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खत्म हुआ मराठा आरक्षण आंदोलन, आज सुबह 8 बजे मनोज जरंगे पाटिल तोड़ेंगे अनशन

Who is Manoj Jarange

Who is Manoj Jarange: पिछले कई महीनों से मराठा आरक्षण के लिए विरोध प्रदर्शनों और भूख हड़तालों का नेतृत्व करने वाले मनोज जरांगे मुंबई पहुंच गए हैं और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के प्रतिनिधि से बात की है. आज सुबह 8 बजे मनोज जरंगे पाटिल अपना अनशन तोड़ेंगे। 

आरक्षण की मांग को लेकर जरांगे ने 26 जनवरी से मुंबई के आज़ाद मैदान पर अनिश्चितकाल के लिए भूख हड़ताल शुरू करने का एलान किया था. महाराष्ट्र सरकार ने जरांगे को मुंबई पहुंचने से रोकने की काफ़ी कोशिशें कीं. मुंबई पुलिस ने उन्हें आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठने की इजाज़त देने से इनकार भी कर दिया लेकिन जरांगे अपने हज़ारों समर्थकों के साथ मुंबई पहुंच गए.

जरांगे शुक्रवार को मुंबई पहुंचे और दोपहर 3.15 बजे उन्होंने अपना पक्ष रखा.

वे बोले कि सरकार ने एक सूची दी है जो उन लोगों की है जिन्हें प्रमाण पत्र जारी किया गया है.

जरांगे ने मांग की कि “जिन 54 लाख लोगों के रिकॉर्ड मिले हैं उन्हें कुनबी उप-जाति का प्रमाणपत्र दिया जाए. जिनके पास रिकॉर्ड नहीं हैं उन्हें एक शपथ पत्र लिख कर देना चाहिए कि ये रिकॉर्ड हमारे परिजन के हैं लिहाजा हमें भी प्रमाणपत्र मिलने चाहिए.”

उन्होंने ये भी कहा कि “सरकार को इसे मंजूर करने को लेकर एक अध्यादेश लेकर आना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो कल आज़ाद मैदान के लिए हम कूच करेंगे.”

जालना ज़िले से हुई मार्च की शुरुआत

गणतंत्र दिवस पर मुंबई पहुंचे जरांगे ने कहा कि अगर सरकार ने मराठों को पहले ही आरक्षण दे दिया होता, तो उनको सड़कों पर उतरने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती.

मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग ये है कि मराठों को कुनबी उप-जाति का प्रमाण पत्र और अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण दिया जाए.

लेकिन सरकार का कहना है कि वो केवल उन्हीं को आरक्षण देगी जिनके पास कुनबी जाति का होने का प्रमाणपत्र होगा.

इसके अलावा, महाराष्ट्र सरकार फरवरी महीने में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मराठों को आरक्षण देने का क़ानून पारित कराने की योजना भी बना रही है.

अंतरवाली सराती में मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल ख़त्म कराते हुए महाराष्ट्र सरकार ने उनसे वादा किया था कि जिन मराठों के पास कुनबी होने के दस्तावेज़ मिलेंगे, उनको कुनबी जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा.

कुनबी होने का प्रमाणपत्र हासिल करने के बाद वो ओबीसी आरक्षण का फ़ायदा उठा सकेंगे.

ज़िला प्रशासनों ने कुनबी होने के दस्तावेज़ जमा करने भी शुरू कर दिए हैं.

हालांकि, अब जबकि मनोज जरांगे मुंबई पहुंच गए हैं, तो सरकार ने भी इस प्रक्रिया को तेज़ कर दिया है.

महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसी मक़सद से एलान किया है कि वो 23 जनवरी से 3 जनवरी तक मराठा समुदाय के सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए एक सर्वेक्षण कराएगा.

पिछड़ा वर्ग आयोग के मुताबिक़, इन आठ दिनों के दौरान उनके प्रतिनिधि पूरे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के साथ-साथ दूसरे वर्गों के घर-घर जाकर ये सर्वे करेंगे.

सर्वे के दौरान महाराष्ट्र में लगभग 2.5 करोड़ परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा, और इस काम में क़रीब सवा लाख सरकारी कर्मचारी लगाए गए हैं.

इतना व्यापक सर्वेक्षण सिर्फ़ आठ दिनों की बेहद कम समय सीमा में पूरा करना सरकारी मशीनरी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.

इससे पहले जब मराठा समुदाय को दिया गया आरक्षण रद्द किया गया था. तो सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पिछड़ा आयोग के निष्कर्षों पर सवाल उठाए थे.

इन कमियों को पूरा करने के लिए अब आयोग ने तय किया है कि वो मराठा समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए ये सर्वेक्षण फिर से करेगा. इस सर्वे में महाराष्ट्र के सभी 36 ज़िलों, 27 नगर निगमों और सात कैंट इलाक़ों को शामिल किया गया है.

कौन है Manoj Jarange

मनोज जरांगे मराठा आरक्षण के मामले में पिछले छह महीने से चर्चा में हैं. जबकि ये एक पुरानी मांग है.

जरांगे ने अपने आंदोलन की शुरुआत साल 2011 में अपने गाँव से की थी जो अब पूरे महाराष्ट्र में फैल चुका है.

इससे पहले मनोज जरांगे पाटिल, मराठा आरक्षण को लेकर किए गए कई आंदोलनों का हिस्सा थे। इनमें से कुछ की उन्होंने अगुवाई भी की थी.

हालांकि, पत्रकार कृष्णा पाटिल कहते हैं कि “कोविड-19 महामारी के दौरान, ख़ास तौर से 2021 में मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण के लिए सतारा- पिंपलगांव के विरोध प्रदर्शन को काफ़ी धारदार बना दिया था.”

“सतारा- पिंपलगांव में उनकी अगुवाई में छिड़ा आंदोलन लगभग तीन महीनों तक चलता रहा था. जब सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को रद्द कर दिया, तो उन्होंने अपना आंदोलन रोक दिया था. इसके बाद मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर 123 गांवों को इकट्ठा करके अंतरवाली सराटी में प्रदर्शन की शुरुआत की थी. इसी वजह से जालना ज़िले में उन्हें ख़ूब समर्थन मिला.”

मनोज जरांगे की इन कोशिशों की वजह से मराठवाड़ा क्षेत्र में काफ़ी तादाद में लोग उनके समर्थन में उठ खड़े हुए हैं.

मनोज जरांगे ने जब 29 अगस्त से अपने गांव में भूख हड़ताल शुरू की थी, तो उनका दावा था कि अंतरवाली सराटी में उनके समर्थन में लगभग तीन लाख लोग जमा हुए थे.

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