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शांति एवं अहिंसा के मूल्यों की स्थापना जरूरी: ओम बिरला

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शांति एवं अहिंसा के मूल्यों की स्थापना जरूरी: ओम बिरला

  • वरिष्ठ पत्रकार ललित गर्ग

नई दिल्ली, 2 अगस्त 2021/ वशिष्ठ वाणी: लोकसभा के अध्यक्ष श्री ओम बिरला (Om Birla) ने कहा कि नये भारत के निर्माण के लिए शांति और अहिंसा जैसे मूल्यों की स्थापना जरूरी है। संस्कृति उत्थान, राष्ट्रीय एकता, नैतिक मूल्यों का जागरण, अहिंसक समाज निर्माण, संस्कार एवं साधना-संयम जैसे मूल्य एवं आयाम राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है।

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श्री बिरला ने ‘स्वर्णिम आभा सूरज की’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए उक्त उद्गार व्यक्त किए। यह ग्रंथ समाजसेवी श्री सूरजमल घोसल के अस्सी वर्ष पूरे होने पर प्रकाशित किया गया है। ग्रंथ के संबंध श्री बिरला ने कहा कि समाज को नैतिकता, परोपकार और संस्कार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले ग्रंथ पाठकों के समक्ष समय-समय पर प्रकाशित होते रहने चाहिए, जिससे हम सबको सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती रहे। श्री सूरजमल घोसल पर प्रकाशित ग्रंथ जनोपयोगी एवं ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगा, ऐसा विश्वास है। उन्होंने आचार्य श्री महाश्रमण के अहिंसा एवं शांति के संदेश की उपयोगिता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बताये मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर ‘स्वर्णिम आभा सूरज की’ के संपादक श्री ललित गर्ग व प्रकाशक श्री पुखराज सेठिया ने विमोचन के लिए श्री ओम बिरला को ग्रंथ भेंट किया। श्री बिमल घोसल ने शाल्यार्पण कर श्री बिरला का सम्मान किया। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने आचार्य श्री महाश्रमण के भीलवाड़ा चातुर्मास की जानकारी देते हुए भीलवाड़ा पधारने का निमंत्रण दिया।

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विदित हो कि यह ग्रंथ आचार्य श्री महाश्रमणजी के निष्ठावान श्रावक राजलदेसर निवासी एवं फारबिसगंज प्रवासी श्री सूरजमलजी घोसल के आदर्श एवं परोपकारी जीवन एवं समाज सेवा के विविध रूपों का प्रेरक रूपांकन है। आपकी धर्मपत्नी श्रीमती मटकु देवी एक धर्म परायण आस्थाशील श्राविका हैं। आप दोनों की जीवनगत विशेषताओं को उजागर करने के उद्देश्य से ‘स्वर्णिम आभा सूरज की’ अभिनंदन ग्रंथ का प्रकाशन किया गया है। साथ ही इसमें राजलदेसर के गौरवशाली इतिहास को भी विस्तार से प्रकाशित किया गया है। श्री पुखराज सेठिया ने कहा कि सुप्रसिद्ध पत्रकार श्री ललित गर्ग के संपादन कौशल से ग्रंथ निःसंदेह बहुत उच्च कोटि का बना है। यह एक समयोचित व सुंदर प्रयास है। यह ग्रंथ भावी पीढ़ी में श्रद्धा, सेवा व समर्पण के संस्कार जगाने का महत्वपूर्ण आधार होगा।

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