श्रेष्ठ जीवन के लिए सत्संग जरूरी है

श्रेष्ठ जीवन के लिए सत्संग जरूरी है

Epaper Vashishtha Vani

Ramswaroop Rawatsare
लेखक रामस्वरूप रावतसरे

एक लड़के को उसके पिता ने संत कबीर जी के पास भेजा और कहा कि उनके प्रवचन (सत्संग) सुनने के लिए रोज जाया करो। लड़के ने अपने पिता से कहा कि वह तो पढा लिखा समझदार है, उसे कबीर जी के प्रवचन सुनने की क्या जरूरत है! पिता के बार बार कहने पर वह लड़का कबीर जी के पास चला गया।

लड़के ने संत कबीर जी से कहा कि गुरुजी, मैं पढ़ा-लिखा हूं और अपना अच्छा-बुरा समझता हूं, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे आपके प्रवचन सुनने भेजा है। आप ही बताइए मेरे जैसे समझदार इंसान को प्रवचनों की क्या जरूरत है?

कबीर जी ने उस लड़के की पूरी बात गौर से सुनी। पर वे चुपचाप रहे। बोले कुछ भी नहीं। उन्होंने पास में रखी हथौड़ी उठाई और जमीन में गड़े एक खूंटे पर जोर से मार दी। कबीर जी का कुछ नहीं बोलना और जमीन में गड़े खूंटे पर हथौड़ी मारना लड़के को कुछ समझ नहीं आया। वह कुछ देर खड़ा खड़ा कबीर जी की ओर देखता रहा। जब वे कुछ भी नहीं बोले तो वह, वहां से अपने घर चला आया।

अगले दिन पिता ने कहा तो वह लड़का कबीर जी के पास फिर आया और बोला कि मैंने कल एक प्रश्न पूछा था, आपने उसका उत्तर नहीं दिया था। कृपया आज मेरे प्रश्न का उत्तर दे दीजिए। कबीर जी बोले कुछ नहीं, फिर उसी खूंटे के ऊपर जोर से हथौड़ी मार दी।

लड़के ने सोचा कि शायद इनका मौन व्रत है। इसी वजह से कुछ बोल नहीं रहे हैं। वह वहां से अपने घर चला आया। इसके बाद वह तीसरे दिन फिर गया और वही प्रश्न पूछा। इस बार भी कबीर जी ने उसी खूंटे पर हथौड़ी मार दी। ये देखकर लड़के का धैर्य टूट गया। उसने कहा कि आप मेरे प्रश्न का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? मैं तीन दिन से एक ही बात आपसे पूछ रहा हूं।
संत कबीर बोले कि मैं तो तुम्हें रोज जवाब दे रहा हूं। मैं इस खूंटे पर हथौड़ी मारकर जमीन में इसकी पकड़ मजबूत कर रहा हूं। अगर इस खूंटे की पकड़ कमजोर होगी तो इससे बंधे पशुओं की खींचतान से या ठोकर लगने से ये जमीन से निकल जाएगा। ठीक इसी तरह का काम प्रवचन करते हैं।

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सत्संग, प्रवचन और अच्छी बातें हमारे मन रूपी खूंटे पर बार-बार प्रहार करती हैं तो हमारे नकारात्मक विचार खत्म होते हैं। प्रवचन विभिन्न प्रकार की ललासाओं अपेक्षाओं के भंवरजाल में पड़ने से बचाने के साथ साथ श्रेष्ठ और सकारात्मक विचार बढ़ाते हैं। हर रोज अच्छी बातें पढ़ने और सुनने से हमारा मन विभिन्न प्रकार की बुराई से दूर हो जाता है। सत्संग ही ऐसा आधार है जिससे श्रेष्ठ व्यक्ति ही नहीं, श्रेष्ठ समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है। सत्संगत में रहने से व्यक्ति कभी भी किसी का बुरा नहीं सोचता। सबकी भलाई की कामना करता है। इसलिए सत्संग एवं प्रवचन जरूरी है।

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