड्रीम प्रोजेक्ट,
  • दिल्ली से वाराणसी की दूरी 800 किलोमीटर है लेकिन यह सफर महज 3 घंटे में पूरा होगा,

रिपोर्टर राजकुमार गुप्ता

वाराणसी/रोहनियां: पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी को जल्द ही बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने वाली है। वाराणसी से नई दिल्ली का सफर मात्र 3 घंटे में पूरा होगा। खास बात है कि यह ट्रेन प्रदेश की राजधानी लखनऊ होते हुए जाएगा। इससे वाराणसी से लखनऊ जाने वाले यात्रियों को भी बेहद सहुलियत होगी।


वाराणसी से नई दिल्ली की दूरी है लगभग 800 किलोमीटर
है। आम तौर पर इस रूट पर चलने वाली ट्रेन 7 से 8 घंटे में वाराणसी से नई दिल्ली की दूरी तय करती है। जबकि बुलेट ट्रेन सिर्फ 3 घंटे में आपको नई दिल्ली से वाराणसी या फिर वाराणसी ने नई दिल्ली पहुंचा देगी।

अयोध्या-मथुरा होकर भी गुजरेगी नई दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन

दिल्ली से वाराणसी चलने वाली बुलेट ट्रेन से लोग अयोध्या भी जा सकेंगे.
वाराणसी-नई दिल्ली रूट पर प्रस्तावित बुलेट ट्रेन वाराणसी से नई दिल्ली का सफर महज 3 घंटे में तय होगा। 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन चलेगी।


वहीं कॉरिडोर को लेकर भूमि अधिग्रहण की तैयारियां भी जोर पकड़ने लगी है। वाराणसी से नई दिल्ली के बीच बुलेट ट्रेन चलने से व्यापारिक और पर्यटन की दृष्टि से काफी बेहतर हो जाएगा। यात्रियों को सहूलियत मिलने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


अक्टूबर 2020 में रेल मंत्रालय ने दी थी हरी झंडी
वाराणसी-दिल्ली के बीच हाई स्पीड ट्रेन को 29 अक्टूबर को रेल मंत्रालय ने हरी झंडी दी थी। ये हाई स्पीड ट्रेन देश की राजधानी से सांस्कृतिक राजधानी काशी सहित यूपी के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा।

केंद्र सरकार की योजनाओं में शामिल हाई स्पीड बुलेट ट्रेन के संचालन की कवायद अब उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद स्थित मंडुआडीह-प्रयागराज रूट पर भी शुरू हो गई। विगत कुछ दिनों से हाई स्पीड रेल विकास लिमिटेड के कर्मचारियों ने वाराणसी जनपद चके राजातालाब तहसील क्षेत्र के गांवों का सर्वे किया। सर्वे शुरू होने से भवन स्वामियों और किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

सर्वे कर्मचारी खसरा-खतौनी लेकर एक-एक भवन स्वामियों और किसानों के यहां दस्तक देते हुए बता रहे हैं कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में काफी बदलाव होगा। इस दौरान बताया कि रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले परिवारों की चिंता रेल प्रशासन को है। वहीं इसकी जद में आने वालों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ी है कि तीन वर्ष से चल रहे दोहरीकरण-विद्युतीकरण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका अब एक और अतिरिक्त व्यवस्था की पहल शुरू कर दी गई।


पहले चरण में अधिग्रहण होने वाली जमीनों का चिह्नांकन
सर्वे टीम में शामिल लोगों ने बताया कि पहले चरण में वह अधिग्रहण होने वाली जमीनों का चिह्नांकन कर स्वामित्व से आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी जमा करा रहे हैं। बताया कि दूसरे चरण में पूर्व में छोड़ी गई रेलवे जमीन की सीमा से उत्तरी एवं दक्षिणी तरफ 20-20 मीटर जमीन अधिग्रहण किए जाएंगे। अभी कुछ किसानों ने अपने कागज जमा किए हैं लेकिन कुछ ने एक सप्ताह बाद देने का आश्वासन दिया है।


सर्वे टीम की माने तो पूरी होने वाली औपचारिकताएं सही हैं। जमीन अधिग्रहण के बाद ट्रैक के दोनों छोर पर दीवारों का निर्माण होगा। इसके साथ ही दीवार बनने से मानवीय और वन्य जीवों के साथ होने वाले हादसों को रोका जा सकेगा।

800 किमी. का होगा कॉरिडोर

प्रस्‍तावित वाराणसी-दिल्‍ली हाई स्‍पीड कॉरिडोर की संभावित लंबाई लगभग 800 किलोमीटर तय की गई है। इसमें घनी आबादी वाले शहरी और ग्रामीण इलाकों के साथ हाईवे, नदियों के साथ ग्रीन फील्‍ड भी शामिल है। नेशनल हाई स्‍पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कॉरिडोर का जो मॉडल तैयार किया है उसमें सिर्फ हाई स्‍पीड वाली ट्रेन ही चलेगी। घनी आबादी के कारण भूमि अधिग्रहण में आने वाली मुश्किलों को देखते हुए और सुरक्षित परिचालन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का प्‍लान है। जेवर एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना के तहत सिर्फ वहां पर कॉरिडोर को अंडरग्राउंड किया जा सकता है। बाकी कॉरिडोर में कहीं और सड़क मार्ग या जमीन से सीधे जुड़ाव नहीं होगा। नदियों पर विशेष तौर पर एलिवेटेड पुल भी तैयार होंगे।

कहां बनाए जाएंगे स्टेशन

दिल्ली से वाराणसी तक हाईस्पीड रेल के लिए नोएडा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, अयोध्या, प्रयागराज, भदोही में स्टेशन बनाए जाएंगे. बता दें कि यमुना एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायु सेना के फाइटर प्लेन भी उतारे जा चुके हैं और यहां से उड़ान भी भर चुके हैं. अब यदि बुलेट ट्रेन के लिए कॉरिडोर का निर्माण भी इस एक्सप्रेसवे पर कराए जाने को हरी झंडी मिलती है तो यह मल्टीपरपज यूटिलिटी बनकर उभरेगा. इस परियोजना के लिए डीपीआर रेल मंत्रालय को पिछले साल अक्टूबर में ही मिल चुकी है.

क्या जरूरी है एलिवेटेड कॉरीडोर

एलिवेटेड कॉरीडोर पुल की तरह होता है। वैसे इसे उन इलाकों में प्राथमिकता दी जाती है, जहां घनी आबादी के कारण भूमि अधिग्रहण मुश्किल होता है।
जमीन अधिग्रहण कर अधिक धनराशि खर्च करने से भी बचा जा सकेगा। पिलर वाले स्थानों के लिए ही भूमि अधिग्रहित होगी।


शहरों में अंडर ग्राउंड व ओवर हेड चलेगी
बुलेट ट्रेन शहरों में अंडर ग्राउंड व ओवर हेड चलेगी। जबकि हाइवे व एक्सप्रेस वे के किनारे यह जमीन पर चेलेगी। इससे जुड़े एक अधिकारी ने बताया शहरों में जहाँ ज्यादा घनी आवादी व बिल्डिंग है वहाँ अंडर ग्राउंड बनाने की योजना है। जबकि जहां ज्यादा चौड़ी रोड हैं वहां ओवरहेड चेलेगी। पूरे कारिडोर के सर्वे का काम एक वर्ष में पूरा हो जाएगा। इसके बाद टेंडर व अन्य प्रक्रिया पूरी कर दो वर्षों के भीतर निर्माण शुरू हो जाएगा।

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