विधानसभा चुनाव नतीजों में छिपे भविष्य के संकेत

विधानसभा चुनाव नतीजों में छिपे भविष्य के संकेत

Epaper Vashishtha Vani
rajesh-maheshwari-journalist
लेखक
राजेश माहेश्वरी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2 मई को मतगणना के साथ संपन्न हो गए। एग्जिट पोल में जो नतीजे बताए जा रहे थे, लगभग वैसे ही आखिरी नतीजे भी सामने आए। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों को क्या भविष्य का कोई संकेत माना जा सकता है, ये बड़ा सवाल है? पांच राज्यों में सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल की रही। भाजपा ने अपनी अधिकतम ताकत पश्चिम बंगाल को फतह करने में लगा दी थी। वो अलग बात है कि उसके विधायकों की संख्या बढ़ गई। ममता बनर्जी हालांकि स्वयं नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव हार गईं पर उनकी पार्टी तीसरी बार अच्छे बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने में कामयाब रही। वही तमिलनाडु में पहली बार बड़े कद्दावर राजनेताओं की अनुपस्थिति में लड़े गये चुनाव में स्टालिन को करुणानिधि की विरासत का लाभ मिला। एआईएडीएमके में वर्चस्व की लड़ाई मतदाताओं में विश्वास जगाने में विफल रही। असम में भाजपा की प्रभावी जीत में जहां पार्टी संगठन और रणनीति का योगदान मिला, वहीं स्थानीय मजबूत छत्रपों ने उसमें बड़ी भूमिका निभायी।

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पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम देश की राजनीति का नये सिरे से धु्रवीकरण करेंगे। वामपंथी और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में पूरी तरह साफ हो गए। अब सवाल यह पैदा होता है कि यदि कोई मोर्चा अगले लोकसभा चुनाव के लिए बनता है तो ममता बनर्जी उस मोर्चा की अगुआ बनने का स्वाभाविक दावा पेश करेंगी। सवा यह भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार पायेंगे। पश्चिम बंगाल की जनता ने जो फैसला विधानसभा चुनाव में दिया है वह सूझ-बूझ वाला कहा जायेगा। एक ओर जनता ने केन्द्र सरकार की नीतियों पर विचार किया और उसे सरकार नहीं सौंपी पर 80 से ऊपर विधानसभा सीट देकर सरकार को अपनी नीतियां जनहितैषी रखने का संदेश दिया। वहीं नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर और 200 से ऊपर सीट टीएमसी के खाते में जमा करके जनता ने सत्ता की चाबी फिर से तो सौंपी पर यह संदेश भी दिया कि अहम की राजनीति त्यागने से ही पश्चिम बंगाल का भला होने वाला है। विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की जनता ने डीजल, पेट्रोल के बढ़े दाम समेत कोरोना काल में दवाओं के अकाल, ऑक्सीजन की कमी और सबसे महत्वपूर्ण आक्रामक रवैया अपना रही भाजपा द्वारा लांघी गई संसदीय मर्यादा की सीमा के लिए भाजपा को सत्ता से दूर रखा।

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प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर और उनके संबोधनों के बावजूद भाजपा ने एक दर्जन से अधिक विधानसभा चुनाव हारे।

वहीं पश्चिम बंगाल की जनता ने ‘तोलाबाजी’, ‘कटमनी’ और ‘भ्रष्ट भाईपो’ सरीखे गंभीर आरोपों को भी नकार दिया।

‘दीदी’ के जिस व्यंग्यात्मक संबोधन से प्रधानमंत्री को मुगालता हुआ होगा कि ममता को चुनाव में परास्त किया जा सकता है, बंगाली जनता ने उस संबोधन को नया रूप दिया-‘दीदी गई नहीं, दीदी ही आईं।’ प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर और उनके संबोधनों के बावजूद भाजपा ने एक दर्जन से अधिक विधानसभा चुनाव हारे हैं। बहरहाल ममता बनर्जी ने लगातार 10 साल की सत्ता के बाद भी साबित किया है कि उनके खिलाफ कोई चुनावी लहर नहीं थी। भाजपा के कद्दावर नेताओं ने ‘परिवर्तन’ का सपना संजोया था। सपने कभी-कभार ही साकार होते हैं। चुनाव के दौरान भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जो नीति अपनायी उसे वहां की जनता ने अपनी पुरानी सभ्यता के विपरीत माना और माटी-मानुष का नारा देने वाली ममता बनर्जी की पार्टी को फिर से सत्ता सौंप दी।

देखा जाये तो ममता बनर्जी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह को बिलकुल वैसी ही शिकस्त मिली है, जैसी 2015 के बिहार चुनाव में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाकर दी थी। लेकिन जैसे बिहार की हार का मोदी-शाह की सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा, वैसे ही बंगाल की हार से भी बहुत फर्क नहीं पड़ने वाला है। तब तो मार्गदर्शक मंडल से भी कुछ आवाजें उठी थीं, लेकिन अब तो वे भी बेजान पड़ी हैं। 2015 की जीत के बाद नीतीश कुमार की हैसियत जरूर बढ़ गयी थी और ठीक वैसे ही ममता बनर्जी की भी बढ़ सकती है लेकिन अगले आम चुनाव में अभी तीन साल का लंबा वक्त है और बीजेपी के पास अकेले भी पूरा बहुमत है।

विधानसभा चुनाव

ऐसे में ममता बनर्जी सिवा अपनी किसी तैयारी के मोदी-शाह को तो कहीं से कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं। बीजेपी के भीतर भी ऐसी कोई चुनौती कहीं नजर नहीं आती जो मोदी-शाह के वर्चस्व के लिए किसी तरह की मुश्किल खड़ा करने वाली हो। बंगाल जीत लेने की बात और होती, लेकिन आरएसएस को भी मोदी-शाह से कोई खास शिकायत नहीं होने वाली है क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण तो चल ही रहा है. काशी और मथुरा को लेकर अभी कोई खास प्रयोजन भी नहीं लगता। धारा 370 और तीन तलाक जैसे मामले निपट ही चुके है और अगले साल जहां जहां भी चुनाव होने वाले हैं वहां तक ममता बनर्जी की जीत भी कोई असर नहीं होने वाला है और न ही ममता बनर्जी उन चुनावों को किसी भी तरीके से प्रभावित करने की स्थिति में हैं। वहीं ममता विपक्ष का सर्वमान्य चेहरा बन पाएगी इसकी संभावना न के बराबर ही है। ममता की तुनकमिजाजी किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनका मन मुटाव जग जाहिर है। सोनिया के नेतृत्व को अस्वीकार करते ही ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी बनायी थी। वे अपने संघर्ष को पूरी तरह कैश कराना अपना अधिकार मानती है। यह भी सत्य है कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन के दौरान ममता बनर्जी कई बार जेल गई हैं और उन्हें बुरी तरह सड़क पर पीटा भी गया है।

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राष्ट्रीय स्तर पर ममता को पहली चुनौती तो राहुल गांधी से ही मिलेगी, भले ही झारखंड के बाद के सारे विधानसभा चुनाव कांग्रेस हारती आ रही हो. कांग्रेस भी राहुल गांधी के लिए अब ममता बनर्जी को वैसे ही लेगी जैसे छह साल पहले वो नीतीश कुमार के नाम पर बिफर उठती थी। ममता की ही तरह विपक्षी खेमे से जीत हासिल करने वाले पिनराई विजयन और एमके स्टालिन भी निश्चित तौर पर दिल्ली में अपनी हिस्सेदारी के लिए तत्पर तो होंगे ही, लेकिन विजयन की राह में जहां उम्र आड़े आ सकती है, वहीं स्टालिन का झुकाव ज्यादा राहुल गांधी के प्रति ही है। भाजपा ने संघर्ष किया उसका सिला उसे मिला है ठीक वैसे ही जैसे असम में भाजपा दो बार सत्ता हासिल करने से चूक गई थी। दक्षिण में एक राज्य में भाजपा एनडीए की शीर्ष बनकर सरकार चलायेगी तो तमिलनाडु में चार विधानसभा सीट जीतने के बाद द्रविड राजनीति वाले इस राज्य में भाजपा को अपने पैर जमाने का अवसर मिल गया है। कुल मिलाकर केन्द्र की राजनीति पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे ज्यादा असर डालते नहीं दिखते। विपक्ष के पास कोई सर्वमान्य नेता नहीं है। बंगाल में भाजपा की ताकत तो बढ़ी है, ऐसे में ममता के लिए पहले की तरह सरकार चलाना अब आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर ये देखना अहम होगा कि विपक्ष के राजनीतिक दल इन चुनाव नतीजों को राष्ट्रीय स्तर पर किस प्रकार अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए उपयोग कर पाते हैं।

  • लेखक उप्र राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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One thought on “विधानसभा चुनाव नतीजों में छिपे भविष्य के संकेत

  1. बहुत ही बेहतरीन पोस्ट है। हमें पढ़कर एक अलग तरह से लेख को लिखने का ज्ञान मिला।
    प्लीज मुझे अपनी मेल आई डी दीजिये।

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