Fri. Feb 23rd, 2024

Rashid Khan: गायकी में ऐसा दर्द के पत्थर भी जाते थे पिघल, गायकी सुनने के लिए पक्षी भी जाते थे ठहर 

Ustad Rashid Khan

Ustad Rashid Khan: उस्ताद राशिद खान भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक दिग्गज गायक थे, जिनकी मीठी आवाज ने देश-विदेश में लाखों लोगों को उनकी गायकी का दीवाना बनाया था. 1968 में जन्में, वह रामपुर-सहसवान घराने के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते थे और उन्होंने अपने परदादा उस्ताद इनायत हुसैन खान की विरासत को ही आगे बढ़ाया.

गायकी में ऐसा दर्द के पत्थर भी जाते थे पिघल

उस्ताद राशिद खान की गायकी की खासियत थी उनकी गहरी और मीठी आवाज, जो रागों की नजाकत को बखूबी बयां करती थी. उनकी तान और सरगम की तानकारी बेहद खूबसूरत होती थी, और वो रागों को इस तरह पेश करते थे कि वो सुनने वालों के दिलों को छू लेते थे.

उनकी अनूठी प्रतिभा को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों, पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उनके शिष्यगण अब भारत और विदेशों में उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उस्ताद राशिद खान की जिंदगी अनगिनत अनूठी कहानियों से भरी है. उनकी आवाज का जादू और उनके स्वभाव की विनम्रता के किस्से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. उस्ताद राशिद खान की आवाज इतनी मीठी थी कि पत्थर भी पिघल जाते थे. 

पिता ने सिखाया रियाज क्यों जरूरी

एक बार, युवा राशिद खान ने अपने पिता, उस्ताद गुलाम अली खान से कहा, “मैं अब रियाज नहीं करना चाहता!” उनके पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, बेटा. आज शाम को बगीचे में चलो.” बगीचे में जाकर उन्होंने एक फूल को चुपचाप खिलते देखा. फिर उन्होंने एक पत्ते को धीरे-धीरे गिरते देखा. उन्होंने राशिद से पूछा, “बेटा, फूल खिलने और पत्ते गिरने में क्या समानता है?” राशिद ने सोचा और कहा, “दोनों ही धीमी और शांत प्रक्रियाएं हैं.” उसके पिता ने कहा, “रियाज भी यही है, बेटा. यह धीमी और निरंतर मेहनत का फल है. जो रियाज छोड़ देता है, वह खिलने के सपने भूल जाता है.” राशिद समझ गए और अगले दिन से फिर रियाज में जुट गए.

जब उस्ताद के गाने पर शहंशाह ने खड़े होकर बजाई तालियां

एक बार, ईरान के शहंशाह मोहम्मद रजा पहलवी ने उस्ताद राशिद खान को शाही दरबार में गाने का निमंत्रण दिया. जब उस्ताद ने राग “यमन” गाया, तो शहंशाह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने सिंहासन पर खड़े होकर तालियां बजाईं. बाद में, उन्होंने उस्ताद को बताया कि कैसे उनका संगीत उन्हें उनकी दिवंगत रानी की याद दिलाता है और उनके दुःख को कैसे कम करता है.

जब राशिद खान ने बताया था अपनी सुंदर आवाज का राज

उस्ताद अक्सर विदेशी दौरों पर जाते थे और वहां भारतीय शास्त्रीय संगीत का परिचय देते थे. एक बार, अमेरिका में एक कॉन्सर्ट के दौरान, एक छोटी लड़की उनके पास आई और पूछा, “आपकी आवाज इतनी सुंदर क्यों है?” उस्ताद ने उसे गले लगाया और कहा, “बेटी, संगीत दिल की भाषा है. यह शब्दों की सीमाओं को पार करती है और सीधे आत्मा को स्पर्श करती है. मेरी आवाज उस सफर की गवाह है.”

जब उनके संगीत के दीवाने हो गए थे पक्षी

एक बार, वह दिल्ली के जामा मस्जिद में गा रहे थे. उनकी गायकी सुनने के लिए न सिर्फ इंसान, बल्कि पक्षी भी झुंड में आ गए थे. एक छोटी चिड़िया राग की ताल में झूमते हुए छत पर जा बैठी. मीठी स्वरों के बीच वो इतनी तन्मय हो गई कि संतुलन खो बैठी और नीचे गिरने लगी. उस्ताद राग के अंत तक गाते रहे, लेकिन उनकी आंखें चिड़िया पर टिकी थीं. जैसे ही वो जमीन छूने वाली थी, उस्ताद ने अपनी हथेली फैला दी. चिड़िया धीरे से उनकी हथेली पर आ गिरी, मानो किसी अदृश्य धागे ने उसे खींच लिया हो.

उस्ताद ने चिड़िया को प्यार से सहलाया और उसे धीरे से छत पर लौटा दिया. वो चिड़िया तब से उनकी गायकी का सुकून पाने को लौटती रही. ये कहानी बताती है कि उस्ताद राशिद खान की कला न सिर्फ मनुष्यों को, बल्कि प्रकृति को भी छू लेती थी.

भीमसेन जोशी ने बताया था भारतीय संगीत का भविष्य

ये सिर्फ कुछ कहानियां हैं जो उस्ताद राशिद खान की महानता की झलक दिखाती हैं. उनकी गायकी को लेकर एक बार पंडित भीमसेन जोशी ने भी कहा था कि भारतीय संगीत की आवाज का भविष्य उज्जवल हाथों में है. उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, और उनकी आवाज हमेशा हमारे दिलों में गूंजती रहेगी. उनकी कहानियां, उनके शब्द, उनकी आवाज – वो सब हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे. उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. RIP, उस्ताद राशिद खान.

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