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PM मोदी के गांव मिला कुछ ऐसा, दुनियाभर में हुई चर्चा

गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांव वडनगर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. भारत के पुरातत्वविद और भूवैज्ञानी यहां जांच के लिए पहुंचे हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (खड़गपुर) के एक अध्ययन में प्रधानमंत्री नरेंद्र के गांव वडनगर में 800 ईसा पूर्व (ईसाई युग से पहले) तक पुरानी मानव बस्ती खोजी है. 

एएनआई की रिपोर्ट में आईआईटी खड़गपुर में भूविज्ञान और भूभौतिकी के प्रोफेसर डॉ. अनिंद्य सरकार ने बताया कि वडनगर में गहन पुरातात्विक उत्खनन के अध्ययन से यह भी संकेत मिलता है कि इस लंबे 3,500 वर्षों के दौरान सूखे जैसे जलवायु परिवर्तन, विभिन्न साम्राज्यों का उत्थान, पतन और मध्य एशियाई योद्धाओं की ओर से भारत पर बार-बार आक्रमण हुआ.

उधर गुजरात सरकार की ओर से कहा गया है कि टीम पिछले 4-5 वर्षों से एएसआई के साथ वडनगर में काम कर रही है. यहां खुदाई में एक बहुत पुराने बौद्ध मठ का भी पता चला है. एएसआई 2016-2023 से काम कर रहा है. इस दौरान टीम ने 20 मीटर की गहराई तक खुदाई की है. कहा जाता है कि वडनगर का इतिहास काफी पुराना है.

भारत का सबसे पुराना जीवित किलेबंद शहर होने का दावा

उन्होंने आगे कहा कि वडनगर भारत का एकमात्र पुरातात्विक स्थल है, जहां प्रारंभिक से मध्यकालीन इतिहास पूरी तरह से संरक्षित है और जिसका सटीक कालक्रम अब ज्ञात है. उन्होंने कहा कि यह 800 ईसा पूर्व से निरंतर निवास के साथ भारत का सबसे पुराना जीवित किलेबंद शहर भी है. यहां सात सांस्कृतिक परतों का पता लगाया गया है, जो सबसे पुरानी परत 2800 साल या 800 ईसा पूर्व की है.

सरकार की ओर से कहा गया है कि हमारी हाल की कुछ अप्रकाशित रेडियोकार्बन तिथियों से पता चलता है कि यह बस्ती 1400 ईसा पूर्व या 1500 ईसा पूर्व जितनी पुरानी भी हो सकती है, जो उत्तर-शहरी हड़प्पा काल के अंतिम चरण के समकालीन है. यह पिछले 5,000 वर्षों से भारत में सांस्कृतिक निरंतरता के बारे में भी पता चला है. 

काफी समृद्ध था उस समय कृषि प्रधान भारतीय उपमहाद्वीप

सरकारी बयान में कहा गया है कि हमारे आइसोटोप डेटा और वडनगर में सांस्कृतिक काल की तारीखों से पता चलता है कि ये सभी आक्रमण ठीक उसी समय हुए जब कृषि प्रधान भारतीय उपमहाद्वीप मजबूत मानसून के साथ समृद्ध था, लेकिन मध्य एशिया काफी शुष्क और निर्जन इलाका था. यहां बार-बार सूखा पड़ता था. 

इस बीच पुरातत्व पर्यवेक्षक मुकेश ठाकोर ने कहा कि अब तक एक लाख से ज्यादा अवशेष खोजे जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि वडनगर में खुदाई तब से चल रही है जब पीएम मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे. यह एक जीवंत शहर है, जिसका कारण यह है कि यहां जल प्रबंधन प्रणाली और जल स्तर अच्छा है. 

सद्भाव से यहां रहते थे कई धर्मों के लोग

ठाकोर ने कहा कि वडनगर में अब तक लगभग 30 जगहों की खुदाई की गई है. इसमें पता चला है कि यहां विभिन्न धर्मों जैसे बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म के लोग सद्भाव से रहते थे. बताया गया है कि यहां आईआईटी खड़गपुर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और डेक्कन कॉलेज के शोधकर्ता एक साथ काम कर रहे हैं। 

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