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विशाल भारत संस्थान की प्रेरणा से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महिलाओं का बढ़ा कदम

विशाल भारत संस्थान

विशाल भारत संस्थान की प्रेरणा से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महिलाओं का बढ़ा कदम

  • महेश पाण्डेय ब्यूरो चीफ

माँ जानकी रसोई सहायता समूह का हुआ उद्घाटन

• महिलाओं ने नारा दिया ‘खेत से रसोई तक’ सीधे पहुंचेगी रसोई की खाद्य सामग्री।
• खेतों की ताजगी के साथ सब्जी पहुंचायेंगी महिलायें।
• रसोई में उपयोग होने वाली सभी वस्तुओं को यह समूह उपलब्ध करायेगा।
• ऑनलाईन करेंगी।
• व्हाट्सएप्प ग्रुप से रसोई की आवश्यकता प्रतिदिन शाम को 7 बजे से 9 बजे तक नोट की जायेगी और सुबह 7 बजे से 9 बजे तक वस्तुएं रसोई में पहुंच जायेगी।
• विशाल भारत संस्थान ने लमही गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारपरक बनाने के लिये समूह को प्रायोजित किया।
• समूह ने खेत की ताजी सब्जी, शुद्ध तेल, शुद्ध हल्दी, जैविक एवं घरेलू खाद से उगायी गयी सब्जी की गारंटी।
• यह समूह प्रतिदिन बेहतर गुणवत्ता वाली सुरक्षित सब्जी रसोई तक पहुंचायेगा।
• खेत से सीधे रसोई तक पहुंचाने की गारंटी।
• रसोई में सामग्री की शुद्धता और लोगों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखेगा यह समूह।
• वैदिक काल में रसोई को औषधालय कहा जाता था, जिसके खान-पान से लोग स्वस्थ्य व ठीक होते थे।
• समूह मिलावट खोरों और काला बाजारी करने वालों को देगी चुनौती।

Youtube sansadvani

वाराणसी: कोविड संकट ने बहुतों का रोजगार छीनकर भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है, लेकिन उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द के गांव की महिलाओं ने कोविड संकट के आगे घुटने टेकने से इंकार कर दिया। महिलाओं के बुलन्द हौसलों को उड़ान दिया विशाल भारत संस्थान ने। विशाल भारत संस्थान ने महिलाओं के लिये ‘माँ जानकी रसोई सहायता समूह’ का गठन किया और 5 हजार रूपये की सूक्ष्म सहायता उपलब्ध करायी। विशाल भारत संस्थान की प्रेरणा से बने अपने तरह के अनोखे समूह ने फैसला किया कि रसोई में उपयोग होने वाली खान-पान की वस्तुओं को शुद्धता, गुणवत्ता और जैविक खेती की कसौटी पर कसकर ही उपलब्ध कराया जायेगा। माँ जानकी रसोई सहायता समूह में महिलायें ही खेती से लेकर रसोई तक पहुंचाने का काम करेंगी। खान-पान में खराब वस्तुओं और पेस्टिसाइट के उपयोग ने रसोई का स्वास्थ्य खराब कर दिया है। अब महिलायें शुद्ध और ताजी सब्जी घर-घर तक आवश्यकतानुसार पहुंचायेंगी। यह महिला समूह रसोई को वैदिक रसोई (औषधालय) के रूप में तबदील करेगा, ताकि लोग खान-पान से स्वस्थ्य रह सकें और उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके।

सोशल मीडिया और मोबाईल का इस्तेमाल करके उपभोक्ताओं तक शुद्धता की गारंटी के साथ रसोई में उपयोग होने वाली सारी वस्तुओं को रसोई तक पहुंचायेंगी, साथ ही रसोई के लिये प्रशिक्षित रसोईयां भी तैयार करेंगी ताकि जरूरत पड़ने पर घर जाकर भी शुद्ध, स्वादिष्ट भोजन बना सकें। महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर अपने कदम अपने हौसलों के साथ बढ़ाये हैं। प्रतिदिन शाम 7 बजे से 9 बजे तक इस समूह के प्रभारी के पास अपनी आवश्यकता नोट करानी है और सुबह 7 बजे से 9 बजे तक रसोई तक सब्जी से लेकर खाद्य सामग्री पहुंचा दी जायेगी।

माँ जानकी रसोई सहायता समूह का ऑनलाईन उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने नई दिल्ली से किया। समूह की सलाहकार नाजनीन अंसारी, प्रभारी सरोज देवी, रसोई तक पहुंचाने की जिम्मेदारी गीता देवी को दी गयी।

मुख्य अतिथि पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी एवं इंडियन बैंक के मुख्य प्रबंधक ज्ञान प्रकाश जी ने समूह के प्रभारी को 5 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की ताकि ये अपना ताजी शुद्ध सब्जी के रसोई तक पहुंचाने का स्वरोजगार खड़ा कर सकें।

उद्घाटनकर्ता इन्द्रेश कुमार ने कहा कि माँ जानकी रसोई सहायता समूह हमारी रसोई की शद्धता को वैदिक संस्कृति से जोड़ेगा ताकि हम जो भी ग्रहण करें वह पूरी तरह शुद्ध हो और स्वदेशी हो। जल्द ही इन महिलाओं को मदद करके समूह के लिये भंडारण गृह की व्यवस्था की जायेगी ताकि वहां से रसोई हेतु शुद्ध अन्न भी उपलब्ध हो सके। महिलायें सिर्फ अपने लिये रोजगार की व्यवस्था नहीं कर रहीं बल्कि रसोई की शुद्धता के माध्यम से सबके स्वास्थ्य और प्रतिरोधक क्षमता का भी ध्यान रख रही हैं। लमही की महिलायें उन लोगों के लिये आदर्श प्रस्तुत करेंगी जो कोविड संकट काल के दौरान बेरोजगार हो गये हैं। जल्द ही लमही की महिलायें अपने हौंसले के बल पर भारत भर में नाम रौशन करेंगी।

अध्यक्षता कर रहे महंत बालक दास जी ने कहा कि महिलायें किसी की दया की पात्र नहीं। इनकी मेहनत इनकी तकदीर लिखेगी। साथ ही लोगों को श्रेष्ठ अन्न प्राप्त होगा।

विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डा० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि ऑनलाईन मांग पर रसोई तक खेतों की ताजगी के साथ शुद्ध जैविक सब्जी का पहुंचना स्वास्थ्य के लिये मील का पत्थर साबित होगा। जो महिलायें छोटी सब्जी की खेती करती हैं उनके लिये एक बेहतर मंच है। आत्मनिर्भर बनना ही इनका उद्देश्य नहीं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना, रसोई के बजट का ध्यान रखना और शुद्धता की गारंटी भी इनका मकसद है। ऑनलाईन मांग पर रसोई में उनके मनोनुकुल खाद्य सामग्री और सब्जी पहुंचायी जायेगी। यह काम सिर्फ महिलायें ही करेंगी। यह समूह मिलावट खोरों और काला बाजारी करने वालों को भी चुनौती देगी।

इस कार्यक्रम का संचालन अर्चना भारतवंशी ने किया। कार्यक्रम में नजमा परवीन, डा० मृदुला जायसवाल, खुशी रमन भारतवंशी, रूचि सिंह, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी आदि लोगों ने भाग लिया।

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