कर्मफल की कसौटी पर श्री योगी!

कर्मफल की कसौटी पर श्री योगी!

Editor Anil Kumar Mishra
अनिल कुमार मिश्रा 
(चेयरमैन एवं प्रधान संपादक)
"वशिष्ठ वाणी व संसद वाणी" 
दैनिक समाचार पत्र

2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत हासिल हुई तो कुछ घटनाक्रम के बाद योगी आदित्यनाथ को विधानमंडल दल के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंप दी गई। किसी को खुशी तो बहुतों को आश्चर्य भी हुआ।

CM Yogi

शपथ लेते ही उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश के दृढ़ संकल्प के साथ कार्यक्रम शुरू किया। अपराध उन्मूलन, भूमाफिया उन्मूलन, स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेस वे, अप्रवासी मजदूर पलायन, लव-जिहाद पर कठोर निर्णय, महिलाओं की सुरक्षा, कोविड महामारी पर तत्परता से रोकथाम करना, ऑक्सीजन, दवा की कालाबाजारी पर तुरंत कार्रवाई, को- वैक्सीनेशन को प्राथमिकता के तौर पर लेना और भी बहुत-सी विकास की योजनाओं पर मुस्तैदी से काम करना इनकी प्राथमिकता में था। लेकिन कुछ अपवादों में भी इनकी उपस्थिति बनी रही।

इनकी पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ताओं ने जातिगत आधार पर कार्यवाही, ब्राह्मण विरोधी छवि, भाषा की मर्यादा को तार तार करना, पार्टी कार्यकर्ताओं से ज्यादा हिन्दु वाहिनी के लोगों पर ध्यान देना इत्यादि अपवादों से नाता बना रहा।

अब इसके मुल्यांकन समय करीब आ गया है जो सिर्फ जनता के हाथों में है। किसी भी सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों के कार्यों का मुल्यांकन हर पांचवें साल में जनता के द्वारा किया जाता है। कुछ पार्टी कार्यकर्ता लामबंद हो कर योगी का विरोध कर रहे हैं तो दुसरी तरफ बहुत से लोग योगी को पुनः सत्ता की चाबी सौंपने के पक्ष में है।

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श्री योगी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के समक्ष पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी और भरोसा दिलाया कि 2022 में एक बार पुनः जनता का विश्वास हासिल कर लेंगे, लेकिन अंतिम फैसला तो जनता-जनार्दन को ही करना है।

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अब देखना ये है कि सन् 2022 में कर्मफल की कसौटी पर जनता योगी जी को एक मौका और देती हैं या विपक्ष के किसी और नेता पर भरोसा जताती है।

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