साइकिल यात्रा द्वारा देश में एकता का संदेश देते हैं नागराज गौड़ा

साइकिल यात्रा द्वारा देश में एकता का संदेश देते हैं नागराज गौड़ा

संवाददाता शमा ईरानी

मुंबई: कर्नाटक के 48 वर्षीय नागराज गौड़ा ने देशभर में साइकिल पर घूमते हुए एकता का संदेश दिया है और इसे ही अपने जीने का मकसद मानते है। नागराज गौड़ा मुंबई से साइकिल यात्रा करते हुए इंदौर पहुंचे। यह यात्रा उन्होंने 3 दिसंबर 2017 में मुंबई से शुरू की थी। वह डेढ़ सालों में 12 हज़ार किलोमीटर से ज्यादा की साइकिल यात्रा कर चुके हैं। वे कहते हैं कि मेरी इस यात्रा का मकसद राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। इसके साथ ही देशभक्ति, विश्वशांति, पानी बचाओ-हरियाली बढ़ाओ, सनातन धर्म के आधार पर सर्व धर्म समभाव का संदेश भी देना है। मेरा यह संदेश देश के मुट्ठीभर लोगों को भी समझा सका तो मानूंगा मेरा जीवन और परिश्रम सफल हुआ। यही मेरे जीने का तरीका है।

यात्रा द्वारा देश में एकता का संदेश देते हैं नागराज गौड़ा 1

वे कहते हैं जब मैंने अपनी यह यात्रा शुरू की तो कई लोगों ने कहा कि इस साइकिल पर यात्रा करने से एकता और भाईचारा नहीं आएगा। मैंने ऐसे ही एक शख्स से पूछा कि आपके घर में कितने लोग हैं? उन्होंने कहा 6। मैंने फिर पूछा- उनमें से कितने आपकी बात मानते हैं, तो वो बोले 4। मैंने कहा ऐसा ही हमारा देश है। 2 लोग आपके घर में आपकी ही बात नहीं सुनते फिर ये तो देश है। सबको अपने तरीके से जीवन जीना है। कई ऐसे मिलेंगे जो मेरे संदेश को नज़रअंदाज़ करेंगे लेकिन मेरी इस यात्रा में मैं अपना संदेश मुट्‌ठीभर लोगों को भी समझ सका तो मैं कामयाब मानूंगा।

उन्होंने गुजरात में पाक बॉर्डर तक जाने के बाद राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी होते मप्र का सफर किया है। वे बताते हैं कि कर्नाटक में दुकान चलाता था। पैसों की कमी नहीं थी लेकिन मन देशभक्ति और समाजसेवा में लगा रहता था। एक बार बैंगलुरू में गांधीवाद समाजसेवी एस.एन. सुब्बाराव के कैम्प में शामिल हुआ तो बहुत प्रभावित हुआ। उसके बाद से ही साइकिल लेकर निकल पड़ा। महज़ पांच हज़ार रुपए थे पास में। मंदिर, आश्रम, गुरुद्वारा या ढ़ाबा, जहां जाता हूं ठहरने- खाने की व्यवस्था हो जाती है।

वे कहते हैं कि मैं सुबह 8 बजे यात्रा शुरू करता हूं और शाम 6 बजे तक साइकिल चलाता हूं। लोगों से पहले ही आगे रूकने के लिए ठिकाने की पुख्ता जानकारी ले लेता हूं। यात्रा के दौरान कई बार 40-50 किलोमीटर तक आदमी नहीं मिलते। इसलिए साइकिल से लंबी दूरी नापने वालों को सीख देना चाहूंगा कि अनजान जगहों पर वहां के लोगों की सलाह मानोगे तो मुसीबत में नहीं फंसोगे। कई बार लोगों की सलाहें मुझे बहुत काम आई हैं।

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