गीता, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के संवाहक थे सोमगिरीजी

गीता, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के संवाहक थे सोमगिरीजी

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Somagiriji was the conductor of Gita, spirituality and Indian culture.
चिरसमाधिष्ठ संवित
सोमगिरीजी महाराज

मानव प्रबोधन प्रन्यास तथा शिवबाड़ी मठ बीकानेर के अधिष्ठाता संवित सोमगिरीजी महाराज के पूर्णसमाधिष्ठ हो जाने पर गायत्री शक्तिपीठ द्वारा वर्चुअल माध्यम से अध्यात्मिक वातावरण से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

समन्वय व सहयोग की जीवट प्रतिमूर्ति थे सोमगिरीजी

गायत्री शक्तिपीठ ट्रस्ट मंडल के सदस्य देवेन्द्र सारस्वत ने बताया कि महामारी से पूर्व संवित सोमगिरीजी महाराज द्वारा गीता प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता रहा है वहीं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित किया जाता रहा है।

गायत्री शक्तिपीठ द्वारा वर्चुअल माध्यम से श्रद्धांजलि

दोनों परिक्षाओं की दिनांक समान न हो इसके लिए वे गीता प्रतियोगिता की तारीख कार्यक्रम निर्धारित करते थे। ऐसी समन्वय व सहयोग की विलक्षण प्रतिमूर्ति थे सोमगिरीजी महाराज।

गायत्री परिवार जिला समन्वयक करनीदान चौधरी ने कहा कि सोमगिरीजी महाराज के जीवन से सतत सक्रिय रहने की प्रेरणा ली जानी चाहिए। मुख्य प्रबंध ट्रस्टी पवन ओझा ने कहा कि विद्वान की विनम्रता को जीवन व्यवहार में उतारने की विद्या सोमगिरीजी के जीवनकाल से सहज ही सीखा जा सकता है।

सहप्रबंध ट्रस्टी इंजीनियर अमरसिंह वर्मा ने बताया कि अभियांत्रिकी विद्यार्थी के व्यक्ति द्वारा अध्यात्म की अभियांत्रिकी को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने के पथप्रदर्शक के रुप में संवित सोमगिरीजी महाराज को सदैव याद किया जाता रहेगा।

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स्थाई समाधिष्ठ संवित सोमगिरीजी महाराज को अविनाश गोयल, भारतभूषण गुप्ता, रामकुमार चौहान, मधुबाला शर्मा, बीना पुंजानी, शोभा सारस्वत, प्रवीण तंवर, योगाचार्य शिवकुमार शर्मा, कमल गुप्ता, कौशल कुमार तथा राजकुमार गोगिया द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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