3 दशक से लोगो को जागरूक करके पर्यावरण को बचाने का अनूठा प्रयास- परशुराम सिंह

3 दशक से लोगो को जागरूक करके पर्यावरण को बचाने का अनूठा प्रयास- परशुराम सिंह

संवाददाता:-रन्धा सिंह

चंदौली-नक्सल प्रभावित चकिया इलाके के कटवा माफी गाव निवासी परसुराम सिंह द्वारा पिछले 3 दशक से लोगो को जागरूक करके पर्यावरण को बचाने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है।पिछले 3 दशक में 20 हजार से ज्यादा पेड़ लगा कर उनकी देखभाल करने वाले परशुराम सिंह का मानना है कि लोगो को पर्यावरण के प्रति सचेत रहने कि शिक्षा दी जाय इसके लिए वे स्वयं गाव गाव जाकर पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे है। इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें ”वृक्ष बंधू” व विश्व बंधु की उपाधि भी मिल चुकी है।इस संबंध में बताते हुए परसुराम सिंह ने कहा कि उन्हें बचपन से ही पर्यावरण के प्रति ऐसा लगाव था कि उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का लक्ष्य ही बना लिया।वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से चिंतित होकर इन्होने खुद ही पेड़ लगाना शुरू कर दिया। पिछले 3 दशक में जिले भर में करीब 20 हजार से ज्यादा पेड़ लगा चुके परसुराम सिंह ने स्वयं के द्वारा लगाए गए वृक्षों को अपने बच्चो से भी बढ़ कर देखभाल की।पर्यावरण के प्रति इनके जूनून को देखते हुवे वन विभाग ने इन्हें वृक्ष बंधू की उपाधि से भी नवाजा है ।पर्यावरण में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर जहा पुरा विश्व चिंतित है वहीं पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगो में चेतना जगाना अब परशुराम सिंह के जीवन का लक्ष्य बन चुका है।भारतीय संस्कृति में पर्यावरण की शुद्धता पर प्राचीनकाल से ही ध्यान दिया जाता रहा है। प्राचीनकाल में हमारे यहाँ पंच भौतिक तत्त्वों जैसे – पृथ्वी, जल, आकाश, वायु एवं अग्नि के बारे में काफी लिखा गया, इन्हें पवित्र एवं मूल तत्त्वों के रूप में माना गया।वेदों व उपनिषदों में पंच तत्त्वों, वनस्पति तथा पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की गई है। प्रकृति में वायु, जल, मिट्टी, पेड-पौधों, जीव-जन्तुओं एवं मानव का एक संतुलन विद्यमान है, जो हमारे अस्तित्व का आधार है। जीवनधारी अपनी आवश्यकताओं के लिए प्रकृति पर निर्भर हैं।सच पूछा जाये तो आधुनिक मानव सभ्यता को प्रकृति द्वारा प्रदान की गई सबसे मूल्यवान् निधि पर्यावरण है।जिसका संरक्षण एक बडा दायित्व है।आधुनिक वैज्ञानिक युग में यह आवश्यक है कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस निधि का बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से उपयोग किया जाए और आने वाली पीढी को भी इसे प्रति जागरूक बनाया जाए। पर्यावरणीय चेतना व पर्यावरण संरक्षण आज के युग की प्रमुख माँग है।

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