काशी पर्यटन की राजधानी बनने ही वाली है- धर्मार्थ कार्य मंत्री

काशी पर्यटन की राजधानी बनने ही वाली है- धर्मार्थ कार्य मंत्री

  • पर्यटन मंत्री डॉ0 नीलकंठ तिवारी ने “यूपी टूरिज्म फेरी” क्रूज को किया रिसीव, हुआ भव्य वेलकम सेरिमनी
  • पर्यटकों को सैर कराने के लिए पर्यटन विभाग की “यूपी टूरिज्म फेरी” क्रूज रविदास घाट पहुंचा
  • वाराणसी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई विकास योजनाएं तेजी से चल रही हैं
  • उत्तर प्रदेश विश्व का बहुत बड़ा केंद्र बनेगा, पर्यटन का प्रदेश बनेगा-पर्यटन मंत्री डॉ0 नीलकंठ तिवारी
  • महेश पाण्डेय ब्यूरो चीफ

वाराणसी: पर्यटन नगरी काशी के 84 श्रृंखलाबद्ध अद्भुत गंगा घाटों सहित आसपास के पर्यटन स्थलों का पर्यटकों को सैर कराने के लिए प्रसाद योजना अंतर्गत पर्यटन विभाग की “यूपी टूरिज्म फेरी” क्रूज आ चुका है। रविवार को संत रविदास घाट पर भव्य वेलकम सेरेमनी का आयोजन संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने विधिवत संत रविदास घाट पर क्रूज को रिसीव किया।

इस अवसर पर मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने बताया कि आध्यात्मिक नगरी एवं सांस्कृतिक राजधानी काशी सहित उत्तर प्रदेश एवं देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तथा वैश्विक पर्यटकों को सुविधा देने के लिए अनेक प्रकार की व्यवस्थाएं केंद्र की नरेंद्र मोदी व प्रदेश में योगी सरकार के मार्ग-निर्देशन में हो रहे हैं। हर क्षेत्र में जहां जो भी पर्यटकों की सुविधा हेतु जरूरत है उसे उपलब्ध कराना तथा पर्यटन स्थलों को उनकी प्रतिष्ठा एवं महिमा के अनुरूप के साथ ही पर्यटकों की सुविधा के अनुरूप विकसित करने का लगातार कार्य किया जा रहा है।

मंत्री डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश विश्व का बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। पर्यटन का प्रदेश बनेगा और काशी उस पर्यटन की राजधानी बनने ही वाली है। उन्होंने बताया कि काशी आये “यूपी टूरिज्म फेरी” क्रूज में काशी की विशेषताओं को लेकर सभी दीवारों पर अलग-अलग प्रकार के चित्र बनाए गए हैं। जिसमें आध्यात्मिक, साहित्यिक एवं यहां के गौरव पक्ष को लेते हुए अलग-अलग स्केज बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन एवं पर्यटकों के सुविधा की दृष्टि से एक क्रूज के अंदर जो भी सुविधाएं होनी चाहिए, वह सभी सुविधाएं इस क्रूज में सुनिश्चित करायी जाएंगी।

गौरतलब है कि गोवा से 23 नवंबर, 2020 को क्रूज चला था। उसे एक माह के अंदर वाराणसी पहुंचना था लेकिन कोहरा और रास्ता सही नहीं होने के चलते रफ्तार नहीं पकड़ सका। कोलकोता, ओडिशा, पटना, गाजीपुर के रास्ते यह शनिवार की शाम कैप्टन सुरेश बाबू के नेतृत्व में रामनगर टर्मिनल पर पहुंचा। गंगा के रास्ते वाराणसी सीमा में प्रवेश करने के साथ लोग जलयान को रुक-रुककर देखते रहे। शाम को रामनगर टर्मिनल पर देखने के लिए कई लोग पहुंच गए।

वाराणसी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई विकास योजनाएं तेजी से चल रही हैं। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तारीकरण करने के साथ गंगा घाटों का सुंदरीकरण किया जा रहा है। मंदिर का विकास गंगा घाट तक किया जा रहा है, जिससे पर्यटक मंदिर को सीधे देख सकें। बजड़े की तरह क्रूज में ऊपर और नीचे दोनों मंजिल पर 100 पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था की गई है। निचला मंजिल पूरी तरह वातानुकूलित है।

क्रूज की खासियत यह है कि चारों तरफ से खुला रहेगा जिससे पर्यटकों को गंगा और घाटों की सुंदरता देख सकेंगे। क्रूज का संचालन राजघाट से अस्सी घाट तक होगा। दोनों स्थानों पर जलयान में पर्यटकों को चढऩे और उतरने की व्यवस्था है। यहां टिकट काउंटर बनकर तैयार हो गए हैं। पर्यटक यहां से टिकट लेने के बाद गंगा और घाटों का आनंद उठा सकेंगे। पर्यटन मंत्रालय के प्रसाद योजना से 10.71 करोड़ में क्रूज संग अस्सी और राजघाट पर संचालन की व्यवस्था की गई है। दोनों घाटों पर टिकट काउंटर के साथ पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था की गयी है।

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