मानसिक तनाव में दरोगा ने की आत्महत्या

मानसिक तनाव में दरोगा ने की आत्महत्या

रिपोर्टर: दीपक कुमार सिंह


लखनऊ/वाराणसी/चोलापुर: राजधानी लखनऊ में विधानसभा गेट नंबर 7 के पास दरोगा निर्मल कुमार चौबे ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली और जब मौत की सूचना निर्मल के पैतृक गांव वाराणसी के चोलापुर थाना क्षेत्र के पलहीपट्टी गांव में हुई तो गांव में सन्नाटा पसर गया दरोगा निर्मल कुमार चौबे के पास से एक सुसाइड नोट भी पुलिस को मिला है जिस पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा है “मुख्यमंत्री जी मैं बीमार हूं; मैं जा रहा हूं! मेरे बच्चे का ख्याल रखिएगा।

इस सुसाइड नोट ने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है।


राजधानी लखनऊ विधानसभा गेट नंबर 7 के पास 3 बजे गोली चलने की आवाज आई.फायरिंग की आवाज सुनकर पुलिसकर्मी पार्किंग में पहुंचे तो दरोगा निर्मल कुमार चौबे खून से लथपथ जमीन पर पड़े थे। उन्हें वहां पहुंचे पुलिसकर्मियों ने तुरंत सिविल अस्पताल भेजा गया जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया । दरोगा निर्मल कुमार चौबे के द्वारा खुद को गोली मारने की सूचना जब उसके गांव वाराणसी के चोलापुर थाना क्षेत्र के पलहीपट्टी गांव वालों को हुई तो पूरे गांव में हड़कंप सा मच गया प्राप्त जानकारी के अनुसार चार भाइयों में पहले नंबर पर था ।

दरोगा निर्मल कुमार चौबे चार भाइयों में पहले नंबर पर था उसके पिता स्वर्गीय देवी चरण चौबे की मृत्यु पूर्व में ही हो गई थी निर्मल की मां विद्या देवी उम्र 75 वर्ष को बीमारी के चलते उन्हें निर्मल की मौत की सूचना परिजनों के द्वारा नहीं दी गई है दरोगा निर्मल कुमार चौबे अपने परिवार दो बेटे और पत्नी के साथ लखनऊ ही रहता था निर्मल के बड़े बेटे का नाम विकास चौबे है जो कि लखनऊ में ही प्राइवेट जॉब करता है दूसरा लड़का सर्वेश चौबे लखनऊ में ही प्राइवेट जॉब करता है निर्मल अपने भाइयों में पहले नंबर पर था और उसके तीनों भाई बाहर ही रह कर प्राइवेट जॉब कर घर का खर्चा चलाते हैं वही ग्रामीणों की मानें तो दरोगा निर्मल कुमार चौबे बहुत पहले सड़क दुर्घटना में घायल भी हुआ था. तब से वो मानसिक तनाव में रहने लगा था निर्मल की दीक्षा अमर शहीद इंटर कॉलेज आयर व आदर्श पलहीपट्टी इंटर कॉलेज में हुआ था।

इंटर के बाद ही नौकरी की तैयारी कर पीएसी में चयन होने के बाद वो नौकरी पर चला गया निर्मल के तीनो भाई बाहर ही हैं उनको सूचना गांव रह रहे परिजनों के द्वारा दे दी गई बता दें कि दरोगा निर्मल कुमार चौबे बहुत कम छुट्टी लेकर गांव पर आता था और गांव पर आने के बाद एक-दो घंटे रहने के बाद ही वह ड्यूटी पर चला जाता था. उसके गांव पर रह रहे परिजनों की माने तो दरोगा निर्मल कुमार चौबे विगत 10 वर्षों से मानसिक तनाव में रहता था और जब उससे तनाव का कारण पूछा जाता था. तो बात को टाल मटोल कर दूसरी बात करने लगता था।

यही कारण है कि दरोगा निर्मल कुमार चौबे के मौत का कारण उसके गांव रह रहे परिवार के लोगों को नहीं चल सका दरोगा निर्मल कुमार चौबे के गांव वालों ने बताया कि निर्मल बहुत ही मृदु भाषी व सरल स्वभाव का था निर्मल के जाने की दु:ख उसके गांव वालों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी मौत की सूचना मिलते ही उसके गांव पर ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई।

लेकिन लोग दूर से ही आपस में अपनी शोक संवेदना प्रकट कर रहे थे और बार-बार यही कह रहे थे कि उसकी मां को गंभीर बीमारी है अगर उसकी मां को इस घटना के बारे में पता चलेगा तो ना जाने क्या होगा।

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