नकारात्मक भाव हमारी  प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा सकता है।

नकारात्मक भाव हमारी प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा सकता है।

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Ramswaroop Rawatsare
रामस्वरूप रावतसरे
लेखक

क बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह फैलाई कि उसके पड़ोस में रहने वाला नौजवान चोर है। यह बात दूर – दूर तक फैल गई। आस – पास के लोग उस नौजवान पर नजर रखने के साथ साथ बचने भी लगे। कोई उससे किसी प्रकार का लेन देन नहीं करता था। यहां तक कि वह सत्य कहता, ईमानदारी से पेश आता, पर उस पर कोई विश्वास ही नहीं करता। लोगों का व्यवहार देख कर नौजवान परेशान हो गया।

इसी दरम्यांन गाँव में चोरी की एक वारदात हो गई। पूरे गाँव का शक उस नौजवान पर गया। चोरी के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कई दिनों तक मुकदमा चला लेकिन सबूत के अभाव में वह नौजवान निर्दाेष साबित हो गया। निर्दाेष साबित होने के बाद वह नौजवान चुप नहीं बैठा। उसे मालूम हो चुका था कि उसके पड़ोस में रहने वाले बूढ़े आदमी द्वारा फैलाई गई झूठी अफवाह के कारण उस पर चोरी का आरोप लगा। उसे कितनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ा। उस नौजवान ने झूठी अफवाह फैलाने वाले बूढे पड़ोसी पर पंचायत में मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया।

पंचायत ने बूढ़े आदमी को पेशी पर बुलाया। सरपंच ने उससे पूछा कि उन्होंने किस आधार पर नौजवान के चोर होने की बात को फैलाया। बूढे आदमी ने कहा मेरा उस नौजवान को किसी भी प्रकार से नुकसान पहुचाने का इरादा नहीं था, बस मैने तो सहज ही में एक टिप्पणी भर की थी।

सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा… आप एक कागज के टुकड़े पर वो सब बातें लिखें, जो आपने उस नौजवान के बारे में कहीं थीं और जाते समय उस कागज के टुकड़े – टुकड़े करके घर के रास्ते पर फ़ेंक दें। कल फैसला सुनने के लिए इसी समय पंचायत आ जाएँ।

बूढ़े व्यक्ति ने वैसा ही किया । कागज के टुकड़े पर वे सारी बातें लिखी ,जो उसने नौजवान के बारे में लोगों को कही थी। उसके बाद घर जाते समय उस कागज के टुकड़े के छोटे छोटे टुकड़े कर रास्ते में बिखेर दिये।

अगले दिन फिर बूढे आदमी और नौजवान की उपस्थिति में गांव के गणमान्य लोगों के साथ पंचायत लगी। सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा कि फैसला सुनने से पहले आप बाहर जाएँ और कल जो कागज के टुकड़े रास्ते में फेंक दिए थे उन टुकड़ों को इकट्ठा कर ले आएं।

बूढ़े आदमी ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता। उन टुकड़ों को तो हवा कहीं से कहीं उड़ा कर ले गई होगी। अब वे नहीं मिल सकेंगें, मैं कहाँ – कहाँ उन्हें खोजने के लिए जाऊंगा ?

सरपंच ने कहा ठीक इसी तरह, एक सरल – सी टिप्पणी भी किसी का मान – सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है। जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता। इस नौजवान के साथ भी ऐसा ही हुआ है। आपने सहज भाव से नकारात्मक टिप्पणी की थी। पूरे गांव के लोग इस नौजवान पर शक करने लगे थे। यह निर्दोष होते हुए भी चोरी के इलजाम में पकड़ा भी गया।

आज जब यह जानकारी मिली है कि इस नौजवान को परेशान करने के पीछे आपकी नकारात्मक टिप्पणी थी। गांव भर में आपको बुजुर्ग होने के नाते जो सम्मान मिलता था शायद अब नहीं मिले। लोगों के सामने वास्तविकता जो आ चुकी है।

आज कल हम जिस वातावरण में रह रहे हैं उसमें इस प्रकार की घटनाएं बहुत अधिक हो रही है। किसी अंजान व्यक्ति के बारे में सम्पूर्ण जानकारी नहीं होने पर भी हम लोग ना जाने क्या क्या कह जाते है। आपस में रोज मिलने तथा जानकारी होने पर भी यदि उससे हमारा कहीं कोई दुराव है तो हम उसके बारे में इतना नकारात्मक वमन करेगें कि यदि वह व्यक्ति सामने होतो ना जाने क्या हो जाय। यह भी है कि हमारे इस प्रकार नकारात्मक विचार प्रकट करने से हमें कुछ भी लाभ नहीं होता है।

लेकिन हमने अपनी ऐसी प्रवृति बना ली है कि किसी भी व्यक्ति के बारे में सकारात्मक कम और नाकारात्मक विचार अवश्य प्रकट करते है। हमें इससे बचना चाहिए। लगातार इस प्रकार के विचार दिलो दिमाक में रखने से वे हम पर हावी होगें। ऐसी प्रवृति हमारी वैचारिक एवं व्यावहारिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुचाती है। किसी के बारे में कुछ नकारात्मक कहने से पहले अपने बारे में अवश्य विचार करलें। नाकारात्मकता सामने वाले को तो व्यथित करती ही है, किन्तु हमारे लिए भी वह विनाश को आमन्त्रण देती है।

सचमुच शब्द हमारे भाग्य विधाता है। इनकी मृदुता पर हमारे जीवन की मृदुता टिकी है। मृदृता का कोई विकल्प नहीं है। भक्ति और त्याग दोनों मृदुता पर ही टिके हैं। शायर जोक ने असरदार जुबां पाने की कामना के लिए लिखा है ’’है आरजू यही कि करम तू गर कहे वह बात दे जुबां में दिल पर असर करे।’’

इसलिए यदि किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें। वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए, ताकि हम शब्दों के दास न बनें।

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