बनारस का नाम आए और हर हर महादेव का नारा न लगे ऐसा कैसे हो सकता है: प्रधानमंत्री

बनारस का नाम आए और हर हर महादेव का नारा न लगे ऐसा कैसे हो सकता है: प्रधानमंत्री

  • बच्‍चों के मस्तिष्क विकास में खिलौने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मनोवैज्ञानिक गतिविधि तथा ज्ञान की कुशलता बढ़ाने में बच्‍चों की मदद करते हैं-नरेन्द्र मोदी
  • पीएम ने दुनिया में भारत के खिलौने का डंका बजाने की खिलौना उद्योग से जुड़े लोगों से की जोरदार अपील
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को “द इंडिया टॉय फेयर-2021” की, कि शुरुआत

महेश पाण्डेय ब्यूरो चीफ

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया में भारत के खिलौने का डंका बजाने की खिलौना उद्योग से जुड़े लोगों से जोरदार अपील करते हुए कहा कि इको फ्रेंडली खिलौना निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाना है तो लोकल फॉर वोकल होना है। खिलौना उद्योग को वैश्विक हब बनाया जाएगा। भारत के खिलौना उद्योग में कितनी ताकत छिपी है। इसे बढ़ाना निर्भर भारत का हिस्सा है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को “द इंडिया टॉय फेयर-2021” की शुरुआत के अवसर पर खिलौना उद्योग से जुड़े देश भर के लोगों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा वर्चुअली संवाद कर रहे थे। उन्होंने खिलौना उद्योग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खिलौना बच्चों में बौद्धिक विकास करते हैं। कोरोना का काल के दौरान उन्होंने मास्क वाला खिलौना (खिलौने के चेहरे पर लगा मास्क) बनाए जाने पर भी जोर दिया। खिलौना बच्चों के जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।

बच्चे खिलौना के रूप में क्या चाहते हैं के अनुरूप खिलौने की डिजाइन तैयार कर खिलौनों को बनाए जाने पर उन्होंने विशेष जोर दिया। वाराणसी में बेहतरीन हस्तकला संकुल भी है। खिलौना कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार से जो भी हो सकता है वह करेगी कारोबारियों को विश्वास दिलाया। खिलौनों का इतिहास भू-भाग के बराबर है। उन्होंने “द इंडिया टॉय फेयर-2021” की चर्चा करते हुए कहा कि यह एक ऐसा मंच होने जा रहा है जहां पर खिलौना का डिजाइन, मार्केटिंग, पैकेजिंग तक की चर्चा-परिचर्चा के साथ ही आपसी अनुभव साझा होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों के चौमुखी विकास में भारतीय खिलौना की अहम भूमिका है।

भारतीय खिलौना अन्य की अपेक्षा सस्ते होते हैं। इसके लिये उन्होंने वाराणसी के लकड़ी के खिलौने, लकड़ी के गुड़िया आदि का उदाहरण दिया। उन्होंने लकड़ी खिलौना कारोबारियों से खिलौना उत्पादन में प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करने व भविष्य में रिसाइकलिंग कर सके ऐसी सामग्री का इस्तेमाल करने की जोरदार अपील की। खिलौना पीढ़ियों के विरासत के रूप में संजोए जाते हैं। एक खिलौना बच्चों को अनंत खुशियों के दुनिया में ले जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइंस के कितने ही सिद्धांत बच्चे खिलौने से खेलते व उन्हें बनाते हुए सीख जाते हैं। रचनात्मक खिलौने बच्चों को पंख देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि जैसे वे बच्चों के पढ़ाई-लिखाई में अपनी सहभागिता करते हैं, उसी प्रकार बच्चों के खेलों में भी शामिल हो। खेल व गतिविधि आधारित शिक्षा को नई शिक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि दुनिया में खिलौना के 100 बीलियन डॉलर के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है। भारत में 85 फीसदी खिलौने विदेशों से आते हैं। गत सात दशकों में भारतीय खिलौना उद्योग व कारीगरों की उपेक्षा हुई है। उन्होंने कहा कि बच्‍चों के मस्तिष्क विकास में खिलौने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मनोवैज्ञानिक गतिविधि तथा ज्ञान की कुशलता बढ़ाने में बच्‍चों की मदद करते हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के कश्मीरीगंज खोजवा निवासी लकड़ी के खिलौना उद्योग से जुड़े रामेश्वर सिंह से वार्ता के दौरान कि वाराणसी का नाम आवे और हर हर महादेव का नारा न लगे ऐसा कैसे हो सकता है, तभी वर्चुअली जुड़े बनारस के कारीगरों संग प्रधानमंत्री मोदी ने भी हर हर महादेव का उद्घोष किया।

इस बीच बनारस के लकड़ी खिलौना कारोबार से जुड़े रामेश्वर सिंह सहित अन्य से वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री ने मास्क लगे हुए लकड़ी के खिलौने बनाए जाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बच्चों की विशेषता होती है कि बच्चे और खिलौने एक दूसरे को देखते हैं। खिलौने का नकल बच्चे करते हैं। खिलौना बच्चों के जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।

गौरतलब है कि यह मेला 27 फरवरी से 2 मार्च, 2021 तक चलेगा। इसका उद्देश्‍य सतत लिंकेज बनाने तथा उद्योग के समग्र विकास पर विचार-विमर्श करने के लिए एक ही प्‍लेटफॉर्म पर खरीददारों, विक्रेताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, डिजाइनरों आदि सहित सभी हितधारकों को लाना है। इस प्‍लेटफॉर्म के माध्‍यम से सरकार और उद्योग एक साथ विचार करेंगे कि कैसे भारत को खिलौना निर्माण और आउट सोर्सिंग का अगला वैश्विक हब बनाया जाए।ऐसा खिलौना क्षेत्र में निवेश आकर्षित करके तथा निर्यात बढ़ाकर किया जा सकता है। ई-कॉमर्स सक्षम वर्चुअल प्रदर्शनी में 30 राज्‍यों तथा केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 1000 से अधिक एक्‍जीबिटर अपने उत्‍पाद दिखाएंगे।

इसमें परंपरागत भारतीय खिलौनों के साथ-साथ इलेक्‍ट्रॉनिक टॉय, प्‍लस टॉय, पजल तथा गेम्‍स सहित आधुनिक खिलौने दिखाए जाएंगे। खिलौना मेला में खिलौना डिजाइन तथा उत्‍पादन के क्षेत्र में प्रसिद्ध भारतीय तथा अंतर्राष्‍ट्रीय वक्‍ता विचार-विमर्श करेंगे। बच्‍चों के लिए यह मेला पारंपरिक खिलौना बनाने में कौशल प्रदर्शन और खिलौना संग्रहालयों तथा फैक्‍ट्रियों का वर्चुअल विजिट सहित अनेक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर है। 

ज्ञातव्य हो कि अगस्‍त 2020 में अपने मन की बात कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि खिलौने न केवल क्रियाशीलता बढ़ाते हैं बल्कि महत्‍वाकांक्षाओं को पंख भी लगाते हैं। बच्‍चे के समग्र विकास में खिलौनों के महत्‍व की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने पहले भी भारत में खिलौनों के उत्‍पादन को बढ़ाने पर बल दिया है। भारत खिलौना मेला 2021 का आयोजन प्रधानमंत्री के इस विजन के अनुरूप किया जा रहा है।


इस अवसर पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा संयुक्त आयुक्त उद्योग उमेश सिंह, उपायुक्त उद्योग आदि अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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